2025 में विदेशी निवेशकों की पसंद बना भारतीय बाजार
Business News Hindi (द भारत ख़बर), बिजनेस डेस्क : बदलती वैश्विक परिस्थितियों और कई माह तक टैरिफ के दबाव के बाजवूद भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए साल 2025 शानदार रहा। इस दौरान न केवल भारतीय अर्थव्यवस्था की विकास दर शानदार बनी रही। बल्कि विदेशी निवेशकों ने भारतीय बाजार में भारी निवेश भी किया। आंकड़ों की बात करें तो घरेलू बैंकिंग, वित्तीय सेवा और बीमा क्षेत्र यानी बीएफएसआई के लिए 2025 वैश्विक निवेश का केंद्र बना रहा। इस दौरान इस क्षेत्र में कुल 1.35 लाख करोड़ रुपये (15 अरब डॉलर) का निवेश आया है।
इसलिए विदेशी निवेशकों को पसंद आया यह सेक्टर
वैश्विक निवेश का यह कारक घरेलू संस्थानों की खाताबही की तैयारी थी। ऋणमुक्ति, पुनर्पूंजीकरण और सख्त विनियमन के बाद भारतीय बैंक और गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियां 2025 में बेहतर वित्तीय स्थिति और मजबूत पूंजी पर्याप्तता के साथ प्रवेश कर गईं। इससे वे विदेशी निवेशकों के लिए आकर्षक भागीदार बन गईं जो जोखिम भरे निवेश के बजाय पूवार्नुमानित वृद्धि की तलाश में थीं।
फेडरल बैंक में ब्लैकस्टोन, सम्मान कैपिटल में आईएचसी और आईडीएफसी फर्स्ट बैंक में वारबर्ग पिंकस और एडीआईए के निवेश ने मजबूत रिटेल फ्रेंचाइजी, प्रौद्योगिकी आधारित लंबे चक्रों में आय बढ़ाने की क्षमता वाले संस्थानों में निवेश कर विश्वास जताया। विदेशी बैंकों, बीमा कंपनियों, निजी इक्विटी फंडों के साथ सरकारी निवेशकों ने हिस्सेदारी खरीद, नियंत्रण सौदों और पूंजी निवेश के जरिये यह रकम लगाई।
इसलिए पिछले वर्षों से अलग रहा 2025
बैंकों, गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों और बीमा कंपनियों में सौदों की इस गति ने वैश्विक निवेशकों की नजर में भारत की वित्तीय प्रणाली के संरचनात्मक पुनर्मूल्यांकन को दर्शाया। 2025 को पिछले वर्षों से अलग करने वाली बात सीमा पार लेनदेन का विशाल आकार और उद्देश्य था। मित्सुबिशी यूएफजे वित्तीय समूह के श्रीराम फाइनेंस में 4.4 अरब डॉलर में 20 फीसदी हिस्सा हासिल करने के समझौते ने भारत के विविध ऋण मंचों विशेष रूप से खुदरा और लघु व्यवसायों में मजबूत उपस्थिति वाले मंचों में विदेशी विश्वास को रेखांकित किया। एमिरेट्स एनबीडी का आरबीएल में 60 फीसदी हिस्सा लेना भी उतना ही महत्वपूर्ण था, जो किसी विदेशी ऋणदाता द्वारा भारतीय निजी क्षेत्र के बैंक का परिचालन नियंत्रण लेने के दुर्लभ मामलों में से एक है।
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