हरियाणा की राजनीति में उस समय हलचल मच गई जब भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व सहकारिता मंत्री मनीष ग्रोवर ने वर्ष 2018 के रोहतक नगर निगम मेयर चुनाव को लेकर चौंकाने वाला खुलासा किया। एक सामाजिक कार्यक्रम के दौरान दिए गए बयान में ग्रोवर ने दावा किया कि उस चुनाव में भाजपा की जीत एक सोची-समझी राजनीतिक रणनीति का परिणाम थी, जिसमें इंडियन नेशनल लोकदल (INLD) की अहम भूमिका रही।
ग्रोवर के इस बयान ने सात साल पुराने नगर निगम चुनाव को फिर से चर्चा के केंद्र में ला दिया है, खासतौर पर ऐसे समय में जब प्रदेश के तीन जिलों में नगर निकाय चुनाव प्रस्तावित हैं। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि यदि INLD की ओर से सांचित नांदल को उम्मीदवार नहीं बनाया गया होता, तो भाजपा मेयर चुनाव नहीं जीत पाती।
मनीष ग्रोवर ने बताया कि 2018 के मेयर चुनाव में भाजपा ने मनमोहन गोयल को उम्मीदवार बनाया था, जबकि कांग्रेस की ओर से सीताराम सचदेवा मैदान में थे। उन्होंने कहा कि यह मुकाबला सिर्फ उम्मीदवारों के बीच नहीं था, बल्कि असल लड़ाई पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा के राजनीतिक प्रभाव से थी। ग्रोवर के अनुसार, सीधे मुकाबले में भाजपा की स्थिति मजबूत नहीं थी।
उन्होंने बताया कि उस समय सतीश नांदल INLD में थे और उनके साथ उनके अच्छे संबंध थे। जब उन्हें जानकारी मिली कि INLD जैन समाज से किसी उम्मीदवार को टिकट देने पर विचार कर रही है, तो उन्होंने सतीश नांदल से आग्रह किया कि वे अपने बेटे सांचित नांदल को चुनाव मैदान में उतारें। ग्रोवर का दावा है कि यदि ऐसा नहीं होता, तो भाजपा की रणनीति प्रभावित हो जाती।
ग्रोवर ने यह भी कहा कि रोहतक नगर निगम क्षेत्र में 10 से 12 गांव ऐसे हैं, जहां भाजपा को पारंपरिक रूप से कम समर्थन मिलता रहा है। सांचित नांदल को चुनाव लड़ाने का उद्देश्य जीत से ज्यादा वोटों का विभाजन था। उन्होंने सतीश नांदल को यह कहकर मनाया कि जीत-हार से ज्यादा जरूरी है कि उनका बेटा एक राजनीतिक पहचान बनाए।
आखिरकार सांचित नांदल INLD के टिकट पर चुनाव लड़े और लगभग 35 हजार वोट हासिल किए। ग्रोवर के अनुसार, यदि ये वोट किसी अन्य उम्मीदवार को मिलते, तो भाजपा हार सकती थी। उन्होंने दावा किया कि भाजपा उम्मीदवार ने करीब 15 हजार वोटों के अंतर से जीत दर्ज की और बाद में सतीश नांदल व उनके परिवार को भाजपा में शामिल कराया गया।
मनीष ग्रोवर का यह खुलासा ऐसे समय सामने आया है, जब उनके बयान लगातार राजनीतिक विवादों में घिरे हुए हैं। हाल ही में उन्होंने कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री सुभाष बत्रा को “राजनीतिक रूप से खत्म” करार दिया था, जिस पर कांग्रेस ने तीखी प्रतिक्रिया दी।
इससे पहले ग्रोवर यह भी कह चुके हैं कि उन्हें जाट समुदाय का समर्थन नहीं मिला क्योंकि वे पंजाबी समुदाय से आते हैं और हुड्डा परिवार से नहीं हैं। उन्होंने यह टिप्पणी 2019 और 2024 के विधानसभा चुनावों में अपनी हार के संदर्भ में की थी।
नगर निगम चुनावों से पहले मनीष ग्रोवर के इस बयान ने रोहतक और आसपास के राजनीतिक गलियारों में नई बहस छेड़ दी है। माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर भाजपा, कांग्रेस और INLD के बीच सियासी बयानबाज़ी और तेज हो सकती है।

