हरियाणा में औद्योगिक विकास को नई गति देने के लिए प्रदेश सरकार इंडस्ट्रियल मॉडल टाउनशिप (IMT) परियोजनाओं को तेजी से आगे बढ़ा रही है। नायब सिंह सैनी सरकार की योजना के तहत राज्य के छह जिलों में नई IMT स्थापित की जा रही हैं, लेकिन किसानों द्वारा जमीन के ऊंचे दाम मांगने के कारण परियोजनाओं की गति प्रभावित हुई है।
सरकार का लक्ष्य है कि इन औद्योगिक टाउनशिप के माध्यम से निवेश, रोजगार और उद्योगों को बढ़ावा दिया जाए, जिससे हरियाणा की अर्थव्यवस्था को मजबूत किया जा सके।
इन जिलों में बन रही हैं नई IMT
प्रदेश सरकार द्वारा जिन जिलों में IMT विकसित करने की प्रक्रिया शुरू की गई है, उनमें प्रमुख रूप से अंबाला, यमुनानगर, रेवाड़ी, पलवल, फरीदाबाद और जींद शामिल हैं। इसके अलावा हिसार और महेंद्रगढ़ में भी IMT प्रस्तावित हैं, जबकि अंबाला जिले में दो IMT स्थापित की जाएंगी, जिनमें से एक नारायणगढ़ क्षेत्र में प्रस्तावित है।
सरकार के अनुसार अंबाला और यमुनानगर में जमीन से संबंधित प्रक्रियाएं लगभग पूरी हो चुकी हैं, जबकि अन्य जिलों में जमीन की कीमतों को लेकर किसानों और सरकार के बीच बातचीत जारी है।
किसानों की सहमति से ही खरीदी जाएगी जमीन
हरियाणा सरकार ने स्पष्ट किया है कि किसानों की इच्छा के विरुद्ध जमीन का अधिग्रहण नहीं किया जाएगा। यह नीति पहले मनोहर लाल खट्टर सरकार के समय शुरू की गई थी, जिसे वर्तमान सरकार आगे बढ़ा रही है।
सरकार ने जमीन खरीदने के लिए ई-भूमि पोर्टल शुरू किया है, जहां किसान अपनी जमीन बेचने के लिए आवेदन कर सकते हैं और अपनी मांग के अनुसार कीमत बता सकते हैं। यदि सरकार को कीमत उचित लगती है तो जमीन खरीद ली जाती है, अन्यथा बातचीत जारी रहती है।
जमीन के रेट कलेक्टर रेट से 6 से 8 गुना तक मांग
IMT परियोजनाओं में सबसे बड़ी बाधा जमीन की कीमत बन रही है। कई क्षेत्रों में किसान कलेक्टर रेट से 6 से 8 गुना अधिक कीमत मांग रहे हैं, जिससे परियोजनाओं में देरी हो रही है।
सरकार जमीन की वास्तविक बाजार कीमत तय करने और किसानों से सहमति बनाने के प्रयास कर रही है। जैसे ही जमीन की कीमतों पर सहमति बन जाएगी, IMT निर्माण कार्य तेजी से शुरू कर दिया जाएगा।
न्यूनतम जमीन की सीमा घटाने पर विचार
सरकारी नियमों के अनुसार किसी भी IMT के लिए न्यूनतम 1500 एकड़ जमीन की आवश्यकता होती है। हालांकि जमीन की कमी और अधिक कीमतों को देखते हुए सरकार इस सीमा को घटाकर 1200 एकड़ करने पर विचार कर रही है।
इसके अलावा जमीन की कमी को देखते हुए औद्योगिक इकाइयों के निर्माण में ऊंचाई बढ़ाने और फ्लोर एरिया रेशियो (FAR) को सीमा मुक्त करने की योजना भी बनाई जा रही है।
इस संबंध में उद्योग एवं वाणिज्य मंत्री राव नरबीर सिंह ने कहा कि प्रदेश में जमीन महंगी और सीमित होने के कारण औद्योगिक निर्माण की नई नीतियां लागू की जा रही हैं।
पहले से इन जगहों पर मौजूद हैं IMT
हरियाणा में पहले से बावल, मानेसर, खरखौदा, रोहतक और फरीदाबाद में IMT विकसित किए जा चुके हैं। इसके अलावा खरखौदा, हिसार और अंबाला में नई IMT विकसित करने की योजना पर काम जारी है।
सरकार का मानना है कि नई IMT बनने से राज्य में औद्योगिक निवेश बढ़ेगा, रोजगार के अवसर पैदा होंगे और हरियाणा देश के प्रमुख औद्योगिक राज्यों में अपनी स्थिति और मजबूत करेगा।

