संसद के केंद्रीय हॉल में 80वां बजट देश के लिए अति महत्वपूर्ण
Budget 2026 Live Update (द भारत ख़बर), नई दिल्ली : आज देश की वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण जब देश का बजट संसद में पेश करेंगे तो वह नया रिकॉर्ड भी अपने नाम कर लेंगी। वे लगातार 9वीं बार देश का बजट पेश करने जा रही हैं। इतने लंबे समय तक देश की वित्तीय कमान अपने हाथ में रखना निर्मला सीतारमण की बड़ी उपलब्धि को दर्शाता है। वे सुबह 11 बजे संसद के केंद्रीय हॉल में 80वां केंद्रीय बजट 2026 पेश करेंगी।यह दूसरी बार है, जब कोई वित्त मंत्री रविवार को केंद्रीय बजट पेश कर रही हैं। इससे पहले यशवंत सिन्हा ने 28 फरवरी, 1999 (रविवार) को बजट पेश किया था।
केंद्र सरकार के सामने जनता की अपेक्षाओं पर खरा उतरने के साथ ही देश की जीडीपी विकास दर को बनाए रखना, राजकोषीय अनुशासन को बरकरार रखना, लंबे समय तक अमेरिकी टैरिफ से पार मुख्य चुनौतियां होंगी। इसके सथ ही लोगों को इस बजट से विनिर्माण क्षेत्र और रोजगार को बढ़ावा देने के उपायों को शामिल किए जाने की उम्मीद है। इस बार के बजट में विशेष तौर पर ऐसे उपायों पर नजर होगी, जो अमेरिकी टैरिफ समेत वैश्विक व्यापारिक संघर्षों से अर्थव्यवस्था को बचा सकते हैं।
इसलिए अहम है इस बार बजट
बजट ऐसी चुनौतियों के बीच पेश किया जा रहा है, जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 50% टैरिफ लगाया है, घरेलू मांग में स्थिरता बनी हुई है और वैश्विक अननिश्चितताएं आगे की राह को धूमिल कर ही हैं। जीएसटी की दरों में कटौती से रकारी राजस्व में कमी आई है, जिससे वित्त बी के पास अर्थव्यवस्था को सहारा देने के कल्प सीमित हो गए हैं।
वित्त मंत्री के सामने ये प्रमुख चुनौतियां
सरकार पर घरेलू स्तर पर उपभोग को बढ़ावा रोजगार सृजन में तेजी लाने और पूंजीगत बढ़ाने का दबाव है। हालांकि, वित्त मंत्री की ओर से आयकर और जीएसटी में भारी कटौती, बुनियादी ढांचे पर खर्च और भारतीय रिजर्व बैंक की तरफ से ब्याज दरों में की गई कटौती से भारतीय अर्थव्यवस्था को अब तक ट्रंप के टैरिफ का सामना करने में मदद मिली है। वित्त मंत्री के सामने सबसे बड़ी चुनौती ऐसे उपाय खोजने की होगी, जो इन तमाम बाधाओं के बीच विकास को गति दे सकें।
इस बात पर भी होगा सरकार का ध्यान
दूसरी ओर तेल की अंतरराष्ट्रीय कीमतों में भारी उछाल आने से पहले सीमित समय का लाभ उठाते हुए, वित्त मंत्री पेट्रोल और डीजल दोनों ईंधनों पर उत्पाद शुल्क बढ़ा सकती हैं। वह घरेलू और विदेशी निवेश को आकर्षित करने के लिए नियमों को सरल बनाने और संरचनात्मक सुधारों पर ध्यान केंद्रित कर सकती हैं।
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