हरियाणा विद्युत विनियामक आयोग (HERC) ने राज्य के रूफटॉप सोलर उपभोक्ताओं के लिए एक बड़ी राहत और फायदे का ऐलान किया है। आयोग ने रूफटॉप सोलर ग्रिड इंटरएक्टिव सिस्टम्स (नेट मीटरिंग/ग्रॉस मीटरिंग आधारित) विनियम, 2021 में किए गए दूसरे संशोधन में कई अहम बदलाव किए हैं, जिससे सौर ऊर्जा अपनाने वाले लोगों को काफी आर्थिक लाभ मिलेगा। यह कदम प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना को और बढ़ावा देगा।
पुराने नियमों में थी यह बाधा
पहले के नियमों के तहत, उपभोक्ता द्वारा रूफटॉप सोलर से पैदा की गई बिजली की मात्रा, उसकी सालाना बिजली खपत के केवल 90% तक ही समायोजित की जा सकती थी। अगर इससे ज्यादा बिजली पैदा होती थी, तो उस अतिरिक्त बिजली का कोई मुआवजा नहीं मिलता था और वह व्यर्थ चली जाती थी। साथ ही, अगर कोई उपभोक्ता सिस्टम हटवाता था, तो उसके बचे हुए क्रेडिट भी खत्म हो जाते थे।
नए संशोधन में ये हुए बड़े बदलाव
नए संशोधन में उपभोक्ताओं के हित में कई महत्वपूर्ण फैसले लिए गए हैं:
90% की कैप हुई खत्म: सबसे बड़ा बदलाव यह है कि अब उपभोक्ता की वार्षिक खपत के 90% तक की सीमा (कैप) पूरी तरह से हटा दी गई है। अब उपभोक्ता जितनी चाहें उतनी अतिरिक्त सौर बिजली ग्रिड में डाल सकते हैं और उसका पूरा लाभ ले सकते हैं।
अधिशेष बिजली का मिलेगा बेहतर मूल्य: अब उपभोक्ता द्वारा पैदा की गई अतिरिक्त बिजली (अनएडजस्टेड नेट क्रेडिट) को डिस्कॉम (जैसे DHBVN, UHBVN) 90% फीड-इन टैरिफ पर खरीदेंगी। यह बाजार दर से काफी बेहतर है और उपभोक्ताओं को अधिक आय का अवसर देगा।
सेटलमेंट पीरियड में बदलाव: सेटलमेंट की अवधि अब वित्तीय वर्ष (अप्रैल-मार्च) की बजाय कैलेंडर वर्ष (1 अक्टूबर से 30 सितंबर)होगी। यह बदलाव इसलिए बेहतर है क्योंकि गर्मियों के महीनों में सौर ऊर्जा का उत्पादन सबसे अधिक होता है।
सिस्टम छोड़ने पर भी मिलेगा मुआवजा: यदि कोई उपभोक्ता अपना सोलर सिस्टम हटवाता है, तो उसके बचे हुए क्रेडिट यूनिट्स का भी 90% फीड-इन टैरिफ पर मुआवजा दिया जाएगा, जबकि पहले यह राशि जब्त हो जाती थी।
HERC का यह संशोधन हरियाणा में रूफटॉप सोलर को बढ़ावा देने के लिए एक गेम-चेंजर कदम साबित होगा। 90% की कैप हटने और अधिशेष बिजली का बेहतर दाम मिलने से उपभोक्ताओं के लिए सोलर पैनल लगाना अब कहीं ज्यादा आकर्षक और आर्थिक रूप से व्यवहार्य हो गया है। यह नीति न केवल उपभोक्ताओं के बिजली बिल में कमी लाएगी, बल्कि उन्हें अतिरिक्त आय का स्रोत भी प्रदान करेगी। इससे राज्य सरकार का वर्ष 2026-27 तक 2.2 लाख रूफटॉप सौर इकाइयां स्थापित करने का लक्ष्य हासिल करने में भी मदद मिलेगी और पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा मिलेगा।



