कहा, हम ‘इनक्रेडिबल इंडिया’ से ‘क्रेडिबल इंडिया’ बनने की यात्रा पर अग्रसर
Business News Hindi (द भारत ख़बर), बिजनेस डेस्क : प्रधानमंत्री के प्रधान सचिव शक्तिकांत दास ने कहा है कि वर्तमान समय में व्यापार और आर्थिक रिश्तों की तस्वीर तेजी से बदल रही है। उन्होंने कहा कि वर्तमान में वैश्विक व्यापार में बढ़ते संरक्षणवाद और टैरिफ के मंडराते खतरों के बीच पहले से ज्यादा सुचेत होने की जरूरत है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि पिछले दशकों में वैश्वीकरण को चलाने वाली आम सहमति अब कमजोर पड़ चुकी है और बहुपक्षीय सहयोग कठिन हो गया है। ऐसे परिदृश्य में, भारत ने ‘आत्मनिर्भरता’ को अपनी नीतियों के मूल सिद्धांत के रूप में अपनाया है। उन्होंने ‘आत्मनिर्भरता’ की परिभाषा को स्पष्ट करते हुए दो बातों पर जोर दिया।
भारत अब एक ऐतिहासिक बदलाव के मुहाने पर खड़ा है। दास ने जोर देकर कहा कि सरकार की ओर से अपनाई गई नीतियों और सुधारों के कारण भारत ‘इनक्रेडिबल इंडिया’ (अतुल्य भारत) से ‘क्रेडिबल इंडिया’ (विश्वसनीय भारत) बनने की यात्रा पर अग्रसर है।
अमेरिका के रुख पर जताई चिंता
दास का यह बयान ऐसे समय में आया है जब वैश्विक स्तर पर भू-राजनीतिक हवाएं बदल रही हैं। विशेष रूप से, अमेरिका ‘रूसी तेल पर प्रतिबंध विधेयक’ पर विचार कर रहा है, जिसमें रूस से तेल खरीदने वाले देशों- जिनमें भारत और चीन शामिल हैं- पर 500 प्रतिशत तक टैरिफ लगाने का प्रावधान हो सकता है। उन्होंने कहा कि पारंपरिक बहुपक्षवाद, जो कभी वैश्विक शासन का आधार था, अब भू-राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता और संरक्षणवाद के कारण हाशिए पर है। दास ने कहा कि नियम-आधारित प्रणालियों की नींव माने जाने वाले प्रमुख अंतरराष्ट्रीय संस्थान अपने मूल जनादेश को पूरा करने में संघर्ष कर रहे हैं।
व्यापार को हथियार बनाया जा रहा
व्यापार और आपूर्ति शृंखलाओं को अब व्यवधान और प्रभुत्व के साधन के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है। ‘री-शोरिंग’ (घरेलू उत्पादन) और ‘फ्रेंड-शोरिंग’ (मित्र देशों के साथ व्यापार) जैसी प्रवृत्तियां वैश्विक नेटवर्क को खंडित कर रही हैं। तमाम चुनौतियों के बावजूद, दास ने विश्वास जताया कि भारत 2020 के कोविड-19 संकट के बाद से आए कई वैश्विक झटकों के ‘परफेक्ट स्टॉर्म’ (पूर्ण तूफान) से सफलतापूर्वक बाहर निकल आया है। उन्होंने कहा, “अब देश द्वारा अपनाई गई नीतियों के साथ, हवा हमारे पक्ष में है। हम वास्तव में ‘विकसित भारत’ की राह पर हैं”। दास ने स्वीकार किया कि ज्ञात और अज्ञात स्रोतों से चुनौतियां आती रहेंगी, लेकिन भारत का रुख स्पष्ट है।
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