ईवी इंडस्ट्री ने ली चैन की सांस, चीन ने भारतीय कंपनियों का लाइसेंस देना किया शुरू
Business News (द भारत ख़बर), बिजनेस डेस्क : साल 2025 में भारत में इलेक्ट्रिक व्हीकल की डिमांड बहुत तेजी से बड़ी। दोपहिया से लेकर चार पहिया तक इलेक्ट्रिक व्हीकल खूब बने और खूब बिके। लेकिन इसी बीच टैरिफ विवाद के चलते भारत की रेयर अर्थ मैग्नेट (आरईएम) की सप्लाई बाधित हुई जिससे इलेक्ट्रिक वाहन निर्माता कंपनियों के माथे पर चिंता की लकीरें खिंच गई। लेकिन अब यह समस्या एक हद तक दूर हो गई है क्योंकि चीन ने भारतीय कंपनियों और भारत में काम कर रही विदेशी कंपनियों को ‘रेयर अर्थ मैग्नेट’ (आरईएम) निर्यात करने के लिए लाइसेंस जारी करना शुरू कर दिया है।
सरकारी अधिकारियों के मुताबिक, चीन के वाणिज्य मंत्रालय ने इन एप्लीकेशंस को प्रोसेस करना और मंजूरी देना शुरू कर दिया है। पिछले 6 महीनों से भारत सरकार चीनी अधिकारियों के साथ लगातार संपर्क में थी। जून में चीनी विदेश मंत्री वांग यी ने नई दिल्ली दौरे के समय विदेश मंत्री एस जयशंकर को भरोसा दिलाया था कि बीजिंग रेयर अर्थ मिनरल्स के निर्यात पर लगी पाबंदियों में ढील देगा।
रेयर अर्थ मटेरियल्स क्षेत्र में चीन का दबदबा
ग्लोबल लेवल पर रेयर अर्थ मटेरियल्स की माइनिंग में चीन की हिस्सेदारी करीब 70% और प्रोडक्शन में करीब 90% तक है। चीन ने हाल ही में अमेरिका के साथ बढ़ती ट्रेड वॉर के बीच 7 कीमती धातुओं (रेयर अर्थ मटेरियल) के निर्यात पर रोक लगा दी थी। चीन ने कार, ड्रोन से लेकर रोबोट और मिसाइलों तक असेंबल करने के लिए जरूरी मैग्नेट यानी चुंबकों के शिपमेंट भी चीनी बंदरगाहों पर रोक दिए हैं। ये मटेरियल आॅटोमोबाइल, सेमीकंडक्टर और एयरोस्पेस बिजनेस के लिए बेहद अहम हैं।
इसलिए बहुत जरूरी है आरईएम
रेयर अर्थ मैग्नेट आॅटोमोबाइल, इलेक्ट्रॉनिक्स, मेडिकल डिवाइसेज और डिफेंस इंडस्ट्री के लिए बेहद जरूरी होते हैं। इलेक्ट्रिक गाड़ियों (ईवी) की मोटर्स में इनका सबसे ज्यादा इस्तेमाल होता है। चीन इस समय दुनिया भर में रेयर अर्थ मैग्नेट के प्रोडक्शन और कैपेसिटी के मामले में सबसे आगे है। 4 अप्रैल से चीन ने इन मैग्नेट्स के एक्सपोर्ट पर पाबंदी लगा दी थी, जिससे पूरी दुनिया की सप्लाई चेन प्रभावित हुई थी।
अमेरिका के साथ विवाद का असर पड़ा
बीजिंग ने अमेरिका की ओर से चीनी प्रोडक्ट्स पर टैरिफ बढ़ाए जाने के जवाब में यह एक्सपोर्ट लाइसेंसिंग नियम लागू किए थे। इन नियमों के तहत चीनी सेलर्स को एक्सपोर्ट क्लीयरेंस तभी मिलता है, जब इंपोर्टर यह गारंटी दे कि इन मैटेरियल्स का इस्तेमाल डिफेंस से जुड़े कामों या ‘डुअल-यूज’ (दोहरे उपयोग) के लिए नहीं होगा। यह प्रोसेस काफी जटिल और लंबा है, जिसकी वजह से सप्लाई में देरी हो रही थी।
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