साल 2025 में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश बढ़कर 47 बिलियन डॉलर पहुंचा, संयुक्त राष्टÑ की ताजा रिपोर्ट में आंकड़े आए सामने
Business News (द भारत ख़बर), बिजनेस डेस्क : एक तरफ जहां वर्ष 2025 का ज्यादात्तर समय वैश्विक उथल-पुथल और अमेरिकी टैरिफ के साये में गुजरा वहीं भारतीय अर्थव्यवस्था में शानदार सुधार देखने को मिला। इस अवधि के दौरान देश में जहां आर्थिक सुधार देखने को मिले वहीं विदेशी निवेशकों का विश्वास भी भारतीय अर्थव्यवस्था पर लगातार बना रहा। यही कारण है की बीते वर्ष भारतीय बाजार में रिकॉर्ड स्तर पर विदेशी निवेश आया।
इस बात का प्रमाण संयुक्त राष्ट्र की एक ताजा रिपोर्ट से मिलता है। इसके अनुसार, 2025 में भारत में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश यानी एफडीआई के प्रवाह में 73 प्रतिशत की भारी वृद्धि हुई है। यह उछाल ऐसे समय में आया है जब पड़ोसी देश चीन में लगातार तीसरे वर्ष विदेशी निवेश कम हुआ है।
भारत में इतना प्रत्यक्ष विदेशी निवेश आया
‘ग्लोबल इन्वेस्टमेंट ट्रेंड्स मॉनिटर’ के आंकड़ों के मुताबिक, भारत में एफडीआई प्रवाह बढ़कर 47 बिलियन डॉलर (लगभग 3,900 करोड़ रुपए) हो गया है। संयुक्त राष्ट्र व्यापार और विकास सम्मेलन (यूएनसीटीएडी) ने अपनी रिपोर्ट में बताया है कि इस वृद्धि का मुख्य कारण भारत के सेवा क्षेत्र और विनिर्माण क्षेत्र के निवेश में आया बड़ा उछाल है।
विदेशी मुद्रा भंडार 700 बिलियन डॉलर पार
वैश्विक उठापटक के बीच भारतीय अर्थव्यवस्था का लगातार मजबूत बना रहना एक बड़ी प्राप्ति है। स्विटरलैंड के दावोस में डब्ल्यूईएफ की सालाना बैठक में जहां भारत की अर्थव्यवस्था पर दुनिया भर ने उम्मीद जताई है। वहीं देश के मुद्रा भंडार ने भी 700 बिलियन डॉलर का मनोवैज्ञानिक स्तर पार कर लिया है। आरबीआई द्वारा जारी आंकड़ों की बात करें तो यह स्पष्ट होता है कि 16 जनवरी को समाप्त सप्ताह में विदेशी मुद्रा भंडार में 14.167 बिलियन डॉलर की भारी छलांग दर्ज की गई, जिससे कुल भंडार बढ़कर 701.36 बिलियन डॉलर हो गया है।
यह उछाल विशेष रूप से महत्वपूर्ण है क्योंकि यह वैश्विक अनिश्चितता और मुद्रा बाजार में चल रही उथल-पुथल के बीच आया है। इससे ठीक पिछले सप्ताह में, समग्र भंडार में 392 मिलियन डॉलर की मामूली वृद्धि हुई थी, जिससे कुल आंकड़ा 687.193 बिलियन डॉलर रहा था।
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