कहा, टैरिफ के बाद अब पश्चिम एशिया तनाव ने कई देशों को चिंता में डाला
Business News Update (द भारत ख़बर), बिजनेस डेस्क : अमेरिका और ईरान युद्ध के चलते पश्चिम एशिया में बनी स्थिति पर चिंता जताते हुए आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा कि वैश्विक अर्थव्यवस्था वर्तमान में अभूतपूर्व चुनौतियों का सामना कर रही है। उन्होंने कहा कि पहले टैरिफ की उच्च दरों और अब लगातार चल रहे संघर्षों के कारण पैदा हुई भारी अनिश्चितता आर्थिक दृष्टिकोण पर भारी पड़ रही है। इन बढ़ती वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच अर्थव्यवस्था की सुरक्षा के लिए निरंतर निगरानी आवश्यक हो गई है।
भारत का आर्थिक विकास हो सकता है प्रभावित
आरबीआई गवर्नर ने कहा कि उच्च ऊर्जा कीमतों और होर्मुज जलडमरूमध्य में व्यवधान से आर्थिक विकास के प्रभावित होने की आशंका है। रिजर्व बैंक उभरती हुई स्थिति पर कड़ी नजर रखेगा और ऐसी नीतियां लागू करेगा जो अर्थव्यवस्था के सर्वोत्तम हित को प्राथमिकता दें। भारतीय रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) की हालिया बैठक के बाद गवर्नर संजय मल्होत्रा ने भारतीय अर्थव्यवस्था की स्थिति और भविष्य की चुनौतियों पर व्यापक चर्चा की गई।
वैश्विक भू-राजनीतिक तनावों और आर्थिक अनिश्चितताओं के बीच केंद्रीय बैंक ने स्थिरता और सतर्कता को अपनी नीति का मुख्य आधार बनाया है। नीतिगत ब्याज दरों से लेकर विदेशी मुद्रा भंडार और एनबीएफसी की स्थिति तक, इस बैठक में लिए गए प्रमुख फैसलों के बारे में जानें।
खुदरा महंगाई 4.6 प्रतिशत रहने का अनुमान
चालू वित्त वर्ष के लिए खुदरा महंगाई 4.6 प्रतिशत रहने का अनुमान जताया गया है। इसके साथ ही, हेडलाइन मुद्रास्फीति नियंत्रण में है और केंद्रीय बैंक के चार प्रतिशत के लक्ष्य से नीचे बनी हुई है। निकट भविष्य के लिए खाद्य पदार्थों की कीमतों का आउटलुक आरामदायक स्थिति में है। हालांकि, ऊर्जा की कीमतों में हालिया उछाल महंगाई के लिए एक संभावित जोखिम बनकर सामने आया है।
मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) ने सर्वसम्मति से न्यूट्रल रुख अपनाते हुए नीतिगत ब्याज दर पर यथास्थिति बनाए रखने का फैसला किया। इस फैसले के तहत, रेपो रेट बिना किसी बदलाव के 5.25 प्रतिशत पर स्थिर रखा गया है। तरलता प्रबंधन को लेकर रिजर्व बैंक भविष्य में सक्रिय और पूर्व-सक्रिय दृष्टिकोण अपनाएगा।
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