दोनों के बीच होने वाले मुक्त व्यापार समझौते में कुछ बातों को लेकर अभी भी फंसा पेंच
India-EU Trade Deal (द भारत ख़बर), बिजनेस डेस्क : पिछले करीब 10 माह के अंदर भारत ने तेजी से अपनी वैश्विक व्यापार नीति में बदलाव किए हैं। पहले जहां भारत का व्यापार मुख्य रूप से कुछ देशों के साथ ही सिमटा हुआ था। वहीं अमेरिका द्वारा टैरिफ लगाने के बाद भारत ने तेजी से विश्व के कई अन्य बाजारों में अपनी पहुंच बनाई। जो व्यापार वार्ता पिछले एक दशक से लटकी हुर्इं थी उन्हें तेजी से पूरा किया गया और नई वार्ता शुरू की गई। इस दौरान भाारत ने जो सबसे अहम व्यापार समझौते किए उनमें ओमान, ब्रिटेन, न्यूजीलैंड के साथ थे।
वहीं भारत का सबसे बड़ा और अहम समझौता जोकि ईयू के साथ होना है उसपर लगातार वार्ता जारी है। इस प्रस्तावित मुक्त व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने की दिशा में बातचीत तेज हो गई है। एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि दोनों पक्ष शेष विवादित मुद्दों को सुलझाने के लिए लगातार संपर्क में हैं, ताकि इस महीने के अंत में होने वाले उच्चस्तरीय दौरे से पहले प्रगति सुनिश्चित की जा सके। भारत-ईयू शिखर सम्मेलन का आयोजन 27 जनवरी को किया जाएगा। इससे पहले 26 जनवरी को गणतंत्र दिवस परेड में शीर्ष यूरोपीय नेतृत्व मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होगा।
उद्योग मंत्री ने की थी दो दिवसीय विशेष यात्रा
हाल ही में वाणिज्य व उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने ब्रुसेल्स में मारोस सेफकोविक (ईयू आयुक्त-व्यापार और आर्थिक सुरक्षा) के साथ दो दिवसीय बैठक कर वार्ता की प्रगति की समीक्षा की। इन बैठकों को अहम माना जा रहा है क्योंकि दोनों पक्ष जल्द से जल्द समझौता पूरा करने के इच्छुक हैं। अधिकारी के अनुसार, प्रमुख विवादों में ईयू का कार्बन टैक्स और कुछ उत्पादों पर ड्यूटी में कटौती शामिल है। इसी कड़ी में वाणिज्य सचिव राजेश अग्रावल 6-7 जनवरी को ब्रुसेल्स में साइबन वेयंड (यूरोपीय आयोग की व्यापार महानिदेशक) से मुलाकात करेंगे।
दोनों पक्षों में हो चुकी है लंबी वार्ता
अब तक दोनों पक्षों में 16 दौर की वार्ता हो चुकी हैं। भारत कपड़ा और चमड़ा जैसे श्रम-प्रधान क्षेत्रों के लिए शून्य-शुल्क पहुंच की मांग कर रहा है। वहीं ईयू आॅटोमोबाइल, मेडिकल डिवाइस, वाइन, स्पिरिट्स, मांस और पोल्ट्री पर बड़े ड्यूटी कट्स के साथ मजबूत बौद्धिक संपदा व्यवस्था की मांग कर रहा है। बता दें कि जून 2022 में भारत और ईयू ने निवेश संरक्षण समझौते और भौगोलिक संकेतक पर अलग समझौते के साथ व्यापक एफटीए वातार्एं फिर शुरू की थीं। इससे पहले 2013 में बाजार खोलने के स्तर पर मतभेदों के चलते बातचीत ठप हो गई थी।
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