
शिविर के गेट पर लगाया, 24 घंटे में जवाब देने को कहा
Avimukteshwaranand Protest Update, (द भारत ख़बर), प्रयागराज: प्रयागराज में धरने पर बैठे शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद को माघ मेला प्रशासन ने नोटिस जारी किया था। मेला प्राधिकरण ने उन्हें 24 घंटे में यह साबित करने को कहा है कि वे ही असली शंकराचार्य हैं। सोमवार रात 12 बजे कानूनगो अनिल कुमार माघ मेला में शंकराचार्य के शिविर पहुंचे। उन्होंने शंकराचार्य के शिष्यों से नोटिस लेने के लिए कहा। शिष्यों ने नोटिस लेने से मना कर दिया। कहा- इतनी रात में कोई नहीं हैं।
सुबह आइएगा। कानूनगो अनिल कुमार मंगलवार सुबह फिर शंकराचार्य शिविर पहुंचे। वहां गेट पर नोटिस चस्पा कर दिया। नोटिस मेला प्राधिकरण के उपाध्यक्ष की ओर से जारी किया गया है। दरअसल, ज्योतिषपीठ में शंकराचार्य की पदवी को लेकर अविमुक्तेश्वरानंद और वासुदेवानंद के बीच विवाद है। मामला कोर्ट में विचाराधीन है।
सुप्रीम कोर्ट के कंधे पर बंदूक मत रखो
वहीं प्रयागराज रथ रोकने को लेकर शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने माघ मेला प्रशासन पर पलटवार किया है। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के कंधे पर बंदूक रखकर जो गलती प्रशासन से हुई है, उसको ये लोग पीछे करना चाह रहे। सुप्रीम कोर्ट का गलत हवाला देकर ये लोग कब तक बच पाएंगे? खुद सरकार ने महाकुंभ में सरकार ने एक पत्रिका छापी थी, उसमें मुझे शंकराचार्य के रूप में छपा गया था।
सुप्रीम कोर्ट में चल रहा केस
आपको बता दें कि ज्योतिषपीठ में शंकराचार्य पद का मामला अभी सुप्रीम कोर्ट में चल रहा है। कोर्ट ने 14 अक्टूबर, 2022 को आदेश दिया था कि जब तक इस केस का अंतिम फैसला नहीं हो जाता, तब तक किसी को भी शंकराचार्य घोषित नहीं किया जा सकता, न ही किसी का पट्टाभिषेक किया जा सकता है।
अविमुक्तेश्वरानंद बोले- मैं हूं ज्योतिषपीठ का शंकराचार्य
इससे पहले, सोमवार को प्रेस कांफ्रेंस के दौरान शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा- शंकराचार्य वो होता है जिसे बाकी 3 पीठ शंकराचार्य कहते हैं। 2 पीठ हमें शंकराचार्य कहते हैं। पिछले माघ मेले में हमको साथ लेकर स्नान कर चुके हैं। अब आपको किस प्रमाण की जरूरत हैं। क्या ये प्रशासन तय करेगा कि हम शंकराचार्य हैं या नहीं। भारत के राष्ट्रपति को भी अधिकार नहीं है कि वो तय करे कि कौन शंकराचार्य होगा।
शंकराचार्य का निर्णय शंकराचार्य करेगा। पुरी के शंकराचार्य ने हमारे बारे में कुछ नहीं कहा। वो साइलेंट हैं। हम निर्विवाद रूप से ज्योतिषपीठ के शंकराचार्य हैं। अगर कोई कहता है कि मैं ज्योतिषपीठ का शंकराचार्य हूं तो आकर बात करे। इधर, शंकराचार्य अड़े हैं कि जब तक प्रशासन माफी नहीं मांगेगा, तब तक वे आश्रम में प्रवेश नहीं करेंगे। उन्होंने कल प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा था- हर मेले में प्रयागराज आऊंगा, लेकिन शिविर में नहीं, फुटपाथ पर रहूंगा।
मौनी अमावस्या पर हुआ था अविमुक्तेश्वरानंद का पुलिस से विवाद
मौनी अमावस्या यानी 18 फरवरी को शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद पालकी में बैठकर शिष्यों के साथ संगम स्नान के लिए जा रहे थे। पुलिस ने उन्हें रोक दिया। पैदल संगम के लिए जाने को कहा। लेकिन शिष्य नहीं माने और पालकी आगे बढ़ाने लगे। इस दौरान शिष्यों और पुलिस के बीच धक्का-मुक्की हुई। हाथापाई हुई। पुलिस ने कई शिष्यों को हिरासत में ले लिया।
नाराज शंकराचार्य धरने पर बैठ गए और शिष्यों को छुड़ाने की मांग करने लगे। अफसरों ने समझाने की कोशिश की, लेकिन वे नहीं माने। करीब दो घंटे तक तनाव की स्थिति बनी रही। इसके बाद पुलिस ने शंकराचार्य की पालकी को खींचकर संगम से करीब 1 किमी दूर ले जाया गया।
शंकराचार्य बोले- स्नान के लिए बिना अन्न-जल ग्रहण किए निकला था
शंकराचार्य ने यह भी बताया कि उन्होंने मौनी अमावस्या की रात 1 बजे से अन्न-जल ग्रहण नहीं किया था। क्योंकि उसी दिन स्नान के लिए जाना था। सुबह स्नान के लिए बिना अन्न-जल ग्रहण किए ही निकला था। मुझे स्नान नहीं करने दिया गया और वापस लाकर छोड़ दिया गया। मुझे लगा कि अधिकारी शायद अपनी गलती मान जाएंगे और उन्हें ससम्मान गंगा स्नान कराने ले जाएंगे। इस वजह से मैंने रात तक अन्न-जल ग्रहण नहीं किया था।
