शुद्धिकरण के बाद मंदिर खुले
(द भारत ख़बर), नई दिल्ली: साल 2026 का पहला चंद्र ग्रहण समाप्त हो गया है। चंद्र ग्रहण मंगलवार (3 मार्च 2026) दोपहर 3.21 बजे शुरू हुआ और शाम 6.47 बजे तक रहा। भारत के पूर्वी हिस्से में चंद्र ग्रहण सबसे पहले दिखा। कोलकाता में पूर्णिमा का चांद ग्रहण के चलते आधा दिखाई दिया।
ग्रहण समाप्त होने के बाद मंदिरों में भगवान को स्नान कराया गया। श्रृंगार और भोग आरती के बाद मंदिर खुल गए। उज्जैन के श्री महाकालेश्वर मंदिर में मंगलवार सुबह भस्म आरती के दौरान होली उत्सव मनाया गया। महाकालेश्वर मंदिर में कपाट बंद नहीं किए जाएंगे।
भारत मौसम विज्ञान विभाग के अनुसार, मंगलवार (3 मार्च 2026) को पूर्ण चंद्र ग्रहण था। भारत में चंद्रग्रहण सबसे अरुणाचल प्रदेश के तेजू नगर में दिखाई देगा, यहां चंद्रोदय शाम 5 बजकर 3 मिनट पर हुआ। चंद्र ग्रहण पूरे एशिया, आॅस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड, अंटार्कटिका, रूस, उत्तरी अमेरिका, दक्षिणी अमेरिका में दिखाई दिया।
सबसे पहले अरुणाचल प्रदेश के तेजू नगर में दिखाई दिया चंद्रग्रहण
भारत मौसम विज्ञान विभाग के अनुसार, मंगलवार (3 मार्च 2026) को पूर्ण चंद्र ग्रहण होगा। चंद्र ग्रहण भारत में भी दिखाई देगा। भारत में चंद्रग्रहण सबसे अरुणाचल प्रदेश के तेजू नगर में दिखाई दिया, यहां चंद्रोदय शाम 5 बजकर 3 मिनट पर हुआ।
चंद्र ग्रहण मुख्य रूप से 3 प्रकार के होते हैं
- पूर्ण चंद्र ग्रहण: पूर्ण चंद्र ग्रहण तब होता है जब पृथ्वी, सूर्य तथा चंद्रमा एक सीधी रेखा में होते हैं। इसके कारण पृथ्वी की छाया पूरी तरह से चंद्रमा को ढंक लेती है, जिससे पूरी तरह से चंद्रमा पर अंधेरा छा जाता है।
- आंशिक चंद्र ग्रहण: जब पृथ्वी की परछाई चंद्रमा के पूरे भाग को ढंकने की बजाय किसी एक हिस्से को ही ढंके तब आंशिक चंद्र ग्रहण होता है। इस दौरान चंद्रमा के केवल एक छोटे हिस्से पर ही अंधेरा होता है।
- उपछाया चंद्र ग्रहण: उपछाया चंद्र ग्रहण तब होता है जब पृथ्वी की छाया चंद्रमा के बाहरी भाग पर पड़ती है। इस तरह के चंद्र ग्रहण को देखना मुश्किल होता है।
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