प्लेबैक सिंगिंग छोड़ने के फैसले से पूरी इंडस्ट्री को किया सन्न
Arijit Singh, (द भारत ख़बर), नई दिल्ली: बॉलीवुड के मशहूर सिंगर अरिजीत सिंह के प्लेबैक सिंगिंग छोड़ने के फैसले ने पूरी इंडस्ट्री को सन्न कर दिया है। तुम ही हो से लेकर केसरिया तक, करोड़ों दिलों को अपनी आवाज से सुकून देने वाले अरिजीत अब अपनी जिंदगी की नई धुन बुनना चाहते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि करोड़ों की कमाई और ग्लोबल स्टारडम को ठुकराकर अरिजीत जिस सुकून की तलाश में हैं, वो उन्हें अपने परिवार में मिलता है। लाइमलाइट से कोसों दूर रहने वाले अरिजीत सिंह की लव स्टोरी किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं है।
पश्चिम बंगाल के तारापीठ मंदिर में बेहद सादगी से कोयल के साथ लिए सात फेरे
अरिजीत सिंह की पत्नी का नाम कोयल रॉय है। कोयल और अरिजीत बचपन के दोस्त हैं और दोनों ने एक ही स्कूल में पढ़ाई की है। अरिजीत की जिंदगी में कोयल तब आईं जब सिंगर अपनी पहली शादी टूटने के बाद मुश्किल दौर से गुजर रहे थे। उस समय कोयल की भी पहली शादी टूट चुकी थी। दोनों ने एक दूसरे को सहारा दिया। साल 2014 में, जब अरिजीत का करियर सातवें आसमान पर था, उन्होंने किसी बड़े होटल के बजाय पश्चिम बंगाल के तारापीठ मंदिर में बेहद सादगी से कोयल के साथ सात फेरे लिए। इस शादी में केवल परिवार के करीबी लोग ही शामिल हुए थे।
तीन बच्चों का भरा-पूरा परिवार
अरिजीत और कोयल के परिवार में तीन बच्चे हैं, जिन्हें वे अपनी दुनिया मानते हैं। इन तीन बच्चों में से दो बच्चे अरिजीत और कोयल के हैं, तो कोयल की पहली शादी से उनकी एक बेटी है। अरिजीत ने न केवल कोयल को अपनाया, बल्कि उनकी बेटी को भी पिता का पूरा प्यार दिया। वो उसे अपनी सगी बेटी की तरह ही पाल रहे हैं।
गांव की मिट्टी से जुड़ाव
रिटायरमेंट की खबरों के बीच अरिजीत की सादगी फिर चर्चा में है। जहां बॉलीवुड स्टार्स लग्जरी गाड़ियों में घूमते हैं, वहीं अरिजीत को आज भी अपने गांव जियागंज (मूशिर्दाबाद) की सड़कों पर स्कूटर चलाते और बाजार से झोला लेकर सामान खरीदते देखा जाता है। दरअसल उनके पिता कक्कड़ सिंह पंजाबी सिख थे। उनका परिवार देश के बंटवारे के समय लाहौर से भारत आया था। वहीं, उनकी मां अदिति सिंह एक बंगाली हिंदू परिवार से थीं। शुरूआत से ही संगीत अरिजीत के खून में था। उनके घर में हर कोई सुरों से जुड़ा था। उनकी नानी और मौसी भारतीय शास्त्रीय संगीत में माहिर थीं।
3 साल की उम्र संगीत सिखना किया शुरू
अरिजीत सिंह की मां न सिर्फ गाती थीं, बल्कि शानदार तबला भी बजाती थीं। उनके मामा भी एक बेहतरीन तबला वादक थे। अरिजीत का टैलेंट बचपन में ही दिखने लगा था। जब बच्चे ठीक से बोलना नहीं सीखते, तब यानी 3 साल की उम्र में उन्होंने हजारी भाइयों (राजेंद्र प्रसाद, धीरेंद्र प्रसाद और बीरेंद्र प्रसाद हजारी) से संगीत सीखना शुरू कर दिया था।
9 साल की उम्र में मिली स्कॉलरशिप
उनकी लगन इतनी पक्की थी कि महज 9 साल की उम्र में उन्हें भारतीय शास्त्रीय संगीत के लिए सरकारी स्कॉलरशिप मिली। उन्होंने मोजार्ट, बीथोवेन जैसे पश्चिमी दिग्गजों को भी सुना और उस्ताद रशीद खान, जाकिर हुसैन और किशोर कुमार को अपना आदर्श बनाया। अरिजीत हमेशा से एक अच्छे छात्र थे, लेकिन उनका दिल हमेशा किताबों से ज्यादा म्यूजिक में लगा रहता था।
अब बतौर छोटे कलाकार बनकर करेंगे काम
अरिजीत ने अपने संन्यास वाले पोस्ट में लिखा भी है कि वह अब एक छोटे कलाकार के रूप में खुद पर काम करेंगे। उनके करीबी सूत्रों का मानना है कि अरिजीत अब अपने बच्चों को मुंबई की चकाचौंध से दूर एक साधारण और बेहतर परवरिश देना चाहते हैं, शायद इसीलिए उन्होंने फिल्मों की इस भागदौड़ भरी दुनिया को अलविदा कह दिया है।

