राजधानी दिल्ली में 2025 में एक दिन भी अच्छी श्रेणी में नहीं रही हवा की गुणवत्ता
Delhi Breaking News (द भारत ख़बर), नई दिल्ली : देश की राजधानी दिल्ली में प्रदूषण की समस्या लगातार गंभीर होती जा रही है। दिल्ली में प्रदूषण का स्तर इतना ज्यादा है कि पूरी दुनिया के सबसे ज्यादा प्रदूषित शहरों में यह शामिल है। इतना ही नहीं प्रदूषण के चलते कई देशों ने अपने नागरिकों को विशेष एडवाइजरी जारी करके दिल्ली में न जाने की हिदायत दी हुई है। इसी बीच दिल्ली में फैले प्रदूषण पर कई सारी टीमें अध्ययन कर रहीं हैं। इन्हीं टीमों में से एक है सेंटर फॉर रिसर्च आॅन एनर्जी एंड क्लीन एयर (सीआरईए) की जांच। सीआरईए द्वारा दिल्ली के वातावरण पर जो अध्ययन किया उसकी रिपोर्ट हाल ही में जारी की है। इस रिपोर्ट ने पर्यावरण विशेषज्ञों की चिंता बढ़ा दी है।
सीआरईए की रिपोर्ट में यह आया सामने
वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) के आंकड़ों के अनुसार, 2025 में दिल्ली का वार्षिक औसत एक्यूआई 201 रहा। यह चिंताजनक है कि पूरे साल एक भी दिन ऐसा नहीं रहा, जब हवा की गुणवत्ता अच्छी श्रेणी में रही हो। इस दौरान दिल्ली में 79 दिन संतोषजनक, 121 दिन मध्यम, 86 दिन खराब, 71 दिन बहुत खराब और आठ दिन गंभीर श्रेणी में दर्ज किए गए। 2024 की तुलना में, 2025 में संतोषजनक दिनों की संख्या थोड़ी बढ़ी (66 से 79), जबकि गंभीर श्रेणी के दिनों की संख्या कम हुई (17 से 8)। हालांकि, बहुत खराब दिनों की संख्या लगभग समान रही। रिपोर्ट में बताया गया कि 2025 में एक्यूआई में मामूली सुधार का मुख्य कारण जून और जुलाई के दौरान बेहतर वायु गुणवत्ता रही।
स्थानीय स्रोतों में वाहनों का सबसे बड़ा योगदान
रिपोर्ट में यह भी सामने आया है कि सर्दियों के दौरान स्थानीय पीएम 2.5 प्रदूषण के स्रोतों के आकलन से यह सामने आया कि वाहनों से होने वाले उत्सर्जन का योगदान लगभग आधा रहा। यह उद्योग, निर्माण कार्य और अन्य दहन स्रोतों से अधिक था। हालांकि, इन स्थानीय कारकों के बावजूद, कुल मिलाकर बाहरी, यानी ट्रांसबाउंड्री प्रदूषण ही दिल्ली की हवा को जहरीला बनाने में प्रमुख भूमिका निभाता रहा।
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