दोनों पक्षों को जल्द इसके अच्छे परिणाम की उम्मीद
India-US Trade Deal (द भारत ख़बर), बिजनेस डेस्क : बदलते वैश्विक परिवेश के बीच भारत लगातार अपनी व्यापारिक धारणा और योजना बदल रहा है। अब यह आयात और निर्यात को लेकर किसी एक देश पर निर्भर नहीं रहना चाहता। यही कारण है कि जहां गत दिवस भारत ने यूरोपीय संघ के साथ एक बड़ी डील साइन की है जिससे यूरोप के 27 देशों के साथ व्यापार आसान होगा वहीं वर्तमान में 12 से अधिक देशों के साथ वार्ता अंतिम दौर पर है। इस साल इन सभी देशों के साथ भी व्यापारिक समझौते होने की उम्मीद है।
वहीं आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि भारत और अमेरिका ने व्यापार समझौते के लिए अपनी बातचीत में बहुत महत्वपूर्ण प्रगति की है, और नई दिल्ली यूरोपीय संघ के साथ अपने मुक्त व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने के अंतिम चरण में भी सकारात्मक परिणाम के लिए वाशिंगटन के साथ बातचीत में स्थिर गति बनाए हुए है। उन्होंने कहा कि यूरोपीय संघ के साथ भारत के मेगा व्यापार समझौते को अमेरिका के साथ व्यापार संबंधों की वर्तमान स्थिति की भरपाई के लिए एक प्रतिक्रिया के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए, क्योंकि अमेरिकी बाजार भारतीय निर्यातकों के लिए समान रूप से महत्वपूर्ण है।
दोनों देश समझौते के बहुत करीब
सूत्रों के अनुसार, अमेरिका के साथ प्रस्तावित व्यापार समझौते के लिए बातचीत में काफी महत्वपूर्ण प्रगति हुई है और दोनों पक्ष इसे साकार होते देखने के ‘बहुत करीब’ हैं। सूत्रों के अनुसार, दोनों पक्ष संपर्क में हैं और यूरोपीय संघ के व्यापार समझौते पर बातचीत के अंतिम चरण के दौरान भी, भारतीय व्यापार वातार्कार अपने अमेरिकी समकक्षों के साथ संपर्क में थे। एक सूत्र ने कहा, “वह काम जारी है। हमें सकारात्मक परिणाम की उम्मीद है।”
सूत्रों ने कहा कि अमेरिका के साथ व्यापार समझौते को लेकर बातचीत लगातार जारी है और दोनों पक्ष संपर्क में हैं। इस बीच यह भी जानकारी मिली है कि विदेश मंत्री एस जयशंकर अगले सप्ताह वॉशिंगटन की यात्रा पर जा रहे हैं। वह वहां महत्वपूर्ण खनिजों पर होने वाली बैठक में हिस्सा लेंगे। बैठक की मेजबानी अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो करेंगे। अमेरिकी विदेश विभाग ने बताया है कि इस बैठक में दुनिया भर के साझेदार देश शामिल होंगे और इसका उद्देश्य अहम खनिजों की आपूर्ति शृंखला को सुरक्षित, मजबूत और भरोसेमंद बनाना है। अमेरिका के अनुसार, ये खनिज उसकी आर्थिक और राष्ट्रीय सुरक्षा, तकनीकी नेतृत्व और ऊर्जा परिवर्तन के लिए बेहद जरूरी हैं।
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