आज से वॉशिंगटन में शुरू होनी थी तीन दिवसीय वार्ता, व्यापार समझौते में हो सकती है देरी
US-India Trade Deal (द भारत ख़बर), नई दिल्ली : भारत और अमेरिका के बीच होने वाले द्विपक्षीय व्यापार समझौते में एक बार फिर से बाधा उत्पन्न हो गई है। अब अमेरिका द्वारा लागू किए गए 15 प्रतिशत टैरिफ को इसका मुख्य कारण माना जा रहा है। ज्ञात रहे कि पिछले दिनों अमेरिकी राष्टÑपति ने यह ऐलान किया था कि दोनों देशों के बीच समझौते को लेकर सहमति बन चुकी है और जल्द दोनों देश इसपर हस्ताक्षर करेंगे। उसके बाद भारत की तरफ से भी इस समझौते को लेकर पीएम से लेकर उद्योग व वित्त मंत्री तक के बयान आए थे। लेकिन दो दिन पहले अमेरिका द्वारा लागू किए गए नए टैरिफ इसके बीच में फिर बाधा डाल चुके हैं।
आज से दोनों पक्षों के बीच होनी थी वार्ता
दोनों देशों के मुख्य वातार्कारों की जो अहम बैठक 23 फरवरी से वॉशिंगटन में शुरू होने वाली थी, उसे अब आगे की तारीख के लिए टाल दिया गया है। इस बैठक में भारत की ओर से वाणिज्य मंत्रालय के संयुक्त सचिव दर्पण जैन मुख्य वातार्कार थे और भारतीय टीम तीन दिन तक अमेरिका में चर्चा करने वाली थी। इस बैठक का मकसद अंतरिम व्यापार समझौते के कानूनी दस्तावेज को अंतिम रूप देना था।
दरअसल, यह पूरा मामला अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के नए टैरिफ फैसलों से जुड़ा हुआ है। ट्रंप ने हाल ही में सभी देशों पर पहले 10% और फिर बढ़ाकर 15% तक आयात शुल्क लगाने की घोषणा की है। इससे पहले अमेरिका ने 2025 में भारत पर कुल 50% तक टैरिफ लगा दिया था, जिसमें से 25% पहले ही हटाया जा चुका है।
अगले महीने होना था ट्रेड डील पर हस्ताक्षर
दोनों देशों ने पहले ही इस साल मार्च तक अंतरिम ट्रेड डील पर हस्ताक्षर करने और अप्रैल से उसे लागू करने का लक्ष्य रखा था। यह समझौता भारत के लिए इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि अमेरिका भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है और भारत के करीब 18% निर्यात अमेरिका को जाते हैं। 2024-25 में दोनों देशों के बीच कुल व्यापार करीब 186 अरब डॉलर का रहा था
अब इस बात पर अटकी बातचीत
अमेरिका की सुप्रीम कोर्ट ने भी हाल में ट्रंप के पुराने टैरिफ फैसलों को अवैध बताया था और कहा था कि राष्ट्रपति ने अपने अधिकारों से ज्यादा कदम उठाए। इसी वजह से अब व्यापार नीति को लेकर स्थिति थोड़ी अनिश्चित बनी हुई है। अगर नई 15% ड्यूटी लागू होती है, तो यह पहले से लगने वाले आयात शुल्क के ऊपर लगेगी। यानी किसी उत्पाद पर अगर पहले 5% ड्यूटी है, तो कुल मिलाकर वह 20% हो जाएगी।
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