दिल्ली की हवा में प्रदूषण गंभीर श्रेणी में बरकरार, अभी नहीं है राहत के आसार
Delhi Pollution News (द भारत ख़बर), नई दिल्ली : पिछले कई दिन से मौसम विभाग के पूर्वानुमान के चलते दिल्लीवासियों को उम्मीद थी कि शायद नए साल का आगाज कुछ स्वच्छ हवा के साथ हो। क्योंकि मौसम विभाग ने दिल्ली में एक जनवरी को हल्की से मध्यम बारिश की संभावना जताई थी। लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ और दिल्ली की हवा में प्रदूषण अभी भी गंभीर श्रेणी में बरकरार है।
हवा में कोहरे के साथ प्रदूषण की मोटी परत बन चुकी है। जिससे वातावरण पूरा दिन धुंधला बना रहता है। इसके साथ ही लोगों को आंख में जलन व सांस के मरीजों को परेशानी महसूस हो रही है। शुक्रवार सुबह राजधानी का वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 321 दर्ज किया गया है। यह हवा की बेहद खराब श्रेणी है। अलीपुर में एक्यूआई 292, आनंद विहार में एक्यूआई 348, अशोक विहार में 316, आया नगर में 235, बवाना में 227, बुराड़ी में 257, चांदनी चौक इलाके में 340 एक्यूआई दर्ज किया गया है।
एक सप्ताह तक रहेंगे यही हालात
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) का पूवार्नुमान है कि रविवार तक हवा बेहद खराब श्रेणी में बरकरार रहेगी। इसके चलते सांस के मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ेगा। साथ ही, लोगों को आंखों में जलन, खांसी, और सिर दर्द जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। पर्यावरण विशेषज्ञों के अनुसार, लगातार बनी हुई गंभीर वायु गुणवत्ता का मुख्य कारण मौसम का मिजाज है। तापमान में कमी के कारण प्रदूषण के स्तर में भारी वृद्धि हुई है और पश्चिमी विक्षोभ के चलते वायु गुणवत्ता जो नीचे फंसी हुई ठंडी हवा को ऊपर उठने नहीं देती है। इसी ठंडी हवा में गाड़ियों का धुआं और निर्माण की धूल जैसे प्रदूषक जमा हो जाते हैं।
प्रदूषण को लेकर सीएसई की रिपोर्ट में नए खुलासे
दिल्ली की खतरनाक वायु गुणवत्ता के लिए अब तक जिस पराली जलाने को सबसे बड़ा दोषी माना जाता रहा है, उस धारणा पर एक नई रिपोर्ट ने सवाल खड़े कर दिए हैं। सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरमेंट (सीएसई) की एक ताजा स्टडी के मुताबिक, पराली जलाने का दौर खत्म होने के बाद भी दिल्ली में पीएम 2.5 का स्तर कम नहीं हुआ, बल्कि दिसंबर महीने में यह और ज्यादा गंभीर हो गया। अध्ययन में अक्तूबर और नवंबर को “अर्ली विंटर” अवधि के रूप में देखा गया है, जब खेतों में आग का प्रभाव सबसे ज्यादा रहता है। इसके मुकाबले दिसंबर को “पोस्ट-फार्म फायर” चरण माना गया, जब पराली जलाने का असर लगभग नगण्य हो जाता है।
दिसंबर में ज्यादा गंभीर हुई स्थिति
रिपोर्ट के अनुसार, दिसंबर में पूरे एनसीआर में फैला स्मॉग न सिर्फ व्यापक था, बल्कि पराली जलाने वाले महीनों की तुलना में कहीं अधिक गंभीर रहा। रिपोर्ट यह भी बताती है कि दिल्ली की हवा में मौजूद पीएम 2.5 का पूरा बोझ सिर्फ राजधानी से नहीं आ रहा। 1 से 15 दिसंबर के बीच दिल्ली का योगदान कुल पीएम 2.5 में सिर्फ 35 प्रतिशत रहा, जबकि 65 प्रतिशत प्रदूषण आसपास के एनसीआर जिलों और उससे भी दूर के इलाकों से आया। यह आंकड़ा साफ करता है कि समस्या केवल स्थानीय नहीं, बल्कि क्षेत्रीय स्तर की है।
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