हरियाणा में अनुबंध पर काम कर रहे लाखों कर्मचारियों के लिए आखिरकार इंतजार खत्म हो गया है। प्रदेश सरकार ने 1.20 लाख अनुबंध कर्मचारियों की जॉब सिक्योरिटी को लेकर आज एक बड़ी पहल की है। जॉब सिक्योरिटी 2025 नियमों के तहत आवेदन और उनके निपटान की प्रक्रिया को पूरी तरह ऑनलाइन कर दिया गया है। इसके लिए www.securedemployee.csharyana.gov.in नाम से एक नया पोर्टल लॉन्च किया गया है, जिसकी शुरुआत मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने की।
इस पोर्टल का कर्मचारियों को करीब एक साल से इंतजार था। लंबे समय से अनुबंध कर्मचारी अपनी सेवा सुरक्षा को लेकर असमंजस की स्थिति में थे, लेकिन अब सरकार के इस फैसले से उन्हें राहत मिली है। सरकार का कहना है कि इस नई व्यवस्था से कर्मचारियों को पारदर्शी और समयबद्ध तरीके से जॉब सिक्योरिटी का लाभ मिल सकेगा।
दो दिन पहले ही मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी की ओर से इस संबंध में एक पत्र जारी किया गया था। पत्र में स्पष्ट किया गया था कि अनुबंध कर्मचारियों को जॉब सिक्योरिटी देने की प्रक्रिया में पारदर्शिता, सटीकता और एकरूपता बनाए रखने के लिए अब सभी मामलों का निपटान केवल ऑनलाइन माध्यम से ही किया जाएगा। किसी भी प्रकार के भौतिक आवेदन या ऑफलाइन आदेश स्वीकार नहीं किए जाएंगे और ऐसे आवेदन मान्य नहीं माने जाएंगे।
सरकार की ओर से तय समय-सीमा भी निर्धारित कर दी गई है। अनुबंध कर्मचारियों को पोर्टल पर पंजीकरण कर अपने सभी जरूरी दस्तावेज 31 जनवरी 2026 तक अपलोड करने होंगे। इसके बाद संबंधित आहरण एवं संवितरण अधिकारी (DDO) द्वारा कर्मचारियों के सेवा रिकॉर्ड का सत्यापन 28 फरवरी 2026 तक किया जाएगा। इसके पश्चात वित्त विभाग द्वारा पात्र कर्मचारियों के लिए सुपरन्यूमैरेर पोस्ट का सृजन 31 मार्च 2026 तक किया जाएगा।
मिली जानकारी के अनुसार, संबंधित विभागाध्यक्षों द्वारा अंतिम स्वीकृति और सेवा सुरक्षा से जुड़े प्रस्तावों के लेटर 30 अप्रैल 2026 तक जारी किए जाएंगे। सरकार ने सभी प्रशासनिक सचिवों, विभागाध्यक्षों, बोर्डों और निगमों के प्रबंध निदेशकों, मंडल आयुक्तों और उपायुक्तों को सख्त निर्देश दिए हैं कि निर्धारित समय-सीमा का कड़ाई से पालन किया जाए। किसी भी स्तर पर देरी या लापरवाही होने पर संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाएगी।
अनुबंध कर्मचारियों के लिए यह फैसला न केवल नौकरी की सुरक्षा देगा, बल्कि वर्षों से चली आ रही अनिश्चितता को भी खत्म करेगा। सरकार के इस कदम को कर्मचारियों के हित में एक बड़ा और ऐतिहासिक निर्णय माना जा रहा है।



