2019 के बाद चार अप्रैल को ईरानी तेल पहुंचेगा भारत, चार अप्रैल को गुजरात बंदरगाह पर पहुंचेगा पोत
Business News Update (द भारत ख़बर), बिजनेस डेस्क : पश्चिम एशिया तनाव के बीच हॉर्मुज स्टेÑट पिछले एक माह से बंद है। इससे विश्व का सबसे अहम समुद्री मार्ग बाधित है। इस मार्ग के बंद होने से तेल और गैस की आपूर्ति बाधित हो रही है। इसी के चलते भारत ने अपनी जरूरत पूरी करने के लिए अन्य विकल्प तलाशने शुरू कर दिए हैं। इन्हीं में से एक है। ईरान से तेल आयात करना। भारत ने 2019 के बाद से ईरान से कच्चा तेल आयात नहीं किया था। भारत को 2019 के बाद ईरान से कच्चे तेल की पहली खेप मिलने वाली है। जहाज ट्रैकिंग डाटा के अनुसार, ईरान के खार्ग द्वीप से छह लाख बैरल कच्चा तेल लेकर अफ्रामैक्स पिंग शुन जहाज गुजरात के वडीनार बंदरगाह की ओर आ रहा है। इसके चार अप्रैल तक पहुंचने की संभावना है।
इसलिए बंद किया था ईरान से तेल आयात
अमेरिका ने 2019 में ईरानी तेल पर प्रतिबंध लगा दिया था। पश्चिम एशिया संघर्ष के कारण तेल की बढ़ती कीमतों को नियंत्रित करने के लिए उसने इस प्रतिबंध को 30 दिनों के लिए हटाया है, जो 19 अप्रैल को खत्म होगा। बताया जा रहा है कि कई भारतीय रिफाइनरियों ने ईरान के साथ सौदा भी किया है। सूत्रों ने बताया कि समुद्र में जहाजों पर कुल 9.5 करोड़ बैरल ईरानी तेल मौजूद है। इसमें से भारत को 5.1 करोड़ बैरल भारत को बेचा जा सकता है।
भारत के तरल ईंधन के आरक्षित भंडार केवल 20 से 40 दिनों की जरूरतों को पूरा कर सकते हैं। दिल्ली में पीएचडीसीसीआई के हाइड्रोकार्बन शिखर सम्मेलन में पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस नियामक बोर्ड के सचिव अंजन कुमार मिश्रा ने कहा, हमारे पास तरल ईंधन का कुछ भंडार है, पर हम ऐसा भंडार नहीं बना सकते जो 6 माह चले। उन्होंने कहा, वैश्विक तनाव के बावजूद देश में जीवाश्म ईंधन की कोई कमी नहीं है। कुछ घबराहट है, पर तरल ईंधन की कमी नहीं है।
बांग्लादेश और श्रीलंका को भी दे रहे तेल
मिश्रा ने कहा, भारत ने इस संकट में बांग्लादेश और श्रीलंका दोनों को मदद दी है। आयात पर निर्भरता कम करने की मांगों पर मिश्रा ने कहा, घरेलू कच्चे तेल का उत्पादन बढ़ाना एक क्रमिक प्रक्रिया है और हालिया खोजों समेत सरकारी प्रयासों के बावजूद इसे तुरंत हासिल नहीं किया जा सकता। कच्चे तेल की कीमतों में तेज वृद्धि की चिंताओं पर मिश्रा ने कहा कि कोई भी वृद्धि अस्थायी होगी।
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