- एलपीए के मुकाबले जून में 101 प्रतिशत वर्षा होने का अनुमान
Monsoon-2026, (द भारत ख़बर), नई दिल्ली: मानसून की बारिश इस वर्ष सामान्य से 6 फीसदी कम रह सकती है। स्काईमेट वेदर ने यह पूवार्नुमान जारी किया है। रिपोर्ट के मुताबिक जून में सामान्य वर्षा होगी, लेकिन जुलाई से बारिश में गिरावट शुरू हो जाएगी। इसके बाद अगस्त और सितंबर में मानसून कमजोर पड़ेगा। निजी मौसम एजेंसी स्काईमेट वेदर के अनुसार विशेष तौर पर अगस्त से सितंबर में बारिश की कमी अधिक रहने की संभावना है।
जून-सितंबर, बारिश का सामान्य औसत 868.6 मिलीमीटर
स्काईमेट वेदर की रिपोर्ट के मुताबिक मानसून के चार माह में जून से सितंबर तक भारत में बारिश का सामान्य औसत 868.6 मिलीमीटर है। अधिकारियों का कहना है कि सामान्य से कम मानसून, मतलब बारिश 90 फीसदी से 95 फीसदी के बीच रहेगी। निजी मौसम एजेंसी ने इस साल मानसून की 94 प्रतिशत बारिश की संभावना जताई है।
इन राज्यों में सामान्य से कम बारिश का अनुमान
एजेंसी के मुताबिक मध्य और पश्चिम भारत के प्रमुख क्षेत्रों में बारिश कम रहने का अनुमान है। अगस्त से सितंबर के बीच हरियाणा, पंजाब, राजस्थान व मध्य प्रदेश में सामान्य से कम बारिश रहने का अनुमान है। लॉन्ग पीरियड एवरेज (एलपीए) की तुलना में जून में इस बार 101 प्रतिशत वर्षा होने का अनुमान है। इस महीने का एलपीए 165.3 एमएम है। सितंबर में एलपीए के मुकाबले 89 प्रतिशत बारिश होने का अनुमान है। इस माह का एलपीए 167.9 एमएम है। जुलाई में एलपीए के मुकाबले 95 फीसदी बारिश होगी। इस महीने का एलपीए 280.5 एमएम है। अगस्त में एलपीए के मुकाबले 92 फीसदी बारिश हो सकती है। इस माह का एलपीए 254.9 एमएम है।
जानिए कैसे माना जाता है कमजोर मानसून
एलपीए मतलब, मौसम विभाग ने 1971-2020 की अवधि के आधार पर दक्षिण-पश्चिम मानसून के लिए एलपीए को 87 सेमी (870 मिमी) तय किया है। यदि किसी वर्ष बारिश 87 सेमी से अधिक होती है, तो उसे सामान्य से ज्यादा माना जाता है। वहीं यदि कम हो तो इसे कमजोर मानसून माना जाता है।
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