
Air India Pushes for Xinjiang Air Corridor: पाकिस्तान के एयरस्पेस पर जारी प्रतिबंध के कारण भारतीय एयरलाइंस को यूरोप और उत्तरी अमेरिका जाने वाली कई लंबी दूरी की उड़ानों के लिए लंबे वैकल्पिक रूट अपनाने पड़ रहे हैं। ऐसे में भारत चीन के शिनजियांग एयरस्पेस के जरिए एक वैकल्पिक हवाई कॉरिडोर की संभावना तलाश रहा है। अगर चीन इस रूट को मंजूरी देता है, तो कुछ लंबी दूरी की भारतीय उड़ानों को अपेक्षाकृत छोटा रास्ता मिल सकता है, जिससे उड़ान समय और ईंधन खर्च कम करने में मदद मिल सकती है। हालांकि यह फिलहाल प्रस्ताव के स्तर पर है और चीन की मंजूरी पर निर्भर करेगा।
एयर इंडिया ने सरकार के सामने उठाया मुद्दा
रॉयटर्स की नवंबर 2025 की रिपोर्ट के मुताबिक एयर इंडिया ने भारत सरकार से चीन के साथ बातचीत कर शिनजियांग के ऊपर से वैकल्पिक हवाई मार्ग हासिल करने की कोशिश करने का आग्रह किया था। एयरलाइन ने खास तौर पर शिनजियांग के हॉटन, काशगर और उरुमकी जैसे इलाकों में संभावित डायवर्जन विकल्पों और आपातकालीन पहुंच पर भी विचार करने को कहा था। एयर इंडिया के एक दस्तावेज में अनुमान लगाया गया था कि पाकिस्तान के एयरस्पेस प्रतिबंध से उसकी सालाना प्री-टैक्स कमाई पर करीब 455 मिलियन डॉलर का असर पड़ सकता है। कुछ लंबी दूरी के रूट पर ईंधन खर्च में करीब 29 फीसदी तक बढ़ोतरी और यात्रा समय में लगभग तीन घंटे तक की वृद्धि का भी उल्लेख किया गया था।
शिनजियांग का एयरस्पेस क्यों अहम है?
भारत से यूरोप और उत्तरी अमेरिका जाने वाली उड़ानों के लिए पाकिस्तान के ऊपर से गुजरने वाला हवाई मार्ग भौगोलिक रूप से महत्वपूर्ण रहा है। पाकिस्तान के एयरस्पेस के इस्तेमाल पर रोक के कारण भारतीय विमानन कंपनियों को लंबे वैकल्पिक रास्तों का इस्तेमाल करना पड़ रहा है। पाकिस्तान ने सितंबर 2026 में एक बार फिर भारतीय विमानों पर अपने एयरस्पेस के इस्तेमाल की पाबंदी बढ़ाई है। पाकिस्तान एयरपोर्ट्स अथॉरिटी के नए NOTAM के मुताबिक यह प्रतिबंध 24 अक्टूबर 2026 तक प्रभावी रहेगा और भारतीय रजिस्टर्ड विमानों के साथ-साथ भारतीय एयरलाइंस द्वारा संचालित विमानों पर भी लागू है। पाकिस्तान के एयरस्पेस से बचने के कारण कुछ भारतीय लंबी दूरी की उड़ानों में तीन से छह घंटे तक का अतिरिक्त समय जुड़ा था।
चीन से अनुमति मिलना आसान नहीं
शिनजियांग के रास्ते उड़ान का विचार आकर्षक जरूर है, लेकिन इसके सामने कई व्यावहारिक और सुरक्षा संबंधी चुनौतियां हैं। जिस एयरस्पेस का इस्तेमाल करने की संभावना पर विचार किया गया है, उसका कुछ हिस्सा चीन के सैन्य नियंत्रण वाले क्षेत्र से जुड़ा है। क्षेत्र का ऊंचा भूभाग, सैन्य गतिविधियां और आपात स्थिति में वैकल्पिक एयरपोर्ट की उपलब्धता जैसे मुद्दे भी महत्वपूर्ण हैं। इसलिए भारत की ओर से अनुरोध या बातचीत होने का मतलब यह नहीं है कि भारतीय एयरलाइंस को तत्काल इस कॉरिडोर पर उड़ान की अनुमति मिल गई है। किसी भी नए रूट के लिए चीन की संबंधित अथॉरिटीज की मंजूरी जरूरी होगी।
भारत-चीन के बीच बढ़ रही कनेक्टिविटी
इस संभावित एयर कॉरिडोर की चर्चा ऐसे समय हो रही है, जब भारत और चीन के बीच हवाई संपर्क धीरे-धीरे बहाल हुआ है। एयर इंडिया ने 1 फरवरी 2026 से दिल्ली-शंघाई नॉन-स्टॉप उड़ानें दोबारा शुरू कीं। एयरलाइन के मुताबिक यह सेवा करीब छह साल के अंतराल के बाद बहाल हुई और शुरुआत में सप्ताह में चार बार संचालित की गई। भारत-चीन के बीच सीधी उड़ानों की बहाली को दोनों देशों के बीच हालिया कूटनीतिक संपर्कों के बाद सामान्य संबंधों की दिशा में उठाए गए व्यावहारिक कदमों में से एक बताया था।
