मार्च में ही शुरू हुई मई वाली गर्मी, टूटा 15 साल का रिकॉर्ड
Weather Update Today (द भारत ख़बर), नई दिल्ली : इस साल गर्मी कई रिकॉर्ड तोड़ चुकी है। मार्च अभी आधा भी नहीं गुजरा है और गर्मी मई जैसी महसूस हो रही है। हालात यह हैं कि देश में कई जगह हीटवेव शुरू हो चुकी है। मौसम विशेषज्ञ मौसम के इस तरह के मिजाज को लेकर चिंतित हैं। यह आशंका जताई जा रही है कि इस साल गर्मी अपने सभी रिकॉर्ड तोड़ सकती है। नई दिल्ली में 2011 के बाद पहली बार मार्च के पहले हफ्ते में पारा 35 डिग्री के पार पहुंचा है। दिल्ली के सफदरजंग आॅब्जर्वेटरी वेदर स्टेशन ने 35.7 डिग्री तापमान रिकॉर्ड किया। यह पिछले 15 साल में मार्च महीने में सबसे ज्यादा है। वहीं राजस्थान के बाड़मेर में तापमान 40 डिग्री के पार पहुंच गया है।
फरवरी के बाद मार्च में भी टूटा रिकॉर्ड
2026 की फरवरी पिछले 125 सालों में सबसे गर्म और सूखी रही। अब मार्च में भी मौसम के वही तेवर बरकरार हैं। मार्च की गर्मी ने दिल्ली में 50 साल का रिकॉर्ड तोड़ दिया है। राजस्थान, महाराष्ट्र और गुजरात के 14 शहरों में पारा 40 डिग्री के पार पहुंच गया है। मध्य प्रदेश में सबसे ज्यादा 39.2 डिग्री तापमान रतलाम में दर्ज किया गया। राजधानी भोपाल में भी तापमान 36.8 डिग्री रहा। उत्तर प्रदेश के बांदा में 38.4 डिग्री तापमान दर्ज किया गया है। गुजरात के अहमदाबाद, राजकोट, डीसा और कांडला में तापमान 41 डिग्री पहुंच गया है। मौसम विभाग ने कई जिलों में लू का अलर्ट जारी किया है। महाराष्ट्र में सबसे ज्यादा 39.6 डिग्री तापमान जलगांव में दर्ज किया गया।
इसलिए ज्यादा है इस बार गर्मी
मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि इस साल गर्मी के जल्दी शुरू होने और तेजी से तापमान में वृद्धि के पीछे कई कारण हैं। इनमें सबसे पहला कारण वेस्टर्न डिस्टर्बेंस का कम एक्टिव होना है। मौसम विभाग के अनुसार इस साल बहुत कम वेस्टर्न डिस्टर्बेंस एक्टिव हुए हैं। जानकारी के अनुसार नवंबर 2025 के बाद से भारत में कोई वेस्टर्न डिस्टर्बेंस एक्टिव नहीं हुआ। इससे ठंडक नहीं आ रही और तापमान तेजी से बढ़ रहा है। पिछले कुछ दिनों में देश के ज्यादातर हिस्सों में गर्म और शुष्क यानी बिना कोई नमी वाली हवाएं चल रही हैं। ये हवाएं राजस्थान, गुजरात, मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र के कुछ हिस्सों में गर्मी बढ़ा रही हैं। ज्यादातर हिस्सों में बारिश या बादलों का कोई नामोनिशान नहीं हैं। इससे सूर्य की सीधे किरणें धरती पर आ रही हैं, जो मौसम को गर्म कर रही हैं।
फसलों पर पड़ेगा प्रतिकूल असर
मौसम वैज्ञानिकों के साथ-साथ कृषि वैज्ञानिक भी इस तरह से लगातार बढ़ते तापमान से चिंतित हैं। बढ़ते तापमान का सीधा असर सरसों और गेहूं के उत्पादन पर पड़ेगा। हवा शुष्क होने और तापमान ज्यादा होने से इन दोनों के दाने सिंकुड सकते हैं और इससे उत्पादन में काफी ज्यादा कमी आ सकती है। जिसका सीधा असर किसानों की आय पर पड़ सकता है।
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