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जांच पूरी होने तक इस्तीफा दें उत्तराखंड के मुख्यमंत्री – राघव चड्ढा

मुख्यमंत्री के खिलाफ कथित भ्रष्टाचार के मामले में हाईकोर्ट ने CBI जांच का आदेश दिया है

Story Highlights
  • उत्तराखंड के मुख्यमंत्री को तत्काल इस्तीफा देना चाहिए - राघव चड्ढा
  • इस्तीफे के बिना कोई भी निष्पक्ष जांच संभव नहीं - राघव चड्ढा
  • BJP 'भ्रष्टाचार मुक्त भारत' की जगह 'भ्रष्टाचार युक्त भारत' बना रही है - राघव चड्ढा
  • 'भ्रष्टाचार मुक्त देवभूमि' का वादा करके BJP 'भ्रष्टाचार युक्त देवभूमि' बना रही है - राघव चड्ढा
  • केंद्र सरकार को उत्तराखंड के मुख्यमंत्री को तुरंत बर्खास्त करना चाहिए - राघव चड्ढा

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री के खिलाफ कथित भ्रष्टाचार के मामले में हाईकोर्ट की ओर से CBI जांच के आदेश दिए जाने के बाद अब इस मामले पर आम आदमी पार्टी ने मुख्यमंत्री त्रिवेंन्द्र सिंह रावत के इस्तीफे की मांग की. पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता राघव चड्ढा ने एक प्रेस कांफ्रेस के जरिए उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पर निशाना साधते हुए कहा कि “देवभूमि उत्तराखंड के इतिहास में पहली बार ऐसा हुआ है कि उत्तराखंड के चुने हुए मुख्यमंत्री के खिलाफ कथित भ्रष्टाचार के मामले में हाईकोर्ट ने CBI जांच का आदेश दिया है. राघव चड्ढा ने पत्रकारवार्ता को संबोधित करते हुए बताया कि उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पर कथित तौर पर आरोप हैं कि 2016 में जब त्रिवेन्द्र सिंह रावत भाजपा के झारखंड प्रभारी थे तब उन्होंने एक व्यक्ति को गौ सेवा आयोग का अध्यक्ष बनाए जाने के लिए 25 लाख की घूस ली थी और घूस के पैसे अपने रिश्तदारों के खाते में ट्र्रांसफर कराए थे. अब कोर्ट ने इस मामले पर संज्ञान लेते हुए मामले की जांच CBI से कराने का आदेश दिया है.

राघव चड्ढा ने इस पूरे मामले पर BJP की चुप्पी पर निशाना साधते हुए कहा कि “पूरे देश में BJP ने नारा दिया था कि ‘बहुत हुआ भ्रष्टाचार, अबकी बार मोदी सरकार’ लेकिन अब वही BJP उत्तराखंड में ‘करप्शन मुक्त देवभूमि’ की जगह ‘करप्शन युक्त देवभूमि’ बनाने का काम कर रही है. उत्तराखंड में जीरो टॉलरेंस की डबल इंजन वाली सरकार की जगह करप्शन युक्त सरकार चल रही है. ये किसी छोटे-बड़े अधिकारी के भ्रष्टाचार का मामला नहीं है बल्कि ये आरोप प्रदेश के मुखिया यानि मुख्यमंत्री के ऊपर है”.

राघव चड्ढा ने कहा कि “मैं पूछना चाहता क्या उत्तराखंड के मुख्यमंत्री अभी भी अपने पद पर बने रहेंगे ? अगर वो अपने पद पर बने रहेंगे तो इस मामले की निष्पक्ष जांच संभव नहीं है. हमारी मांग है कि जांच पूरी होने तक उत्तराखंड के मुख्यमंत्री इस्तीफा दें”

हाईकोर्ट ने उत्तराखंड पर जो बात कही है उससे ये साबित होता है कि उत्तराखंड में भ्रष्टाचार किस कदर व्याप्त है. कोर्ट ने कहा है कि याचिकाकर्ता ने वॉट्स मैसेज, फोन रिकॉर्ड, बैंक की रसीदें सबूत के तौर पर जमा कराई हैं लेकिन इनकी कभी जांच नहीं की गई है. उत्तराखंड हाईकोर्ट ने कहा है कि उत्तराखंड के सिस्टम के हर हिस्से में भ्रष्टाचार भर गया है और अब ऐसा लगता है कि ये उत्तराखंड में सामान्य बात हो गई है. कोर्ट ने आगे कहा कि “मुख्यमंत्री पर लगाए गए आरोप गंभीर हैं. इनकी जांच होना और सच का सामने आना जरूरी है. यह राज्य के हित में ही होगा कि सभी तरह के संदेह खत्म हों. इसलिए कोर्ट का मानना है कि CBI को मामले में FIR दर्ज करनी चाहिए और पूरे मामले की जांच करनी चाहिए।” कोर्ट के फैसले की गंभीरता का अंदाजा इस बात से भी लगाया जा सकता है कि कोर्ट ने इस मामले से जुड़ी सभी फाइलें, सबूत और दस्तावेज 2 दिन के अंदर CBI को सौंपने का आदेश दिया है.

राघव चड्ढा ने कहा कि कोर्ट के फैसले के बाद आम आदमी पार्टी ये मांग करती है कि उत्तराखंड के मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत जांच पूरी होने तक अपने पद से इस्तीफा दें. BJP से हमारी मांग है कि वो नैतिकता के आधार पर अपने मुख्यमंत्री का इस्तीफा लें या उन्हें बर्खास्त करें. आम आदमी पार्टी माननीय प्रधानमंत्री से भी पूछना चाहती है कि क्या वो अपनी ही पार्टी के मुख्यमंत्री के खिलाफ एक्शन लेंगे ? क्या वो उत्तराखंड के मुख्यमंत्री के खिलाफ कोई ठोस कदम उठाएंगे ?

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