संसद में स्थिति हंगामेदार रहने की उम्मीद, भारत-अमेरिका व्यापार समझाते पर सरकार को घेरने की तैयारी में विपक्ष
Budget Session Live Today (द भारत ख़बर), नई दिल्ली : 28 जनवरी से शुरू हुआ संसद का बजट सत्र अपने पहले चरण के अंतिम सप्ताह का आज आगाज करेगा। संसद के दोनों सदनों में अभी तक ज्यादात्तर समय गतिरोध की स्थिति रही है और ऐसा पहली बार हुआ है कि प्रधानमंत्री द्वारा राष्टÑपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव भी नहीं लाया जा सका।
बीते सप्ताह भी संसद की ज्यादात्तर कार्यवाही हंगामे की भेंट चढ़ गई। आज भी संसद में हंगामा होने के पूरे आसार हैं। आज जबकि पहले चरण का अंतिम सप्ताह शुरू हो रहा है तो सरकार की कोशिश आने वाले पांच दिन की कार्यवाही में लंबित कामकाज निपटाने की रहेगी, जबकि विपक्ष सरकार को घेरने की तैयारियों में जुटा है।
भारत-अमेरिका व्यापार समझौते पर विपक्ष हमलावर
विपक्ष भारत और अमेरिका के बीच होने जा रहे द्विपक्षीय व्यापार समझौते पर चर्चा और जवाब चाहता है। टकराव की स्थिति में बार-बार स्थगन की नौबत आ सकती है। राजनीतिक जानकार मान रहे हैं कि अगर सहमति नहीं बनी तो पूरा सप्ताह हंगामे की भेंट चढ़ सकता है। समझौते के प्रावधान सार्वजनिक होने के बाद विपक्षी दलों ने कृषि और ऊर्जा हितों को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं।
इससे शेष कार्य दिवस की कार्यवाही प्रभावित होने की आशंका है। आज से शुरू हो रहे सप्ताह में कांग्रेस, सपा, डीएमके और टीएमसी समेत कई विपक्षी दल इस मुद्दे पर कार्यस्थगन प्रस्ताव लाने की तैयारी में हैं। विपक्ष का आरोप है कि समझौते में कृषि क्षेत्र की अनदेखी की गई है और कुछ शर्तें देश के हित के खिलाफ हैं। पहले संकेत थे कि विपक्ष आम बजट पर चर्चा में भाग लेगा, लेकिन समझौते का स्वरूप सामने आने के बाद रुख सख्त हो गया है।
पहले भी हंगामे में बीता सत्र
बजट सत्र का पहला चरण पहले ही लगातार हंगामे की भेंट चढ़ चुका है। इसकी शुरूआत नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी द्वारा पूर्व सेना प्रमुख एमएम नरवणे से जुड़ी अप्रकाशित सामग्री पढ़े जाने के विवाद से हुई थी। इस मामले में जोरदार विरोध के बाद कांग्रेस के आठ सांसदों को पूरे सत्र के लिए निलंबित किया गया। इसके बाद कई दिनों तक सदन की कार्यवाही बार-बार स्थगित करनी पड़ी। शुक्रवार को हुए हंगामे के बाद संकेत मिले थे कि विपक्ष अप्रकाशित किताब विवाद को पीछे छोड़कर बजट पर चर्चा करेगा। कांग्रेस और अन्य दलों ने रणनीति बदली थी ताकि आर्थिक मुद्दों पर सरकार को घेरा जा सके।
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