कोहरे-बादल के लिए इस्तेमाल होते थे ये मामूली सामान
Ramayan Budget, (द भारत ख़बर), मुंबई: इस साल कई सारी ऐसी फिल्में आई हैं और आने वाली भी हैं, जिसको लेकर काफी वक्त से चर्चा हो रही थी। इन फिल्मों में एक नाम रामायण का भी शामिल है, फिल्म अपने मेगा बजट, स्टारकास्ट को लेकर चर्चा में हैं। हाल ही में हनुमान जयंती के मौके पर भगवान राम का किरदार निभा रहे रणबीर कपूर का लुक रिवील किया गया है। इस टीजर के बाद से लोग रामानंद सागर की रामायण की याद कर रहे हैं, जो कि कई हजार गुना कम बजट में बनी थी।
4000 करोड़ में तैयार हो रही है नितेश तिवारी की रामायण

नितेश तिवारी की रामायण जहां 4000 करोड़ में तैयार हो रही है, वहीं साल 1987 में आई रामानंद सागर की रामायण की चर्चा तेज हो गई है। हालांकि, ये सीरीज भी उस समय की सबसे महंगी टीवी सीरीज थी, लेकिन आज के मुकाबले कई सारी सुविधाएं उस वक्त नहीं थी। रणबीर कपूर की रामायण का लुक सामने आने के बाद से कई लोगों का कहना है कि ये फिल्म के तौर पर सही है पर पौराणिक कहानी जैसा नहीं लग रहा है, इसमें संस्कृति नहीं दिख रही है। लोगों को इसमें हॉलीवुड टच लग रहा है।
कितना था रामायण का बजट
वहीं नई फिल्म की चर्चा के बीच रामानंद सागर की रामायण ने फिर से लाइमलाइट बटोर ली है। 39 साल पहले बनी रामायण के लिए मेकर्स के पास वीएफएक्स की सुविधा नहीं थी, लेकिन उन्होंने सारी चीजों के लिए जुगाड़ का इस्तेमाल किया था।
जानकारी के मुताबिक, उस वक्त रामायण 7 से 9 करोड़ रुपये में बनी थी, जिसे लोगों ने बहुत पसंद किया था। इस टीवी सीरीज में कुल 78 एपिसोड थे, बताया जाता है कि हर एपिसोड को तैयार करने में प्रोडक्शन का खर्च 9 लाख रुपए आता था।
मामूली चीजों से इफेक्ट
उस रामायण में अरुण गोविल ने भगवान श्रीराम और दीपिका चिखलिया ने माता सीता का किरदार अदा किया था, जिसे आज तक लोग याद करते हैं। सीरीज को फिल्माने के बारे में बात करें, तो उस वक्त कंप्यूटर और नई तकनीके नहीं थी, जिसके लिए रामायण में कई सारे इफेक्ट के लिए अगरबत्ती, रूई, ग्लास पेंटिंग जैसे कई सारे मामूली से सामान का इस्तेमाल किया जाता था। कमाल की बात है कि टीम की तरफ से इस काम को बखूबी तरीके से किया गया था।
कैसे तैयार होता था इफेक्ट
चीजों के इस्तेमाल की बात करें, अगरबत्ती को धुंध के लिए इस्तेमाल किया जाता है, इसके अलावा अगरबत्ती के धुएं से कोहरा, भोर का सीन तैयार किया जाता था। वहीं रुई को बादल, रात के सीन को दिखाने के लिए इस्तेमाल किया जाता था। ग्लांस पेंटिंग से बैकग्राउंड तैयार किया जाता था, जिसके इस्तेमाल से कभी-कभी दूसरी दुनिया का सीन भी तैयार होता था। शूटिंग के लिए मिनिएचर मॉडल भी बनाए जाते थे, जिससे पहाड़, स्वर्ग लोग सेट तैयार होता था।
POP से नकली बॉडी पार्ट
इतना ही नहीं SEG 2000 मशीन लांच हुई थी, जो कि युद्ध के सीन में इस्तेमाल होने वाले सभी चीजों को ग्रैंड तरीके से दिखाने के काम में आता था। युद्ध में या किसी की डेथ के सीन को दिखाने के लिए जिस नकली बॉडी पार्ट्स को स्क्रीन पर दिखाया जाता था, वो प्लास्टर आॅफ पेरिस से तैयार होता था। इन छोटी-छोटी चीजों से रामायण को तैयार किया गया था, जिसे लोगों को खूब सराहना हासिल हुई थी।
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