महासचिव ने सदस्य देशों से की फंड जारी करने की अपील
UN Financial Crisis (द भारत ख़बर), नई दिल्ली : विश्व शांति, मानवी सहायता और विकस कार्यों में सहायता के लिए बनाई गई विश्व की सबसे बड़ी संस्था संयुक्त राष्ट्र (यूएन) के भविष्य पर संकट के बादल मंडराने लगे हैं। दरअसल पिछले कुछ समय से यूएन को मिलने वाली वित्तीय मदद में काफी ज्यादा गिरावट आई है। जिसके चलते यूएन के कार्य तो बुरी तरह से प्रभावित हुए ही हैं इसके साथ ही यह संस्था बुरी तरह से वित्तीय संकट में फंस चुकी है।
इसी बीच यूएन महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने सभी सदस्य देशों को चेतानवनी देने के साथ ही फंड रिलीज करने की अपील भी की है। गुटेरेस ने कहा कि अगर सभी सदस्य देश अपने बजट का भुगतान समय पर नहीं करेंगे तो संयुक्त राष्ट्र वित्तीय संकट का सामना कर सकता है। उन्होंने कहा कि अमेरिका समेत कई बड़े देशों के बकाया ने नकदी को खत्म कर दिया है और संगठन का 2026 का तीन अरब पैंतालीस करोड़ डॉलर का बजट खतरे में है। उन्होंने चेतावनी दी है कि यह संकट शांति स्थापना, मानवीय सहायता और विकास कार्यक्रमों को सीधे प्रभावित कर सकता है।
ट्रंप ने यूएन की मौजूदगी पर उठाए थे सवाल
ज्ञात रहे कि अमेरिका का दूसरी बार राष्टÑपति बनने के बाद डोनाल्ड ट्रंप ने संयुक्त राष्टÑ (यूएन) की मौजूदगी पर लगातार सवाल उठाए थे। पिछले दिनों ट्रंप ने कहा था कि उन्होंने टैरिफ के दम पर विश्व के आठ भयानक युद्ध रुकवाए जबकि यह कार्य यूएन का था। इसके साथ ही उन्होंने कहा था कि यदि अमेरिका विश्व के युद्ध रुकवा रहा है तो असली यूएन अमेरिका ही है। इसके साथ ही उन्होंने यूएन को दी जाने वाली ग्रांट रोकने का भी ऐलान किया था।
अमेरिका पर इतना बकाया लंबित
यूएन महासचिव ने जो जानकारी दी है उसके अनुसार यूएन का परंपरागत रूप से सबसे बड़ा योगदानकर्ता अमेरिका है, लेकिन उसने अभी तक अपनी अनिवार्य सदस्यता राशि का भुगतान नहीं किया है। अमेरिका लगभग 1,82,268 करोड़ रुपये नियमित बजट के लिए बकाया है। इसके अलावा इस वर्ष इसके ऊपर 6,366 करोड़ रुपये और बकाया रहेगा। इतना ही नहीं अमेरिका शांति स्थापना बजट के लिए भी लगभग 14,940 करोड़ रुपये का बकाया रखता है और यह राशि बढ़ सकती है।
गुटेरेस ने बकाए बजट के बारे में ये कहा
यूएन महासचिव ने आगे कहा कि 2025 के अंत तक रिकॉर्ड 13,500 करोड़ रुपये से अधिक का बजट बकाया रह गया है। उन्होंने कहा कि यह पिछले साल की तुलना में दोगुना है। बता दें कि इस सूची में अमेरिका के बाद वेनेजुएला दूसरे नंबर पर है, जो लगभग 315.4 करोड़ रुपये का बकाया रखता है। आर्थिक कठिनाइयों के कारण उसने दो साल से भुगतान नहीं किया है और उसने जनरल असेंबली में मतदान का अधिकार खो दिया है। गुटेरेस ने बताया कि बकाया बढ़ने के कारण संयुक्त राष्ट्र के नकद रिजर्व लगभग खत्म हो गए हैं, जिससे संगठन के लिए काम करना मुश्किल हो गया है।
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