निति आयोग की Export Preparedness Index (EPI) 2024 में हरियाणा को बड़ा झटका लगा है। राज्य इस बार पांच स्थान फिसलकर 10वें पायदान पर पहुंच गया है, जबकि वर्ष 2022 की रैंकिंग में हरियाणा पांचवें स्थान पर था। रिपोर्ट के अनुसार राज्य का कुल स्कोर भी 63.55 से घटकर 55.01 रह गया है, जो निर्यात क्षेत्र में बढ़ती चुनौतियों की ओर इशारा करता है।
निति आयोग की यह रिपोर्ट 14 जनवरी को जारी की गई, जिसमें देश के सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की निर्यात तैयारियों का आकलन किया गया है। इस सूचकांक में चार प्रमुख स्तंभों — एक्सपोर्ट इंफ्रास्ट्रक्चर, बिजनेस इकोसिस्टम, पॉलिसी एंड गवर्नेंस और एक्सपोर्ट परफॉर्मेंस — के आधार पर मूल्यांकन किया गया, जिन्हें आगे 13 उप-स्तंभों और 70 विभिन्न मानकों के जरिए परखा गया।
वित्त वर्ष 2023-24 में हरियाणा के प्रमुख निर्यात उत्पादों में चावल सबसे आगे रहा, जिसका निर्यात लगभग 26,937 करोड़ रुपये रहा। इसके बाद मोटर वाहन पुर्जों का निर्यात 7,155 करोड़ रुपये, मोटर कारों का 6,000 करोड़ रुपये और मोटरसाइकिल व साइकिल का निर्यात 3,824 करोड़ रुपये दर्ज किया गया। ज्वेलरी आइटम्स, महिलाओं के बुने हुए परिधान, टर्बोजेट और टर्बोप्रोपेलर तथा कालीन भी राज्य के प्रमुख निर्यात उत्पादों में शामिल रहे।
हालांकि कुल मिलाकर हरियाणा ने FY24 में करीब 1.5 लाख करोड़ रुपये का मर्चेंडाइज एक्सपोर्ट किया, जिससे वह देश का सातवां सबसे बड़ा निर्यातक राज्य बना रहा, लेकिन रिपोर्ट में कई कमजोरियों की ओर भी इशारा किया गया है।
‘एक्सपोर्ट इंफ्रास्ट्रक्चर’ के मामले में निति आयोग ने हरियाणा के प्रदर्शन को कमजोर बताया है। रिपोर्ट के अनुसार राज्य में नवीकरणीय ऊर्जा का सीमित उपयोग और कोल्ड चेन इंफ्रास्ट्रक्चर की कमी है, जिससे समय पर डिलीवरी प्रभावित होती है, लॉजिस्टिक्स लागत बढ़ती है और निर्यात प्रतिस्पर्धा कमजोर पड़ती है।
‘बिजनेस इकोसिस्टम’ के तहत रिपोर्ट में कहा गया है कि हरियाणा कुछ चुनिंदा सेक्टरों पर अत्यधिक निर्भर है। सब्सिडी के चलते राज्य पर वित्तीय दबाव बढ़ रहा है, वहीं वैश्विक बाजारों में सीमित विविधता, स्किल गैप और छोटे उद्योगों में तकनीक को अपनाने की कमी भी निर्यात वृद्धि में बाधा बन रही है।
‘पॉलिसी और गवर्नेंस’ के मोर्चे पर हरियाणा का प्रदर्शन अपेक्षाकृत बेहतर रहा, लेकिन निति आयोग ने यह भी बताया कि राज्य के पास अब तक कोई स्पष्ट एक्सपोर्ट-स्पेसिफिक नीति नहीं है। इसके अलावा नियमित ट्रेड फेयर और अंतरराष्ट्रीय प्रदर्शनियों की कमी के कारण निर्यातकों को नए अवसर नहीं मिल पा रहे हैं।
‘एक्सपोर्ट परफॉर्मेंस’ में भी हरियाणा पिछड़ा नजर आया। रिपोर्ट में डिजिटल प्लेटफॉर्म के सीमित उपयोग और लास्ट-माइल एक्सपोर्ट फैसिलिटेशन की कमी को इसकी प्रमुख वजह बताया गया है।
रिपोर्ट में हरियाणा के निर्यात ढांचे में क्षेत्रीय असंतुलन को भी एक बड़ी कमजोरी बताया गया है। गुरुग्राम, करनाल और फरीदाबाद मिलकर राज्य के कुल निर्यात का करीब 64 प्रतिशत हिस्सा देते हैं, जबकि उत्तरी और पश्चिमी हरियाणा के कई जिले औद्योगिक रूप से अब भी पिछड़े हुए हैं, जिससे असमान आर्थिक विकास और रोजगार वितरण की स्थिति बनी हुई है।
इसके अलावा, हरियाणा का एक्सपोर्ट-टू-GSDP अनुपात FY24 में करीब 13 प्रतिशत ही रहा, जो गुजरात और महाराष्ट्र जैसे राज्यों की तुलना में काफी कम है। निति आयोग के अनुसार, राज्य का निर्यात पोर्टफोलियो अभी भी हाई-टेक और इनोवेशन-ड्रिवन सेक्टरों में विविधता की कमी से जूझ रहा है और बड़ी मात्रा में उत्पादन घरेलू बाजार तक ही सीमित है।
रिपोर्ट में पर्यावरणीय जोखिमों को भी हरियाणा के निर्यात के लिए बढ़ता खतरा बताया गया है। गुरुग्राम, फरीदाबाद और पानीपत जैसे औद्योगिक क्षेत्रों में गंभीर वायु प्रदूषण के चलते GRAP के तहत लगने वाले प्रतिबंध उत्पादन को प्रभावित करते हैं, जिससे MSME सेक्टर पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है और लागत बढ़ती है। इसके साथ ही भूजल का अत्यधिक दोहन और बढ़ता जल संकट भी लंबे समय में मैन्युफैक्चरिंग गतिविधियों के लिए गंभीर चुनौती बन सकता है।
निति आयोग ने यह भी चेताया कि हरियाणा की अमेरिका, यूएई और यूरोप जैसे सीमित निर्यात बाजारों पर अत्यधिक निर्भरता, वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव या व्यापार नीतियों में बदलाव की स्थिति में राज्य की अर्थव्यवस्था को झटका दे सकती है।


