सरकारी आंकड़ों में हुआ स्पष्ट 4.18 ट्रिलियन डॉलर की जीडीपी के साथ भारत अब अगले 2.5 से 3 वर्षों में जर्मनी को पीछे छोड़कर तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की राह पर
Business News Hindi (द भारत ख़बर), बिजनेस डेस्क : साल 2025 बीत चुका है। यह बीता हुआ साल विश्व व्यापार और आर्थिक स्थिति के लिए बहुत ही ज्यादा घटनाक्रम के साथ बीता है। बीते साल विश्व व्यापार को जिस बात ने सबसे ज्यादा प्रभावित किया वह था अमेरिका द्वारा अपनी टैरिफ नीति में संशोधन करना। जैसे ही 2025 में डोनाल्ड ट्रंप ने दूसरी बार राष्टÑपति पद की शपथ ली तो उन्होंने तुरंत ही अमेरिकी टैरिफ नीति में बदलाव की घोषणा कर दी। इस नई टैरिफ नीति से विश्व के बहुत सारे देशों पर नकारात्मक प्रभाव पड़ा।
हालांकि अमेरिका ने भारत पर भी 50 प्रतिशत की उच्च टैरिफ लगा दिया लेकिन भारतीय अर्थव्यवस्था पर इसका ज्यादा प्रभाव नहीं पड़ा। सही समय पर केंद्र सरकार ने जीएसटी सुधार लागू कर दिए जिससे घरेलु उद्योग और बाजार में सुस्ती नहीं आई इसके साथ ही निर्यातकों के लिए भी विशेष राहत पैकेज की घोषणा कर दी। इसका परिणाम यह निकला की 2025-26 की दूसरी तिमाही में भारत की वास्तविक जीडीपी वृद्धि दर 8.2 प्रतिशत तक पहुंच गई, इस आंकड़े ने भारत को जापान से आगे निकालकर दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बना दिया। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, 4.18 ट्रिलियन डॉलर की जीडीपी के साथ भारत अब अगले 2.5 से 3 वर्षों में जर्मनी को पीछे छोड़कर तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की राह पर है। अनुमान है कि 2030 तक भारत की जीडीपी 7.3 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंच जाएगी।
आरबीआई ने बढ़ाया विकास का अनुमान
भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने वित्त वर्ष 2025-26 के लिए अपने विकास अनुमान को 6.8 प्रतिशत से बढ़ाकर 7.3 प्रतिशत कर दिया है। वर्ल्ड बैंक, आईएमएफ और मूडीज जैसी अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों ने भी इस सकारात्मक दृष्टिकोण की पुष्टि की है। भारत की विकास गाथा में वैश्विक कंपनियों का भरोसा बना हुआ है। माइक्रोसॉफ्ट (2030 तक 17.5 बिलियन डॉलर), अमेजन (अगले 5 वर्षों में 35 बिलियन डॉलर) और गूगल (15 बिलियन डॉलर) जैसे दिग्गजों ने बड़े निवेश की घोषणा की है। इसके अतिरिक्त, एप्पल, सैमसंग और आर्सेलर मित्तल निप्पॉन स्टील जैसी कंपनियां अपनी विस्तार योजनाओं को गति दे रही हैं।
रुपये की साख बचाना और अमेरिका से ट्रेड डील क्यों जरूरी?
विश्लेषकों का मानना है कि अमेरिका के साथ प्रस्तावित व्यापार समझौता निर्यात को बढ़ावा दे सकता है, लेकिन यह रुपये की गिरावट रोकने के लिए ‘रामबाण’ साबित नहीं होगा। अल्पकालिक अवधि में रुपया 92-93 के स्तर तक जा सकता है, लेकिन अप्रैल 2026 के बाद वैश्विक पूंजी के पुनर्गठन और डॉलर की संभावित कमजोरी से रुपया 83-84 के स्तर तक मजबूत हो सकता है।

