
कहा- नैतिकता और कानून दोनों अलग-अलग हैं, फैसले नैतिकता से नहीं, कानून से होते हैं
Allahabad HC, (द भारत ख़बर), नई दिल्ली: लिव-इन को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक अहम फैसला सुनाया है। जस्टिस जेजे मुनीर और जस्टिस तरुण सक्सेना की बेंच ने कहा, शादीशुदा पुरुष का किसी बालिग महिला के साथ सहमति से लिव-इन में रहना अपराध नहीं है। नैतिकता और कानून दोनों अलग-अलग हैं। फैसले नैतिकता से नहीं, कानून से होते हैं। कोर्ट शाहजहांपुर के एक केस से जुड़ी सुनवाई कर रहा था।
जिसमें लिव-इन में रह रहे एक कपल ने परिवार से मिल रही धमकियों के खिलाफ सुरक्षा मांगी थी। कोर्ट ने अंतरिम राहत देते हुए कपल की गिरफ्तारी पर रोक लगा दी है। साथ ही महिला के परिवार को कपल से संपर्क करने या उन्हें किसी तरह का नुकसान पहुंचाने से भी मना किया है।
शाहजहांपुर एसपी को कपल की सुरक्षा की जिम्मेदारी
महिला ने पुलिस अधीक्षक को दिए आवेदन में कहा कि वह बालिग है और अपनी मर्जी से पुरुष के साथ रह रही है। कपल ने यह भी बताया कि परिवार उन्हें जान से मारने की धमकी दे रहा है, जिससे आॅनर किलिंग का खतरा है। कोर्ट ने पुलिस की भूमिका पर सवाल उठाते हुए कहा कि दो बालिगों की सुरक्षा सुनिश्चित करना उसकी जिम्मेदारी है। शाहजहांपुर के एसपी को कपल की सुरक्षा के लिए व्यक्तिगत रूप से जिम्मेदार ठहराया गया।
लड़की की मां ने बहला-फुसलाकर साथ ले जाने का लगाया आरोप, एफआईआर भी दर्ज कराई
शाहजहांपुर के जैतीपुर थाने में 8 जनवरी, 2026 को लड़की की मां कांति ने एफआईआर दर्ज कराई थी। इसमें आरोप लगाया था कि 8 जनवरी की सुबह बेटी को नेत्रपाल नाम का शख्स बहला-फुसलाकर अपने साथ ले गया था। इसमें नेत्रपाल की मदद धर्मपाल ने भी की। दोनों के खिलाफ बीएनएस की धारा 87 में एफआईआर दर्ज की गई।
लड़की और उसके पार्टनर ने एफआईआर रद्द करने की मांग की
इस एफआईआर को याचिकाकर्ता लड़की और उसके पार्टनर नेत्रपाल ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में चुनौती दी। दोनों ने कोर्ट से एफआईआर को रद्द करने की मांग करते हुए सुरक्षा मांगी।
लिव-इन में रहने में गरिमा भंग होने जैसा कुछ नहीं
कोर्ट में लड़की और नेत्रपाल के वकील ने बताया कि महिला बालिग है, क्योंकि उनकी मां द्वारा दर्ज की गई प्रथम सूचना रिपोर्ट में भी कहा गया है कि बेटी की उम्र 18 साल है।
वहीं, लड़की की मां के वकील ने कोर्ट को बताया कि दूसरे याचिकाकर्ता एक विवाहित पुरुष हैं और किसी अन्य महिला के साथ उनका रहना अपराध है। इस पर कोर्ट ने कहा कि कोई शादीशुदा व्यक्ति किसी बालिग के साथ अगर सहमति से लिव-इन में रह रहा तो इसमें गरिमा भंग होने जैसा कुछ नहीं है।
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