जरूरत पड़ने पर आरोपियों की संपत्तियां भी की जा सकती हैं अटैच
Sabarimala Gold Controversy, (द भारत ख़बर), नई दिल्ली: केरल के सबरीमाला मंदिर से जुड़े सोना गायब होने के मामले में राज्य की विशेष जांच टीम (एसआईटी) ने शुक्रवार को मुख्य पुजारी कंदरारु राजीवरु को गिरफ्तार किया। जांच एजेंसी का कहना है कि उनका मुख्य आरोपी उन्नीकृष्णन पोट्टी से करीबी संबंध था। जांच में सामने आया है कि भगवान अयप्पा मंदिर में द्वारपालक मूर्तियों और श्रीकोविल की सोने की प्लेटों की विवादित खरीद की सिफारिश में भी उनकी भूमिका थी।
इस मामले में यह 11वीं गिरफ्तारी है। इधर, प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने शुक्रवार को मनी लॉन्ड्रिंग का केस दर्ज किया। आधिकारिक सूत्रों के मुताबिक, ईडी की कोच्चि जोनल यूनिट ने इस मामले में पीएमएलए के तहत ईसीआईआर दर्ज की है। केरल हाईकोर्ट ने दिसंबर में एसआईटी की आपत्ति खारिज करते हुए ईडी को स्वतंत्र जांच की अनुमति दी थी। इस मामले में आरोप है कि मंदिर के गर्भगृह और द्वारपालक मूर्तियों पर लगी सोने की परत वाले तांबे के प्लेट्स से सोना निकाला गया और उसे हड़प लिया गया।
इस मामले की जांच के लिए बनी केरल सरकार की एसआईटी ने पाया कि देवस्वोम बोर्ड के अधिकारियों ने बिना सही अनुमति ये प्लेट्स बाहर दीं और इसमें कारोबारी व अन्य लोगों की मिलीभगत थी। इस केस की जांच में तेजी लाने के लिए 30 दिसंबर 2025 को हाईकोर्ट ने एसआईटी में दो सर्कल इंस्पेक्टर रैंक के अधिकारियों को शामिल करने के आदेश दिए हैं। अगली सुनवाई 14 जनवरी को होगी।
अब तक 11 आरोपियों की हो चुकी गिरफ्तारी
इस केस में मुख्य आरोपी मंदिर के पूर्व पुजारी नंबूदरी उन्नीकृष्णन पोट्टी, सोना व्यापारी डी मणि और त्रावणकोर देवस्वोम बोर्ड के पूर्व अध्यक्ष ए पद्मकुमार भी गिरफ्तार हो चुके हैं। इसके साथ ही 9 अन्य लोगों की गिरफ्तारी हुई है।
मंदिर से 500 करोड़ का सोना चोरी होने का दावा
एसआईटी का कहना है कि इसमें देवस्वोम अधिकारियों की गंभीर लापरवाही और अनधिकृत तरीके से प्लेट्स सौंपने के मामले सामने आए हैं। एसआईटी ने हाईकोर्ट को बताया है कि यह एक संगठित साजिश थी, जिसमें मंदिर की अन्य सोने से मढ़ी वस्तुओं को भी हटाकर सोना निकालने की योजना थी। ईडी अब यह जांच करेगी कि क्या इस प्रक्रिया से अपराध की आय बनी है और जरूरत पड़ने पर आरोपियों की संपत्तियां भी अटैच की जा सकती हैं।
इससे पहले गोल्ड स्कैम मामले में एसआईटी को अहम जानकारी देने वाले कांग्रेस नेता रमेश चेन्निथला ने दावा करते हुए कहा था कि मंदिर के सोने की चोरी में टीडीबी बोर्ड के पुराने अधिकारियों की मिलीभगत से इनकार नहीं किया जा सकता। मेरा अनुमान है कि गायब संपत्तियों की कीमत लगभग 500 करोड़ हो सकती है।
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