कट्टरपंथ, वैश्विक आतंकी समूहों से निपटने पर भी दिया गया जोर
PRAHAAR, (द भारत ख़बर), नई दिल्ली: केंद्रीय गृह मंत्रालय ने देश की पहली व्यापक राष्ट्रीय आतंकवाद-रोधी नीति प्रहार जारी की है। प्रहार नीति का मुख्य उद्देश्य देश को हर प्रकार के आतंकवादी खतरों से सुरक्षित करना है। इसमें रोकथाम, त्वरित कार्रवाई, कड़ी कानूनी प्रक्रिया और अंतरराष्ट्रीय सहयोग को एक साथ जोड़ा गया है। आठ पेज की इस नीति में आतंकी हमलों को रोकने पर खास जोर दिया गया है। साथ ही खतरे के मुताबिक तेज और संतुलित कार्रवाई की बात कही गई है।
केंद्र ने पहले पेज पर इंट्रोडक्शन और प्रहार का फुल फॉर्म बताया है। इंट्रोडक्शन में लिखा है, कुछ पड़ोसी देशों ने आतंकवाद को अपनी सरकारी नीति के एक औजार के रूप में इस्तेमाल किया है। फिर भी भारत आतंकवाद को किसी खास धर्म, जाति, देश या सभ्यता से जोड़कर नहीं देखता।
सरकार ने प्रहार में कहा है कि भारत हर तरह के आतंकवाद की हमेशा कड़ी निंदा करता रहा है। नीति में आतंकवाद को रोकने और उससे निपटने के लिए एक व्यवस्थित और खुफिया जानकारी पर आधारित स्ट्रक्चर बताया गया है। सरकारी एजेंसियों के बीच बेहतर तालमेल बढ़ाने पर जोर दिया गया है।
किसी भी आधार पर आतंकवाद को सही नहीं ठहराया जा सकता
नीति में कहा गया है कि आतंकी इंटरनेट का इस्तेमाल आपस में संपर्क, संगठन में भर्ती और जिहाद के महिमामंडन के लिए करते हैं। सरकार ने नीति में भारत की जीरो टॉलरेंस नीति दोहराई है। इसमें कहा गया है कि आतंकवाद को किसी भी धार्मिक, जातीय या वैचारिक आधार पर सही नहीं ठहराया जा सकता।
भारतीय नागरिकों और देश के हितों की रक्षा के लिए आतंकी हमलों को रोकना लक्ष्य
नीति में सरकार के साथ पूरे समाज की भागीदारी वाला तरीका अपनाने की बात कही गई है। आतंकवाद को बढ़ावा देने वाले कट्टरपंथ जैसे हालात को खत्म करने पर भी ध्यान देने की बात कही गई है। इसमें कहा गया है कि राष्ट्रीय आतंकवाद-विरोधी नीति का मुख्य मकसद भारतीय नागरिकों और देश के हितों की रक्षा के लिए आतंकी हमलों को रोकना है। इसके अलावा खतरे के मुताबिक तेज और संतुलित जवाब देना है।
आतंकवाद को बढ़ावा देने वाले कारणों को कम करना
नीति में कहा गया है कि आतंक के खिलाफ सरकार के अलग-अलग विभागों की ताकत को मिलाकर काम करना है। खतरों से निपटने के लिए मानवाधिकार और कानून आधारित प्रक्रियाएं अपनानी हैं। कट्टरपंथ समेत आतंकवाद को बढ़ावा देने वाले कारणों को कम करना और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आतंकवाद के खिलाफ प्रयासों में तालमेल बैठाना भी आतंकवाद-विरोधी नीति का हिस्सा है।
नीति में कहा गया है कि भारत सक्रिय और खुफिया जानकारी पर आधारित रणनीति अपनाता है। इसमें मल्टी एजेंसी सेंटर की अहम भूमिका है। इंटेलिजेंस ब्यूरो के तहत काम करने वाली जॉइंट टास्क फोर्स आॅन इंटेलिजेंस का भी जिक्र है, जो देशभर में रियल-टाइम खुफिया जानकारी साझा करने और संयुक्त कार्रवाई के लिए काम करते हैं।
अहम क्षेत्रों की सुरक्षा के लिए क्षमता बढ़ाई गई
प्रहार में सरकार ने कहा है कि भारत को पानी, जमीन और हवा तीनों मोर्चों पर आतंकी खतरे का सामना है। सीमा सुरक्षा बल आधुनिक तकनीक और उपकरणों से लैस हैं। बिजली, रेलवे, विमानन, बंदरगाह, रक्षा, अंतरिक्ष और परमाणु ऊर्जा जैसे अहम क्षेत्रों की सुरक्षा के लिए क्षमता बढ़ाई गई है।
नीति में अल-कायदा और आईएसआईएस जैसे वैश्विक आतंकी संगठनों के खतरे का भी जिक्र
नीति में अल-कायदा और आईएसआईएस जैसे वैश्विक आतंकी संगठनों के खतरे का भी जिक्र है। इसमें एन्क्रिप्शन, डार्क वेब और क्रिप्टो वॉलेट जैसी तकनीकों को भी चुनौती बताया गया है। इसमें कहा गया है कि रासायनिक, जैविक, रेडियोलॉजिकल, परमाणु, विस्फोटक और डिजिटल सामग्री तक पहुंच रोकना अभी भी बड़ी चुनौती है।
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