किसानों, मछुआरों और डेयरी क्षेत्र को इस समझौते में सुरक्षित रखा गया
India-US Trade Deal (द भारत ख़बर), बिजनेस डेस्क : भारत और अमेरिका में द्विपक्षीय व्यापार समझौते पर आपसी सहमति बन चुकी है। इसकी घोषणा पिछले दिनों सबसे पहले अमेरिकी राष्टÑपति डोनाल्ड ट्रंप ने की थी। इसके बाद भारत की तरफ से पीएम, वित्त मंत्री और उद्योग मंत्री का यह बयान सामने आया कि दोनों देश जल्द ही समझौते पर हस्ताक्षर करेंगे।
इस द्विपक्षीय व्यापार समझौते को लेकर भारत के वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल ने बताया कि भारत ने व्यापार समझौतों में संवेदनशील क्षेत्रों की हमेशा रक्षा की है और अमेरिका के साथ अंतरिम व्यापार समझौते में भी किसानों, मछुआरों और डेयरी जैसे प्रमुख क्षेत्रों को सुरक्षित रखा गया है। उन्होंने बताया कि भारत सभी व्यापार समझौतों में स्पष्ट दृष्टिकोण के साथ बातचीत करता है। जिन क्षेत्रों को देश के लिए अत्यंत संवेदनशील माना जाता है, उन्हें बाजार पहुंच देने के मामले में भारत ने अपने साझेदार देशों को साफ संकेत दिया है कि ऐसे सेक्टर पूरी तरह नहीं खोले जा सकते।
घरेलू बाजार में अमेरिका की पहुंच रहेगी सीमित
अग्रवाल ने कहा कि पिछले एक वर्ष में हुए पांच व्यापार समझौतों में सभी संवेदनशील क्षेत्रों को संरक्षित रखा गया है। अमेरिका के साथ हुए अंतरिम समझौते में भी प्रमुख संवेदनशील क्षेत्रों की सुरक्षा सुनिश्चित की गई है। जहां कुछ हद तक संवेदनशीलता थी, वहां टैरिफ रेट कोटा जैसे तंत्र का इस्तेमाल किया गया, ताकि बाजार पहुंच सीमित रहे और घरेलू किसानों पर नकारात्मक प्रभाव न पड़े। उन्होंने यह भी बताया कि दोनों पक्ष संयुक्त बयान को कानूनी समझौते का रूप देने के लिए तेजी से काम कर रहे हैं। उम्मीद है कि इसे मार्च के अंत तक अंतिम रूप देकर हस्ताक्षर कर दिए जाएंगे।
कपड़ा उद्योग को मिलेगा विशाल बाजार
अमेरिका के साथ व्यापार समझौता होने पर भारत के जिस उद्योग क्षेत्र को सबसे ज्यादा फायदा होगा वह है भारत का कपड़ा उद्योग। इस समझौते के बाद अमेरिका का 118 अरब डॉलर का आयात बाजार भारतीय कपड़ा और परिधान क्षेत्र के लिए ज्यादा सुलभ हो जाएगा। सरकार ने इसे निर्यात, निवेश और रोजगार बढ़ाने की दिशा में अहम कदम बताया है। अमेरिका पहले से ही भारत के वस्त्र निर्यात का सबसे बड़ा बाजार माना जाता है। वस्त्र मंत्रालय के मुताबिक इस समझौते से भारतीय वस्त्र और परिधान उत्पादों पर लगने वाला 18 प्रतिशत जवाबी शुल्क घटेगा। इससे भारतीय निर्यातकों को कीमत के मामले में सीधा फायदा मिलेगा।
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