दिल्ली : राजधानी दिल्ली की अनधिकृत कॉलोनियों, जिनमें पंचशील विहार जैसी प्रमुख कॉलोनियां शामिल हैं, में 2014 के बाद बनी इमारतों पर बुलडोजर का खतरा मंडरा रहा है। कुछ संपत्तियों पर MCD ने एक्शन लेना भी शुरू कर दिया है। जानकारी के मुताबिक दिल्ली नगर निगम (MCD) ने इन कॉलोनियों में जून 2014 के बाद हुए अवैध निर्माणों को अपने रडार पर लिया है। विशेषज्ञों का अनुमान है कि दिल्ली में ऐसी करीब 10 लाख संपत्तियाँ इस दायरे में आ सकती हैं। यदि तत्काल कोई कदम नहीं उठाया गया तो लाखों परिवारों के सामने गंभीर संकट खड़ा हो सकता है।
PM-UDAY योजना और सीमित सुरक्षा
केंद्र सरकार की प्रधानमंत्री अनधिकृत कॉलोनी दिल्ली आवास अधिकार योजना (PM-UDAY) के तहत दिल्ली की 1731 अनधिकृत कॉलोनियों में रहने वाले लोगों को मालिकाना हक देने की प्रक्रिया शुरू की गई थी। 2019 में शुरू हुई इस योजना के तहत अब तक 2.15 लाख लोगों ने ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन करवाया है, और कई को कन्वेंस डीड भी मिल चुकी है। हालांकि, राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली विधि (विशेष उपबंध) दूसरा अधिनियम, 2011 के तहत केवल 1 जून 2014 तक बनी इमारतों को ही विध्वंस और सीलिंग से संरक्षण प्राप्त है। इसके बाद बने निर्माण इस कानून के दायरे से बाहर हैं, जिसके कारण MCD को शिकायत मिलने पर कार्रवाई करने की मजबूरी है।
हाल ही में पंचशील विहार में 1995 से पहले बनी इमारतों पर भी MCD की कार्रवाई ने निवासियों में दहशत पैदा कर दी है। एक स्थानीय निवासी, अरुण शर्मा ने कहा, “जब सरकार ने 2019 में कॉलोनियों को नियमित किया और PM-UDAY के तहत रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया शुरू की, तो लोगों को लगा कि उनकी संपत्ति सुरक्षित है। लेकिन अब 2014 के बाद बनी इमारतों पर कार्रवाई की तलवार लटक रही है। MCD के पास कोई चारा नहीं, क्योंकि कानून के मुताबिक उन्हें शिकायत पर कार्रवाई करनी ही पड़ती है।”
इन कॉलोनियों के निवासियों ने हाल ही में नई दिल्ली से बीजेपी सांसद बांसुरी स्वराज के सामने अपनी बात रखी थी, सांसद बांसुरी स्वराज ने भरोसा दिया था कि जल्द ही वो इस मामले में आगे बात करेंगी और अनधिकृत नियमित कॉलोनी में रहनेवाले परिवारों को राहत देंगी लेकिन ये बातचीत भी अभी ठंडे बस्ते में चली गई है।
2014 के बाद बनी इमारतों पर खतरा
दिल्ली हाई कोर्ट के हाल के आदेशों ने MCD को 2014 के बाद अनधिकृत कॉलोनियों में हुए निर्माणों का डेटा जुटाने और कार्रवाई करने का निर्देश दिया है। एक रिपोर्ट के अनुसार, MCD अपने 12 जोनों से अवैध निर्माणों और उन पर की गई कार्रवाइयों की जानकारी एकत्र कर रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि दिल्ली में ऐसी करीब 10 लाख संपत्तियाँ हैं, जो 2014 के बाद बनी हैं और अब कार्रवाई के दायरे में आ सकती हैं।
पंचशील विहार सहित कई कॉलोनियों में निवासियों का कहना है कि 2019 में नियमितीकरण और PM-UDAY योजना के तहत रजिस्ट्रेशन के बाद उन्हें उम्मीद थी कि उनकी संपत्तियाँ सुरक्षित रहेंगी। लेकिन कानून की सीमाओं के कारण 2014 के बाद बने निर्माणों को संरक्षण नहीं मिल रहा है।
निवासियों की मांग: 2019 तक बढ़े संरक्षण
निवासियों और स्थानीय नेताओं का कहना है कि सरकार को इस मुद्दे पर तत्काल कदम उठाने चाहिए। पंचशील विहार के निवासी आकाश कुमार ने कहा कि, ” जब 2019 में कॉलोनियाँ नियमित की गई हैं और PM-UDAY के तहत रजिस्ट्रेशन हो रहे हैं, तो कम से कम 2019 तक बनी इमारतों को विध्वंस से संरक्षण मिलना चाहिए।” उनका मानना है कि यह एकमात्र तरीका है जिससे लाखों परिवारों को राहत मिल सकती है।
शहरी मामलों के विशेषज्ञ जगदीश ममगांई ने भी इस बात पर जोर दिया कि सरकार और MCD को नियमितीकरण की प्रक्रिया को और पारदर्शी करना होगा। उन्होंने कहा, “2014 के बाद बनी संपत्तियों की सूची और सर्वे का अभाव एक बड़ी समस्या है। सरकार को कट-ऑफ तारीख को 2019 तक बढ़ाने पर विचार करना चाहिए, ताकि निवासियों को राहत मिले।”
MCD की मजबूरी और हाई कोर्ट का दबाव
MCD का कहना है कि दिल्ली हाई कोर्ट के आदेशों के तहत उन्हें अवैध निर्माणों के खिलाफ कार्रवाई करनी पड़ रही है। हाल ही में मुस्तफाबाद में एक चार मंजिला इमारत के ढहने के बाद, जिसमें 11 लोगों की मौत हो गई थी, MCD ने 142 अवैध और खतरनाक इमारतों की पहचान की है। इनमें से कई दयालपुर, नेहरू विहार, सीलमपुर, और ब्रिजपुरी जैसे इलाकों में हैं। MCD ने इन इमारतों को ठीक करने या विध्वंस करने के नोटिस जारी किए हैं।
हालांकि, पंचशील विहार जैसे नियमित कॉलोनियों में भी कार्रवाई ने निवासियों में असंतोष पैदा किया है। एक X पोस्ट में दावा किया गया कि सरकार द्वारा नियमित की गई कॉलोनियों में भी बुलडोजर कार्रवाई हो रही है, जिससे PM-UDAY योजना की विश्वसनीयता पर सवाल उठ रहे हैं।
आगे का रास्ता
निवासियों और विशेषज्ञों का मानना है कि सरकार को निम्नलिखित कदम उठाने चाहिए:
कट-ऑफ तारीख में संशोधन: 2014 की कट-ऑफ तारीख को कम से कम 2019 तक बढ़ाया जाए, ताकि PM-UDAY के तहत रजिस्टर्ड संपत्तियों को संरक्षण मिले।
पारदर्शी सर्वे: अनधिकृत कॉलोनियों में 2014 के बाद बने निर्माणों का व्यापक सर्वे किया जाए और उनकी स्थिति स्पष्ट की जाए।
नागरिक भागीदारी: MCD और DDA को निवासियों और निवासी कल्याण संघों (RWAs) के साथ मिलकर नियमितीकरण की प्रक्रिया को तेज करना चाहिए।
विकास निधि का उपयोग: PM-UDAY के तहत एकत्र शुल्क से बुनियादी ढांचे का विकास किया जाए, ताकि कॉलोनियों में सड़क, नाली, और अन्य सुविधाएँ बेहतर हों।
दिल्ली की अनधिकृत कॉलोनियों में रहने वाले लाखों परिवारों के लिए 2014 के बाद बनी इमारतों पर मंडरा रहा विध्वंस का खतरा एक गंभीर चुनौती है। सरकार और MCD को तत्काल कदम उठाने होंगे, ताकि PM-UDAY योजना का लाभ सभी पात्र निवासियों तक पहुँचे और उनकी संपत्तियाँ सुरक्षित रहें। यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई, तो दिल्ली में सामाजिक और आर्थिक संकट गहरा सकता है।