दिल्ली : दिल्ली के पंचशील विहार में आज फिर एमसीडी का बुलडोजर एक्शन देखने को मिला। निगम की टीम ने इलाके में कई इमारतों के हिस्सों को अनधिकृत निर्माण बताकर ढहा दिया। इस कार्रवाई के दौरान स्थानीय निवासियों में आक्रोश और भय दोनों देखा गया।
नियमितीकरण की प्रक्रिया ठप
स्थानीय निवासियों का कहना है कि वर्षों से रेग्युलराइजेशन के नाम पर सरकार केवल आश्वासन देती रही, लेकिन कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।
रेग्युलराइजेशन की धीमी प्रक्रिया से लोग असमंजस में हैं।
जिन कॉलोनियों में मालिकाना हक देने का वादा किया गया था, वहां भी तोड़फोड़ जारी है।
सरकार की चुप्पी पर सवाल
इस कार्रवाई के बीच दिल्ली सरकार और केंद्र दोनों की चुप्पी पर सवाल उठ रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि एक तरफ सरकार नियमितीकरण की योजनाओं का प्रचार करती है, वहीं दूसरी तरफ बुलडोजर से घर तोड़े जा रहे हैं।
स्थानीय निवासियों की मांग
लोगों ने मांग की है कि:
रेग्युलराइजेशन प्रक्रिया को तेज किया जाए।
- डिमोलिशन/सीलिंग से प्रोटेक्शन दिया जाए।
सरकार को स्पष्ट नीति बनाकर जनता को राहत देनी चाहिए।
📌 फिलहाल, पंचशील विहार के लोग कानूनी दांवपेंच और सरकारी चुप्पी के बीच अपने घरों को बचाने की जद्दोजहद में जुटे हुए हैं।
दिल्ली की अनधिकृत कॉलोनियों का नियमितीकरण
दिल्ली में करीब 1,700 से अधिक अनधिकृत कॉलोनियां हैं, जहां लाखों लोग रहते हैं। इन कॉलोनियों को कानूनी दर्जा देने की प्रक्रिया को ही नियमितीकरण (Regularization) कहा जाता है।
✅ नियमितीकरण क्यों जरूरी है?
निवासियों को मालिकाना हक मिल सके।
पानी, सीवर, बिजली जैसी बुनियादी सुविधाएं बेहतर की जा सकें।
कॉलोनियों को मास्टर प्लान में शामिल किया जा सके।
अनधिकृत कॉलोनियों का नियमितीकरण सिर्फ एक सरकारी योजना नहीं, बल्कि लाखों लोगों के जीवन और घरों की सुरक्षा का सवाल है। इसकी सफलता पारदर्शी नीति और तेजी से क्रियान्वयन पर निर्भर करती है।