बोले, यदि नुकसान हुआ तो व्यक्तिगत होगा, लाभ हुआ तो देश का होगा
PM Modi News (द भारत ख़बर), नई दिल्ली : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने युवाओं को देश की प्रगति में भाग लेने का आह्वान किया है। उन्होंने कहा है कि यह युवा उद्योगपति ही हैं जो देश को विकास के शिखर तक ले जा सकते हैं। उन्होंने आत्मविश्वास के साथ युवाओं की जोखिम लेने की क्षमता की सराहना की, वह बदलते भारत की आर्थिक सोच को स्पष्ट रूप से दर्शाता है।
उनका यह कहना कि देश के लिए आवश्यक कामों में किसी न किसी को जोखिम उठाना ही होगा और यदि नुकसान भी हो तो वह व्यक्तिगत होगा जबकि लाभ देश का। दरअसल इसी दर्शन ने भारत के स्टार्टअप आंदोलन को नैतिक और वैचारिक आधार दिया है। स्वतंत्रता के बाद लंबे समय तक भारत का युवा वर्ग नौकरी खोजने वाला वर्ग माना गया लेकिन बीते एक दशक में यह सोच निर्णायक रूप से बदली है।
आज देश का युवा रोजगार सृजत कर रहा
आज भारत का युवा केवल रोजगार का आकांक्षी नहीं बल्कि रोजगार सृजन करने वाला बन रहा है। इस परिवर्तन के केंद्र में मोदी सरकार की स्टार्टअप इंडिया पहल ने वाकई निर्णायक भूमिका निभाई है, जिसे भारत के आर्थिक भविष्य की एक दूरदर्शी और रणनीतिक नींव के रूप में देखा जाना चाहिए। यही वह टर्निंग पॉइंट है जहां से भारत की नई उद्यमशील पीढ़ी और नीतिगत समर्थन की कहानी आगे बढ़ी।
चुनौती को अवसर में बदला
पीएम मोदी ने कहा कि दरअसल भारत आज उस निर्णायक जनसांख्यिकीय मोड़ पर खड़ा है, जहां उसकी लगभग दो-तिहाई आबादी कामकाजी आयु वर्ग में है। यही युवा शक्ति भारत के लिए सबसे बड़ा अवसर भी है और सबसे बड़ी चुनौती भी। यदि यह ऊर्जा नवाचार, उद्यमिता और उत्पादन में रूपांतरित होती है तो भारत वैश्विक आर्थिक शक्ति बनने की क्षमता रखता है लेकिन यदि इसे सही मंच और समर्थन न मिले तो यही असंतोष और बेरोजगारी का कारण बन सकती है।
अधिक स्टार्टअप्स टियर-2 और टियर-3 शहरों से उभरे
स्टार्टअप इंडिया की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यह केवल महानगरों तक सीमित नहीं रही। आंकड़ों के अनुसार, लगभग 50 प्रतिशत से अधिक स्टार्टअप्स टियर-2 और टियर-3 शहरों से उभरे हैं। यह तथ्य उस धारणा को तोड़ता है कि नवाचार केवल बड़े शहरों की बपौती है। छोटे शहरों और कस्बों के युवा आज एग्रीटेक, हेल्थटेक, एडटेक, फिनटेक और मैन्युफैक्चरिंग जैसे क्षेत्रों में वैश्विक स्तर की कंपनियां खड़ी कर रहे हैं। वित्तीय समर्थन के मोर्चे पर भी सरकार की भूमिका केवल नीतिगत नहीं बल्कि संरचनात्मक रही है। स्टार्टअप इंडिया सीड फंड स्कीम और फंड आॅफ फंड्स फॉर स्टार्टअप्स (एफएफएस) इसके प्रमुख उदाहरण हैं।
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