दिल्ली : बुलडोजर एक्शन के बाद दिल्लीवालों के बीच ATMCD काफी चर्चा में है. अनधिकृत निर्माण (unauthorised construction) से संबंधित अपील दिल्ली में अपीलेट ट्रिब्यूनल, म्युनिसिपल कॉरपोरेशन ऑफ दिल्ली (ATMCD) में दायर की जाती है। यह ट्रिब्यूनल दिल्ली म्युनिसिपल कॉरपोरेशन एक्ट, 1957 की धारा 347-A के तहत गठित एक स्वतंत्र वैधानिक निकाय है। नीचे इस प्रक्रिया और सुनवाई से संबंधित जानकारी आसान भाषा में दी गई है:
अपील दायर होने के बाद प्रक्रिया
- अपील दाखिल करना:
- अनधिकृत निर्माण के खिलाफ MCD (उत्तर, दक्षिण, या पूर्वी) द्वारा जारी डिमोलिशन या सीलिंग ऑर्डर के खिलाफ अपील ATMCD में दायर की जाती है।
- अपील दिल्ली के तिस हजारी कोर्ट कॉम्प्लेक्स में कमरा नंबर 29 (ग्राउंड फ्लोर) में स्थित ATMCD के रजिस्ट्रार कार्यालय में जमा की जाती है।
- जरूरी दस्तावेज: अपील के साथ साइट प्लान, प्रॉपर्टी की लोकेशन, अपीलकर्ता की पहचान का सबूत, और MCD ऑर्डर की कॉपी जमा करनी होती है। रजिस्ट्रेशन फीस 100 रुपए और अपील फीस 500 रुपए नकद में जमा होती है।
- अपील धारा 343 या 347-B के तहत दायर की जाती है, जो मुख्य रूप से डिमोलिशन और सीलिंग से संबंधित होती हैं।
- सुनवाई कौन करता है:
- ATMCD की सुनवाई प्रेसाइडिंग ऑफिसर द्वारा की जाती है, जो जिला जज या अतिरिक्त जिला जज के रैंक का एक न्यायिक अधिकारी होता है। यह अधिकारी केंद्र सरकार द्वारा दिल्ली हाई कोर्ट की सहमति से नियुक्त किया जाता है।
- वर्तमान में ATMCD की प्रेसाइडिंग ऑफिसर सुनीता गुप्ता हैं।
- ट्रिब्यूनल में रजिस्ट्रार और अन्य स्टाफ सहायता करते हैं, लेकिन सुनवाई और फैसले का अधिकार केवल प्रेसाइडिंग ऑफिसर के पास होता है।
- सुनवाई की प्रक्रिया:
- अपील दायर होने के बाद, ट्रिब्यूनल MCD और अपीलकर्ता को सुनवाई का मौका देता है। सुनवाई में प्रॉपर्टी का निरीक्षण, दस्तावेजों की जांच, और दोनों पक्षों के तर्क सुने जाते हैं।
- ट्रिब्यूनल के पास सिविल कोर्ट जैसे अधिकार हैं, जैसे गवाहों को बुलाना, दस्तावेज मांगना, और शपथ पर बयान लेना।
- ATMCD को अपील का फैसला जल्द से जल्द करने का निर्देश है, खासकर डिमोलिशन या सीलिंग से संबंधित मामलों में। दिल्ली हाई कोर्ट ने कई बार ATMCD को लंबित अपीलों का निपटारा तेजी से करने को कहा है।
- सुनवाई तिस हजारी कोर्ट कॉम्प्लेक्स में होती है, और यह आमतौर पर व्यक्तिगत (फेस-टू-फेस) या आवश्यकता पड़ने पर लिखित रूप में हो सकती है।
- सुनवाई के बाद फैसला:
- प्रेसाइडिंग ऑफिसर अपील को स्वीकार, संशोधित, या खारिज कर सकता है। फैसला MCD के डिमोलिशन/सीलिंग ऑर्डर को रद्द, संशोधित, या बरकरार रख सकता है।
- अगर अपीलकर्ता या MCD फैसले से असंतुष्ट है, तो वे दिल्ली हाई कोर्ट में धारा 347-D के तहत अपील दायर कर सकते हैं, लेकिन यह अपील केवल उन फैसलों पर हो सकती है जो MCD के ऑर्डर को पुष्ट, संशोधित, या रद्द करते हों।
ध्यान देने योग्य बातें
- समय सीमा: MCD के डिमोलिशन/सीलिंग ऑर्डर के खिलाफ अपील आमतौर पर 30 दिनों के भीतर दायर करनी होती है, लेकिन ट्रिब्यूनल देरी को माफ कर सकता है अगर उचित कारण हो।
- वकील की जरूरत: अपीलकर्ता स्वयं या वकील के माध्यम से अपील दायर कर सकता है। पावर ऑफ अटॉर्नी के साथ वकील को नियुक्त करना जरूरी है।
- MCD की भूमिका: MCD ट्रिब्यूनल का हिस्सा नहीं है और केवल पक्षकार के रूप में पेश होती है। ट्रिब्यूनल स्वतंत्र रूप से काम करता है।
- निरीक्षण: कई मामलों में, ट्रिब्यूनल MCD को प्रॉपर्टी का निरीक्षण करने और रिपोर्ट देने का आदेश देता है। अगर MCD निरीक्षण में असमर्थ होती है, तो इसे दिल्ली हाई कोर्ट द्वारा आलोचना का सामना करना पड़ सकता है।
उदाहरण
- दिल्ली हाई कोर्ट के एक मामले (स्मृति भाटिया बनाम MCD, 2024) में, ATMCD को राजोकरी में अनधिकृत निर्माण की अपील जल्दी निपटाने का निर्देश दिया गया था। सुनवाई में MCD की निष्क्रियता की आलोचना हुई, और ट्रिब्यूनल को स्पष्ट फैसला देने को कहा गया।
- प्रेसाइडिंग ऑफिसर सुनीता गुप्ता वर्तमान में ऐसी अपीलों की सुनवाई कर रही हैं, और ट्रिब्यूनल तिस हजारी में नियमित रूप से कार्य करता है।
ATMCD में अनधिकृत निर्माण की अपील दायर होने के बाद सुनवाई प्रेसाइडिंग ऑफिसर (वर्तमान में सुनीता गुप्ता, जिला जज रैंक) द्वारा तिस हजारी कोर्ट कॉम्प्लेक्स में की जाती है। सुनवाई में दोनों पक्षों को सुना जाता है, और फैसला MCD के ऑर्डर को प्रभावित करता है। अपील दायर करने के लिए सही दस्तावेज और फीस जरूरी हैं, और ट्रिब्यूनल को जल्द फैसला करने का निर्देश है। अगर फैसले से असंतुष्टि हो, तो दिल्ली हाई कोर्ट में अपील की जा सकती है।