रिलायंस इंडस्ट्री ने किया स्पष्ट कहा, हमने रूस से कच्चे तेल का आयात बंद किया
Business News Hindi (द भारत ख़बर), बिजनेस डेस्क : 2022 में जब रूस और यूक्रेन के बीच युद्ध शुरू हुआ था तो रूस ने विश्व के बहुत सारे देशों को रियायती दरों पर कच्चे तेल की सप्लाई आॅफर की थी। हालांकि बहुत कम देशों ने रूस के इस आॅफर को स्वीकार किया लेकिन भारत उन देशों में शामिल था जिन्होंने रूसी आॅफर स्वीकार किया था।
इसके बाद से भारत रियायती दरों पर मिलने वाले रूसी समुद्री कच्चे तेल का सबसे बड़ा खरीदार बनकर उभरा। तब से अब तक भारत ने रूस से 144 अरब यूरो मूल्य का कच्चा तेल खरीदा है। इस दौरान चीन रूस से 210.3 अरब यूरो का क्रूड आयात कर सबसे बड़ा खरीदार बन गया है। भारत दूसरे स्थान पर है। लेकिन अब अमेरिकी दबाव के चलते भारत ने रूस से कच्चे तेल के आयात में भारी कटौती कर दी है।
रिलायंस इंडस्ट्री का यह बयान आया सामने
रिलायंस इंडस्ट्रीज के रूस से कच्चे तेल नहीं खरीदने से जनवरी में रूसी तेल का आयात कई वर्षों के निचले स्तर पर आ सकता है। रिलायंस ने कहा, उसे रूस से तेल की कोई भी खेप जनवरी में मिलने की उम्मीद नहीं है। रिलायंस का यह बयान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की रविवार को दी गई उस चेतावनी के बाद आया है, जिसमें उन्होंने कहा था कि रूस से तेल खरीदने के कारण अमेरिका भारत पर आयात शुल्क और बढ़ा सकता है। रिलायंस ने सोशल मीडिया पर कहा, पिछले तीन सप्ताह से रिलायंस इंडस्ट्रीज की जामनगर रिफाइनरी में रूसी तेल की कोई खेप नहीं पहुंची है।
रिलायंस ने खरीदा सबसे ज्यादा कच्चा तेल
20 नवंबर, 2025 को रिलायंस ने कहा था कि उसने यूरोपीय संघ के प्रतिबंधों का अनुपालन करने के लिए गुजरात के जामनगर स्थित अपनी निर्यात आधारित रिफाइनरी में रूसी कच्चे तेल का उपयोग बंद कर दिया है। रिलायंस भारत में रूस से तेल खरीदने वाली सबसे बड़ी कंपनी थी। वह जामनगर के अपने तेल शोधन परिसर में कच्चे तेल को रिफाइंड करके पेट्रोल और डीजल जैसे ईंधनों में परिवर्तित करती थी। इस परिसर में दो रिफाइनरियां हैं।
इसलिए बढ़ गई भारत की मुश्किलें
इन खरीदों ने पश्चिमी देशों की ओर से कड़ी प्रतिक्रिया को जन्म दिया है, जिन्होंने रूस के ऊर्जा क्षेत्र पर प्रतिबंध लगाकर उसे निशाना बनाया है। उनका तर्क है कि तेल राजस्व से मॉस्को के युद्ध प्रयासों को वित्त पोषित करने में मदद मिलती है। अमेरिका ने पिछले साल रूसी तेल की भारी खरीद के लिए दंड के रूप में भारतीय वस्तुओं पर आयात शुल्क दोगुना करके 50 फीसदी कर दिया था।
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