हरियाणा सरकार ने राज्य की विधवा, तलाकशुदा और कानूनी रूप से अलग रह रही महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए बड़ा फैसला लिया है। सरकार अब ऐसी महिलाओं को स्वरोजगार शुरू करने के लिए बैंकों के माध्यम से 3 लाख रुपये तक का लोन उपलब्ध करवाएगी। इस योजना का उद्देश्य महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत बनाना और उन्हें खुद का रोजगार शुरू करने के लिए प्रोत्साहित करना है।
यह योजना Haryana Women Development Corporation के माध्यम से संचालित की जाएगी। सरकार का मानना है कि इससे महिलाओं को आर्थिक सहायता मिलने के साथ-साथ रोजगार के नए अवसर भी मिलेंगे और वे दूसरों पर निर्भर रहने की बजाय खुद का व्यवसाय स्थापित कर सकेंगी।
योजना के तहत महिलाएं बुटीक, सिलाई-कढ़ाई, ब्यूटी पार्लर, खाद्य प्रसंस्करण, कैरी बैग निर्माण, बेकरी, रेडीमेड गारमेंट्स, कंप्यूटर कार्य, ई-रिक्शा संचालन, मसाला और अचार यूनिट जैसे छोटे व्यवसाय शुरू कर सकेंगी। सरकार का फोकस छोटे स्तर के स्वरोजगार को बढ़ावा देकर महिलाओं की आय बढ़ाने पर है।
सरकार द्वारा तय पात्रता के अनुसार योजना का लाभ लेने के लिए महिला की आयु 18 से 60 वर्ष के बीच होनी चाहिए। इसके साथ ही परिवार की वार्षिक आय 3 लाख रुपये तक निर्धारित की गई है। योजना में लाभार्थी महिला को कुल ऋण राशि का 10 प्रतिशत हिस्सा स्वयं लगाना होगा, जबकि बाकी राशि बैंक द्वारा ऋण के रूप में उपलब्ध करवाई जाएगी।
योजना की सबसे बड़ी खासियत यह है कि बैंक लोन पर लगने वाले ब्याज का भुगतान Haryana Women Development Corporation द्वारा सब्सिडी के रूप में किया जाएगा। सरकार अधिकतम 50 हजार रुपये तक की ब्याज सब्सिडी देगी, जो तीन वर्षों तक लागू रहेगी। इससे महिलाओं पर आर्थिक दबाव कम होगा और वे आसानी से अपना कारोबार शुरू कर सकेंगी।
राज्य सरकार का मानना है कि इस योजना से महिलाओं को आत्मनिर्भर बनने में मदद मिलेगी और ग्रामीण व शहरी क्षेत्रों में छोटे स्तर के रोजगार को बढ़ावा मिलेगा। सरकार की यह पहल उन महिलाओं के लिए बड़ी राहत मानी जा रही है, जो आर्थिक रूप से कमजोर होने के कारण अपना व्यवसाय शुरू नहीं कर पा रही थीं।
महिला सशक्तिकरण को बढ़ावा देने के उद्देश्य से शुरू की गई यह योजना आने वाले समय में हजारों महिलाओं के लिए रोजगार और आत्मनिर्भरता का नया रास्ता खोल सकती है।

