दिल्ली : अरविंद केजरीवाल और आम आदमी पार्टी के लिए एक अच्छी ख़बर है। आम आदमी पार्टी को मिलने वाला चंदा इस साल तीन गुना से भी अधिक बढ़ गया है। यह ऐसे समय में हुआ है जब आम आदमी पार्टी को इस साल की शुरुआत में दिल्ली की सत्ता गंवाने के बाद बड़ा झटका लगा था। AAP ने जो जानकारी चुनाव आयोग को दी है, उसके मुताबिक़, वित्त वर्ष 2023-24 में जहां दान की राशि 11 करोड़ रुपये थी। वहीं 2024-25 में ये बढ़कर 38 करोड़ रुपये हो गई। गौर करने वाली बात है कि ये आंकड़े उन दानदाताओं के हैं जिन्होंने 20,000 रुपये से ज्यादा की रकम चंदे के तौर पर दी है। पार्टी के दानदाताओं की लिस्ट में कई पार्टी नेता भी शामिल हैं। आप के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने 12 बार 10,000 रुपये का दान किया। पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के योगदान में बार-बार यह संख्या दिखाई दी। पंजाब AAP अध्यक्ष और मंत्री अमन अरोड़ा ने भी 10,000 रुपये की राशि 12 बार दान की। वहीं दिल्ली की पूर्व मुख्यमंत्री आतिशी मार्लेना ने 3,500 रुपये का योगदान 12 मौकों पर किया।पंजाब के स्वास्थ्य मंत्री बलबीर सिंह और विधानसभा अध्यक्ष कुलतार सिंह संधवां ने भी 10,000 रुपये की राशि 12 बार दान की। शिक्षा मंत्री हरजोत सिंह बैंस ने कुल 62,000 रुपये का योगदान दिया जो 51,000 रुपये और 11,000 रुपये की दो किस्तों में दिया गया।
आपको बता दें कि आम आदमी पार्टी को 43 प्रतिशत से ज्यादा चंदा अकेले Prudent Electoral Trust से मिला है। इस ट्रस्ट ने AAP को 16 करोड़ रुपये दान किए। जिंदल स्टील एंड पावर, मेघा इंजीनियरिंग एंड इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड, भारती एयरटेल, ऑरबिंदो फार्मा और टोरेंट फार्मास्यूटिकल्स जैसी कॉरपोरेट कंपनियों द्वारा फंड किए जाने वाले इस ट्रस्ट ने उसी अवधि वित्त वर्ष 2024-25 में भारतीय जनता पार्टी को 2,180 करोड़ रुपये का दान दिया। प्रूडेंट के अलावा, आम आदमी पार्टी को चंदे का अधिकतर हिस्सा कंपनियों की तुलना में व्यक्तिगत दानदाताओं से मिला। शीर्ष 100 दानदाताओं में केवल चार संस्थाएं शामिल थीं जिनमें एक एनजीओ भी है। वहीं टॉप 300 दानदाताओं में सिर्फ आठ कंपनियां ही शामिल रहीं, जिससे पार्टी के फंडिंग प्रोफाइल में कॉरपोरेट योगदान की सीमित भूमिका स्पष्ट होती है। कुल मिलाकर, ‘आप’ को 17 कंपनियों ने 90 लाख रुपये का चंदा दिया। सबसे बड़ा संस्थागत दानदाता कर्नाटक का गैर-लाभकारी चैरिटेबल ट्रस्ट ‘भारथा स्वमुक्ति समस्थ’ रहा जिसने 30 लाख रुपये का योगदान दिया। अन्य दानदाताओं में दिल्ली स्थित कुबेर पॉलीप्लास्ट और एडवांस केमिकल्स शामिल हैं। इन्होंने आम आदमी पार्टी को क्रमशः 25 लाख रुपये और 11 लाख रुपये दान किए। इसके अलावा 25,000 रुपये से 6 लाख रुपये तक के छोटे-छोटे दान अलग-अलग कंपनियों से आए जिनमें एक फार्मा कंपनी, ऑटोमोबाइल डीलरशिप, चार्टर्ड अकाउंटेंट, डायग्नोस्टिक लैब, डिजाइन फर्म, सिक्योरिटी एजेंसी और एक टूर कंपनी शामिल हैं।व्यक्तिगत दानदाताओ की बात करें तो मुंबई के तालापडी उमाशंकर शेन ने क़रीब 38 लाख रुपये का ऑनलाइन भुगतान किया। प्रूडेंट इलेक्टोरल ट्रस्ट के बाद वह दूसरे सबसे बड़े दानदाता रहे। वहीं मैंगलोर के रहने वाले माइकल डी’सूजा 10 सबसे बड़े दानदाताओं में चौथे नंबर पर रहे। उन्होंने 30 लाख रुपये का योगदान दिया। चुनाव आयोग को सितंबर 2024 में दी गई AAP की जानकारी के अनुसार, पार्टी ने वित्त वर्ष 2023–24 में 11 करोड़ रुपये जुटाए थे। यह रकम पिछले कुछ सालों की तुलना में काफी कम थी, खासकर 2022 में पंजाब की सत्ता में आने के बाद के दौर की तुलना में, जब पार्टी ने अपने 10 सबसे बड़े दानदाताओं से इलेक्टोरल बॉन्ड्स के जरिए 52 करोड़ रुपये जुटाए थे।
आम आदमी पार्टी के चंदे में ये इज़ाफ़ा ऐसे समय में हुआ है जब आम आदमी पार्टी को इस साल की शुरुआत में दिल्ली की सत्ता गंवाने के बाद बड़ा झटका लगा था। ऐसे में तीन गुना ज़्यादा चंदा बढ़ना पार्टी के लिए एक राहत की बात है..इससे ये भी पता चलता है कि पार्टी की लोकप्रियता लोगों के बीच में अभी भी बरकरार है
