सप्ताह के चौथे कारोबारी दिन फिर से भारी पड़ी बिकवाली
Share Market Update (द भारत ख़बर), बिजनेस डेस्क : दो दिन की तेजी फिर स्पाट बंद और फिर लाल निशान पर कारोबार। इस बार सप्ताह के चार दिन इसी तरह से रही है भारतीय शेयर बाजार की कहानी। सोमवार और मंगलवार को जहां यह हरे निशान पर बंद हुआ वहीं बुधवार को स्पाट बंद होने के बाद गुरुवार को बिकवाली भारी पड़ी और शेयर बाजार पूरा दिन लाल निशान पर काम करता दिखा। बाद में यह इसी लाल निशान पर बंद हुआ। आज सप्ताह का अंतिम कारोबारी दिन है और यह देखना होगा की शेयर बाजार की चाल किस तरह की रहती है।
इस तरह रहा शेयर बाजार का हाल
30 शेयरों वाला बीएसई सेंसेक्स 558.72 अंक या 0.66 प्रतिशत गिरकर 83,674.92 पर बंद हुआ। दिन के दौरान इसमें 716.97 अंक या 0.85 प्रतिशत की गिरावट आई और यह 83,516.67 के अंतदेर्शीय निचले स्तर पर पहुंच गया। 50 शेयरों वाला एनएसई निफ्टी 146.65 अंक या 0.57 प्रतिशत गिरकर 25,807.20 पर बंद हुआ।
सेंसेक्स में गिरावट का नेतृत्व टेक्नोलॉजी शेयरों ने किया, जिसमें टेक महिंद्रा, इंफोसिस और टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (टीसीएस) के शेयर लगभग 6 प्रतिशत गिरकर प्रमुख रूप से पिछड़ गए। एचसीएल टेक्नोलॉजीज, महिंद्रा एंड महिंद्रा, हिंदुस्तान यूनिलीवर, रिलायंस इंडस्ट्रीज, एटर्नल, एचडीएफसी बैंक, इंडिगो, कोटक महिंद्रा बैंक और अदानी पोर्ट्स के शेयर भी घाटे में बंद हुए।
सोने में मामूली गिरावट, चांदी स्थिर
सोने और चांदी की कीमतों में अस्थिरता का दौर लगातार बना हुआ है। एक तरफ जहां बुधवार को इन दोनों कीमती धातुओं में तेजी देखी गई वहीं गुरुवार को एक तरफ जहां सोने में हल्की गिरावट दर्ज की गई वहीं चांदी अपने पिछले यानी बुधवार के स्तर पर ही बंद हुई । वहीं बाजार के जानकारों का कहना है कि दोनों की कीमतों में आने वाले दिनों में भी अस्थिरता दिखाई देगी। यह सिलसिला कुछ समय ऐसे ही चलेगा हालांकि दीर्घ काल तक इनकी कीमतों में तेजी आने की पूरी संभावना है।
इस तरह रहा सोने और चांदी का रेट
गुरुवार को राजधानी दिल्ली में 99.9 प्रतिशत शुद्धता वाले सोने का भाव 400 रुपये गिरकर 1,60,900 रुपये प्रति 10 ग्राम पर आ गया। इससे पहले बुधवार को यह 1,61,300 रुपये पर बंद हुआ था। हालांकि, चांदी की कीमतों में कोई बदलाव नहीं हुआ और यह 2,68,500 रुपये प्रति किलोग्राम पर स्थिर रही।बाजार के जानकारों का कहना है कि सोने में आई इस गिरावट की मुख्य वजह अमेरिका से आए रोजगार के आंकड़े हैं। एचडीएफसी सिक्योरिटीज के कमोडिटी एनालिस्ट सौमिल गांधी के मुताबिक, अमेरिका में उम्मीद से बेहतर लेबर डेटा आने के बाद फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में जल्द कटौती की उम्मीदें कम हो गई हैं।
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