एक साल में भारत ने रिकॉर्ड 30 अरब डॉलर का ऐतिहासिक स्तर किया पार
Business News (द भारत ख़बर), बिजनेस डेस्क : दुनिया के कई दिग्गज बाजारों को पीछे छोड़ते हुए भारत अब दुनिया के लिए स्मार्टफोन विनिर्माण का एक बड़ा केंद्र बन चुका है। इसका सबसे बड़ा साक्ष्य वह आंकड़े हैं जो पिछले एक साल में सामने आए हैं। अमेरिकी टैरिफ वार और प्रतिकूल वैश्विक व्यापार परिस्थितियों के बावजूद भारत ने स्मार्ट फोन निर्माण और इसके निर्यात में उल्लेखनीय वृद्धि हासिल की। इस संबंधी जानकारी देते हुए केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि कैलेंडर वर्ष 2025 (जनवरी से दिसंबर) के दौरान देश का स्मार्टफोन निर्यात 30 अरब डॉलर के ऐतिहासिक स्तर पर पहुंच गया है।
इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादों के निर्यात में भी आई तेजी
स्मार्टफोन के अलावा पूरे इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर की तस्वीर भी बेहद सकारात्मक है। वैष्णव ने बताया था कि 2025 में भारत का कुल इलेक्ट्रॉनिक्स निर्यात 47 अरब डॉलर (करीब 4.15 लाख करोड़ रुपये) के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है। साल 2014-15 से तुलना करें तो पिछले 11 वर्षों में देश के इलेक्ट्रॉनिक्स निर्यात में 11 गुना और उत्पादन में 6 गुना की भारी वृद्धि दर्ज की गई है। इन आंकड़ों के दम पर इलेक्ट्रॉनिक्स अब भारत का तीसरा सबसे बड़ा निर्यात उत्पाद बन चुका है। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, इलेक्ट्रॉनिक वस्तुओं का कुल उत्पादन 2014-15 के 1.9 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर 2024-25 में 11.3 लाख करोड़ रुपये हो गया है। वहीं, इस अवधि में निर्यात 0.38 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर 3.3 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया है।
दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा मोबाइल उत्पादक देश भारत
वर्तमान में भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा मोबाइल उत्पादक देश है। 2014-15 में देश में जहां केवल 2 मोबाइल मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स थीं, वहीं अब इनकी संख्या बढ़कर करीब 300 हो गई है। पिछले 11 वर्षों में मोबाइल उत्पादन 0.18 लाख करोड़ रुपये से उछलकर 5.5 लाख करोड़ रुपये हो गया है, जबकि इसका निर्यात 0.01 लाख करोड़ रुपये (नगण्य) से बढ़कर 2 लाख करोड़ रुपये पर पहुंच गया है।
इस सेक्टर की तेज ग्रोथ का सीधा असर रोजगार सृजन और अर्थव्यवस्था पर दिख रहा है। लार्ज स्केल इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग के लिए लाई गई पीएलआई स्कीम ने 13,475 करोड़ रुपये से अधिक का निवेश आकर्षित किया है, जिसके परिणामस्वरूप 9.8 लाख करोड़ रुपये का उत्पादन हासिल हुआ है। इस औद्योगिक बूम ने देश में 25 लाख नई नौकरियां पैदा की हैं, जिनमें महिलाओं की मजबूत भागीदारी सुनिश्चित हुई है और युवाओं के लिए लंबी अवधि के कौशल विकास के अवसर बने हैं। साथ ही, सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों के लिए भी विकास के नए रास्ते खुले हैं।
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