“.bank.in” एक विशेष, सुरक्षित और अधिकृत डोमेन है, जो केवल भारतीय बैंकों के लिए ही उपलब्ध होता है। इस डोमेन का संचालन IDRBT द्वारा किया जाता है, जिसे NIXI और MeitY की अनुमति प्राप्त है। यह डोमेन पारंपरिक डोमेनों की तुलना में कहीं अधिक नियंत्रित, सुरक्षित और निगरानीयुक्त है, जिससे साइबर अपराधियों द्वारा नकली या क्लोन बैंकिंग वेबसाइट तैयार करना लगभग असंभव हो जाता है। इस बदलाव के साथ ग्राहकों के डेटा, लेनदेन और संपूर्ण डिजिटल बैंकिंग अनुभव की सुरक्षा और मजबूत होने की उम्मीद है।
इस विषय पर देश के ख्याति प्राप्त साइबर सुरक्षा विशेषज्ञ डॉ. पीयूष शर्मा ने आम जनता को जागरूक करते हुए कहा कि डिजिटल दुनिया में सुरक्षा का पहला नियम सतर्कता है। उन्होंने साफ शब्दों में चेतावनी देते हुए कहा,
“अब समय आ गया है कि हर व्यक्ति सिर्फ ‘.bank.in’ डोमेन पर ही भरोसा करे, क्योंकि असली और नकली बैंकिंग वेबसाइटों की पहचान का सबसे आसान और विश्वसनीय तरीका यही है।”
डॉ. शर्मा ने बताया कि साइबर अपराधी बिल्कुल असली जैसी दिखने वाली नकली वेबसाइटें तैयार कर लेते हैं और लोग अनजाने में उन पर अपनी संवेदनशील जानकारी साझा कर बैठते हैं। RBI के इस कदम से बैंकिंग वेबसाइटों की विश्वसनीयता पहचानना अब और आसान हो जाएगा, परंतु इसके सफल होने का सबसे बड़ा आधार जनता की जागरूकता ही है। उन्होंने अपील की कि लोग हमेशा बैंक की वेबसाइट खुद टाइप करके खोलें, किसी लिंक या WhatsApp मैसेज पर क्लिक न करें, QR कोड स्कैन करने से पहले दो बार सोचें, और OTP, UPI PIN, CVV, पासवर्ड जैसी जानकारी किसी भी व्यक्ति को न बताएं, चाहे वह खुद को बैंक अधिकारी ही क्यों न बताए।
आगे उन्होंने यह भी कहा,
“डिजिटल सुरक्षा का सबसे मजबूत स्तंभ तकनीक नहीं, बल्कि जनता की जागरूकता है। RBI ने सुरक्षा का ढांचा तैयार कर दिया है, अब नागरिकों को अपनी वित्तीय सुरक्षा के लिए खुद भी उतना ही सतर्क रहना होगा।”
RBI का यह निर्णय न सिर्फ डिजिटल बैंकिंग को अधिक सुरक्षित, पारदर्शी और विश्वसनीय बनाएगा, बल्कि भारत के साइबर सुरक्षा ढांचे को भी एक नई मजबूती प्रदान करेगा। हालांकि, असली सुरक्षा तब ही सुनिश्चित होगी जब लोग सही जानकारी रखें, सही डोमेन पहचानें और हर डिजिटल लेनदेन से पहले सावधानी बरतें।



