फरीदाबाद: महिलाओं में होने वाला ओवरी कैंसर एक ऐसी बीमारी है, जिसका शुरुआती चरण में पता लगाना मुश्किल होता है. कई बार पेट फूलने जैसी सामान्य परेशानी को महिलाएं गैस समझकर नजरअंदाज कर देती हैं, जबकि कुछ मामलों में यह गंभीर बीमारी का संकेत हो सकता है. इस कैंसर की शुरुआती अवस्था में अक्सर स्पष्ट लक्षण दिखाई नहीं देते, इसलिए बीमारी का पता तब चलता है, जब यह काफी बढ़ चुकी होती है. लोकल18 से बातचीत में अमृता अस्पताल फरीदाबाद की गायनी ऑन्कोलॉजिस्ट डॉ. नेहा कुमार ने ओवरी कैंसर की पहचान, जांच और बचाव से जुड़ी जरूरी बातें बताईं.
डॉ. नेहा कुमार बताती हैं कि ओवरी कैंसर को साइलेंट कैंसर भी कहा जाता है. स्टेज 1 और स्टेज 2 में आमतौर पर इसके स्पष्ट लक्षण सामने नहीं आते. इस वजह से महिलाओं को पता नहीं चल पाता कि उनकी ओवरी में गांठ बन रही है. अधिकतर मामलों में पेट में पानी भरने या बीमारी के एडवांस स्टेज में पहुंचने के बाद इसका पता चलता है.
ओवरी कैंसर की शुरुवाती पहचान के लिए कोई स्क्रीनिंग टेस्ट उपलब्ध नहीं
नेहा कुमार बताती हैं कि फिलहाल भारत ही नहीं, बल्कि दुनिया में ओवरी कैंसर की शुरुआती पहचान के लिए कोई प्रमाणित स्क्रीनिंग टेस्ट उपलब्ध नहीं है. साल में एक या दो बार अल्ट्रासाउंड कराने या CA-125 जैसे ब्लड टेस्ट से बीमारी का पता चलने की गारंटी नहीं होती. ओवरी में बनने वाली कैंसर की गांठ तेजी से बढ़ सकती है. इसलिए छह महीने पहले कराया गया अल्ट्रासाउंड सामान्य होने के बावजूद बाद में परेशानी सामने आ सकती है.
डॉ. नेहा बताती हैं कि ओवरी कैंसर की पहचान के लिए लगातार रिसर्च हो रही है. CA-125 के अलावा कुछ अन्य ट्यूमर मार्कर भी उपलब्ध हैं, जिनसे गांठ के कैंसरयुक्त होने की आशंका का आकलन करने में मदद मिल सकती है. हालांकि, स्वस्थ महिलाओं में भविष्य में कैंसर होने की संभावना पता लगाने वाला कोई प्रमाणित स्क्रीनिंग टेस्ट अभी मौजूद नहीं है. सर्कुलेटिंग DNA की मदद से खून में असामान्य DNA की पहचान करने पर भी शोध जारी है.
ऑन्कोलॉजिस्ट से सलाह लेनी चाहिए
डॉ. नेहा कुमार बताती हैं कि यदि परिवार में किसी महिला को ब्रेस्ट या ओवरी कैंसर हुआ है अथवा किसी पुरुष को कम उम्र में प्रोस्टेट कैंसर हुआ है, तो ऑन्कोलॉजिस्ट से सलाह लेनी चाहिए. डॉक्टर जरूरत के अनुसार जेनेटिक टेस्ट कराने की सलाह दे सकते हैं. इसमें कैंसर से जुड़े जीन में म्यूटेशन की जांच की जाती है. ऐसी गड़बड़ी मिलने पर ब्रेस्ट और ओवरी कैंसर का खतरा बढ़ सकता है. जिन महिलाओं में म्यूटेशन पाया जाता है और परिवार पूरा हो चुका है, उनके लिए डॉक्टर जोखिम के आकलन के बाद फैलोपियन ट्यूब और ओवरी निकलवाने जैसे बचाव के विकल्प सुझा सकते हैं.
सलाह देती हैं कि खासकर मध्यम उम्र की महिलाओं को लंबे समय तक पेट फूलने की समस्या होने पर इसे केवल गैस समझकर नहीं छोड़ना चाहिए. ऐसी स्थिति में अल्ट्रासाउंड कराना जरूरी है. जिनके परिवार में कैंसर की हिस्ट्री है, उन्हें समय रहते विशेषज्ञ से मिलकर बचाव के उपायों की जानकारी लेनी चाहिए.

