यमुनानगर. हरियाणा में बिजली विभाग के निजीकरण को लेकर कर्मचारियों का गुस्सा सड़कों पर दिखाई देने लगा है. यमुनानगर समेत अन्य जिलों में कर्मचारियों का गुस्सा फूटा है और अब वह 22 से 24 अक्तूबर तक हड़ताल पर चले गए हैं. यमुनानगर में 21 अक्तूबर को बिजली कर्मचारियों और सर्व कर्मचारी संघ ने सरकार की नीतियों के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया. कर्मचारियों ने चेतावनी दी कि मांगें नहीं मानी गईं तो दिवाली काली होगी और अनिश्चितकालीन हड़ताल की जा सकती है.
बिजली कर्मचारी एवं इंजीनियर संयुक्त संघर्ष मोर्चा के आह्वान पर विभिन्न सर्कलों के सैकड़ों कर्मचारी कन्हैया साहिब चौक पर एकत्रित हुए और जोरदार प्रदर्शन किया.
बिजली कर्मचारी यूनियन के वरिष्ठ उपप्रधान अशोक शर्मा ने सरकार की नीतियों पर सवाल उठाते हुए कहा कि कर्मचारियों पर सख्त नियम लागू किए जा रहे हैं और उनके हितों की अनदेखी हो रही है. उन्होंने कहा कि बिजली कर्मचारी पूरी ईमानदारी और मेहनत से जनता को सेवाएं दे रहे हैं, लेकिन इसके बावजूद उनकी मांगों को गंभीरता से नहीं लिया जा रहा. अशोक शर्मा ने स्पष्ट किया कि कर्मचारी सरकार की नीतियों के आगे झुकने वाले नहीं हैं और अपने अधिकारों की लड़ाई जारी रखेंगे. उन्होंने सरकार को चेतावनी देते हुए कहा कि यदि 22 और 23 तारीख को कर्मचारियों की मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया, तो बिजली कर्मचारी अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाने के लिए मजबूर हो सकते हैं.
क्या है विवाद की वजह
हरियाणा विद्युत नियामक आयोग (एचईआरसी) ने 19 अक्टूबर को बिजली अधिनियम, 2003 की धारा 14 के तहत कंपनी को नूंह और गुरुग्राम में बिजली सप्लाई के लिए 25 साल के लिए लाइसेंस दिया है. ऐसे में कंपनी की ओर से अगले पांच साल में 4,717 करोड़ रुपये निवेश किया जाएगा और दो जिलों में वित्त वर्ष 2027-28 से सप्लाई दी जाएगी. अहम बात है कि प्रस्तावित लाइसेंस क्षेत्र में सालाना बिजली बिक्री वित्त वर्ष 2024-25 के करीब 12,220 करोड़ यूनिट से बढ़कर वित्त वर्ष 2030-31 तक 18,224 करोड़ यूनिट होने का अनुमान है. अब इसी का विरोध बिजली कर्मचारी कर रहे हैं.
बिजली मंत्री ने किया भी कर्मचारियों का समर्थन
ऊर्जा मंत्री अनिल विज ने बिजली वितरण का समानांतर लाइसेंस देने के आदेश के खिलाफ अपील करने का ऐलान किया है. विज ने कहा, “हरियाणा विद्युत नियामक आयोग की ओर से इलेवन पावर कंपनी को गुरुग्राम और नूंह में बिजली वितरण का लाइसेंस दिया है और इसके खिलाफ सरकार विद्युत अपीलीय न्यायाधिकरण (एपीटीईएल) में अपील करेगी.” विज ने अगस्त में कहा था कि राज्य सरकार गुरुग्राम और नूंह में निजी बिजली कंपनियों को समानांतर बिजली वितरण लाइसेंस देने के प्रस्ताव के खिलाफ है. जब आयोग ने इस मामले में राज्य सरकार से जवाब मांगा, तो उन्होंने प्रस्ताव के हर बिंदु पर विरोध जताया था. उधर, हड़ताल की वजह से लोगों को परेशानी झेलनी पड़ सकती है और कई इलाके अंधेरे में डूब सकते हैं.

