- इंडिया न्यूज के साथ खास बातचीत में विपक्ष पर हमलावर दिखे सांसद कार्तिकेय
New Delhi News|द भारत ख़बर नेटवर्क | नई दिल्ली | लोकतंत्र की सबसे बड़ी पंचायत संसद देशहित में कामकाज और जरूरी चर्चाओं के लिए बनी है। यहां अनावश्यक शोर-शराबा और काम में बाधा डालना शोभा नहीं देता। पिछले कुछ सत्रों से यह देखने को मिला है कि संसद हंगामे की भेंट चढ़ती रही है। यह अलग बात है कि शीतकालीन सत्र में पहले से बेहतर काम हुआ। बावजूद इसके विपक्ष के लोग सदन को बाधित करने और उसके राजनीतिकरण की कोशिश में जुटे रहे। यह परिपाटी ठीक नहीं है। देश-प्रदेश के विभिन्न बिंदुओं पर *सांसद कार्तिकेय शर्मा* से इंडिया न्यूज हरियाणा की *एक्जीक्यूटिव एडिटर ज्योति सांगवान* ने विस्तृत बातचीत की। यह प्रस्तुत है उसके कुछ चुनिंदा अंशः

सवालः संसद के शीतकालीन सत्र में आपने कई मुद्दे उठाए। शीतकालीन सत्र कैसा रहा?
जवाबः इस साल शीतकालीन सत्र की प्रोडक्टिविटी 120 प्रतिशत रही। सभापति ने इसका आकलन किया और सदन को अवगत भी कराया। आखिरी दौर में सदन की कार्रवाई रात 1.30 बजे तक चली। पिछले कुछ सत्रों की तुलना में काफी बेहतर प्रदर्शन रहा। इस दौरान कई महत्वपूर्ण विधेयक पारित हुए और कामकाज सुचारू रूप से चला। इसका आने वाले समय में देश पर सकारात्मक असर दिखेगा। यह आंकड़ा दर्शाता है कि सदनों ने अपने निर्धारित समय से अधिक काम किया और महत्वपूर्ण विधायी कार्यों को निपटाया। लेकिन यह भी जरूर कहूंगा कि कुछ ऐसी घटनाएं थी जो संसद की परंपरा के तहत ठीक नहीं थी। जिस तरह सत्र के आखरी दिन में विपक्ष ने संसद के राजनीतिकरण का प्रयास किया, वह ठीक नहीं था। वह अफसोसजनक था।
सवालः वंदे मातरम व एसआईआर जैसे मुद्दों पर विपक्ष ने खूब शोर मचाया। आप इसे कैसे देखते हैं?
जवाबः जनता हमें चुनकर भेजती है ताकि हम उनके हितों की बात सदन में कर सकें। उनके मुद्दे उठा सकें। संसद की अपनी प्रक्रिया होती है, जिसमें शून्यकाल और प्रश्नकाल होता है। कामकाज और चर्चा के ये अलग-अलग माध्यम होते हैं, जिसके जरिए प्रतिनिधि जनता की बात सदन के पटल पर रखते हैं। सबको सवाल पूछने का हक होता है लेकिन उसकी भी एक प्रक्रिया होती है। एक सांसद को काफी समय लगता है अपने सवाल सदन में रखने के लिए। सदन में बैलेट के जरिये सवाल रखे जाते हैं और जब किसी सांसद का सवाल लगता है तो वह एक मौका होता है कि वह अपने क्षेत्र की, अपने लोगों की बात कर सकता है।
लेकिन जब संसद की कार्रवाई नहीं चलती खासकर विपक्ष के हंगामे की वजह से तो कहीं ना कहीं सांसद का प्रश्न पूछने का मौका तो चला जाता है लेकिन उससे ज्यादा उन लोगों का हक मारा जाता है जिन्होंने अपना प्रतिनिधि चुनकर भेजा है। चाहे राज्यसभा हो या लोकसभा, दोनों से ही देश को काफी उम्मीदें होती हैं, लेकिन विपक्ष हंगामा कर उन लोगों की उम्मीद पर पानी फेर देता है। मेरा मानना है कि संसद के अंदर लोगों को अपनी बात कहने का मौका मिलना चाहिए। चाहे पक्ष हो या विपक्ष। करोड़ों रुपए लगते हैं सदन को चलाने में। उसका हम सदुपयोग कैसे करें, यह समझना हर सांसद की जिम्मेदारी होती है।
सवालः वंदे मातरम पर सरकार ने चर्चा की। इससे विपक्ष को एतराज था। वंदे मातरम पर उठाए गए विपक्ष के सवाल पर आपका नजरिया क्या है?
जवाबः वंदे मातरम पर विपक्ष का कोई भी कुतर्क मान्य नहीं है। क्या वंदे मातरम पर कोई प्रश्न चिन्ह खड़ा कर सकता है? क्योंकि वंदे मातरम एक ऐसा मूवमेंट है जिसने देश के लोगों में राष्ट्र भावना की चेतना जगाने का काम किया। राष्ट्रवाद को परिभाषित किया। वंदे मातरम हमें हमारी भारत मां से जुड़ने और जोड़ने का पहला उदाहरण है। देश में इसका प्रचलन होना चाहिए, गुणगान होना चाहिए। मैंने तो यह भी कहा कि प्रतिदिन संसद की कार्रवाई आरंभ करने से पूर्व वंदे मातरम गाया जाना चाहिए। भारत सरकार ने बहुत ही सराहनीय कदम उठाया था, जब सिनेमाघर और यूनिवर्सिटी या फिर कोई भी कार्यक्रम शुरू करने से पहले हम सभी राष्ट्रगान गाते हैं। इसी तरीके से वंदे मातरम का भी गायन होना चाहिए। यह संसद के अंदर क्यों न हो, हर रोज क्यों न हो।
सवालः विपक्ष एसआईआर व चुनाव सुधार पर चर्चा की मांग कर रहा था। इसे लेकर हंगामा भी किया गया। चुनाव आयोग पर भी कई आरोप लगाए गए। विपक्ष के इस रवैये पर आप क्या कहेंगे?
जवाबः मैं इसे हास्यास्पद मानता हूं, क्योंकि जब विपक्ष जीतता है तो ईवीएम ठीक है। लेकिन जब विपक्ष हारता है तो ईवीएम पर सवाल खड़े कर दिए जाते हैं। यह तो वही बात है कि ना खाता ना बही, जो मैंने कहा वही सही। मैं यह मानता हूं कि अगर विपक्ष को इससे दिक्कत है तो जिन राज्यों में वह खुद चुनाव लड़ते हैं, उसका अगर उनके पक्ष में रिजल्ट आता है तो उसको भी उन्हें नहीं मानना चाहिए। इसे लेकर भी पूरा विपक्ष एकजुट नहीं है। केवल कांग्रेस और एक-दो पार्टियां हैं, जो इस पर शोर मचाते हैं। क्योंकि इंडी गठबंधन के भी कई पार्टियों और उन के शीर्ष नेतृत्व ने यह बात सदन में भी और बाहर भी कही है।
उदाहरण के तौर पर एनसीपी नेत्री सुप्रिया सुले ने कहा है कि मुझे ईवीएम पर पूरा भरोसा है। मैं उसी ईवीएम के द्वारा चुनकर आई हूं। यह बात सुप्रिया सुले ने संसद के पटल पर कही है। जम्मू कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने भी इसी तरह की बात कही है और अगर ऐसा होता भी तो क्या बीजेपी की 240 सीट आती। आज सोशल मीडिया का जमाना है। चुनाव में अगर कुछ गड़बड़ होता तो तो क्या वह बातें सामने नहीं आतीं?
यह विपक्ष की संकीर्ण मानसिकता का द्योतक है। इसका सबसे अच्छा जवाब गृह मंत्री ने सदन में दिया है। यदि कोई भी सवाल पूछता है तो मैं कहता हूं कि वह एक स्पीच है एक-डेढ़ घंटे की। आप उसे सुनिए। गृहमंत्री ने विस्तृत तौर पर विपक्ष का जवाब दिया और जानकारी भी दी। वोट चोरी एक तरीके से मानी जा सकती है, जहां कांग्रेस का अपना वोट प्रतिशत घटता जा रहा है तो वह उनके अपने कर्मों और उनकी नीतियों की वजह से और अगर कांग्रेस इसको वोट चोरी मानती है तो इसका कोई इलाज नहीं है।
सवालः गृह मंत्री की तरफ से कहा गया कि एसआईआर व चुनाव सुधार की प्रक्रिया कांग्रेस भी अपने समय में करवाती थी, लेकिन हमने कभी भी सवाल नहीं उठाए। आप क्या मानते हैं?
जवाबः देखिए, कांग्रेस कहती है कि त्रुटि को दुरुस्त किया जाए। जब उसे दुरुस्त किया जाता है तो उस पर कांग्रेस को आपत्ति भी होती है। मैं कहता हूं कि क्या एसआईआर की प्रक्रिया पहली बार चल रही है? निर्वाचन आयोग भारत सरकार या पार्लियामेंट के अधीन नहीं है। निर्वाचन आयोग एक स्वतंत्र आयोग है और उसके ऊपर सुप्रीम कोर्ट है। अगर विपक्ष को किसी भी प्रकार का शक है तो वह क्यों नहीं गए चुनाव आयोग के पास या सुप्रीम कोर्ट में।
विपक्ष ने अपनी बात वहां रखने का काम क्यों नहीं किया। हमारे देश का लोकतंत्र और न्यायपालिका बहुत मजबूत है। जब-जब इस तरह की बातें होती हैं तो न्यायपालिका बीच में आ जाती है। याद कीजिए, जब पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के इलेक्शन अमान्य घोषित किया गया था और छह वर्ष के लिए उन्हें चुनाव लड़ने से प्रतिबंधित किया गया था। तब यह फैसला भी न्यायालय के जरिए ही आया था। इसका उल्लेख गृहमंत्री ने किया कि 2014 से लेकर अब तक कांग्रेस ने आधिकारिक तौर पर एक भी शिकायत चुनाव आयोग में नहीं की है। आप गृहमंत्री का इंटरव्यू देख सकते हैं। गृहमंत्री ने इस पूरे मामले का विस्तृत उल्लेख किया है।
सवालः कांग्रेस तो हरियाणा विधानसभा चुनाव को भी कठघरे में खड़ी कर रही है। क्या कहेंगे आप?
जवाबः सबसे पहले तो कांग्रेस अपने कुनबे को समझाए, जो इंडी एलाइंस है। वही नहीं मानते कि ऐसी कोई बात है और जब कांग्रेस अपने सहयोगियों को ही नहीं मना पा रही तो देश कैसे मानेगा। यह फैसला जनता करती है और जनता जनार्दन है। जनता नीति और नियत दोनों को देखकर फैसला करती है। अब भाजपा नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में तीसरे कार्यकाल में है। 11 वर्ष से ज्यादा का समय हो चुका है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की नीतियों के क्रियान्वयन से फायदा सीधे तौर से प्रत्येक आम आदमी को हो रहा है।
चाहे आयुष्मान भारत हो, विश्व का सबसे बड़ा यूनिवर्सल हेल्थ कवरेज कार्यक्रम है। मुझे याद है जब तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा के समय में अमेरिका में यूनिवर्सल हेल्थ कवरेज देने की बात चल रही थी। वह बिल लेकर आ रहे थे तो उसकी कितनी चर्चा दुनिया में हुई। आज जब भारत के अंदर इसे लागू हुए इतने वर्ष हो चुके हैं और हर प्रत्येक व्यक्ति को इसका लाभ मिल रहा है तो हम खुद समझ सकते हैं कि हमारे देश की आबादी और अमेरिका की आबादी में कितना फर्क है।
उज्ज्वला योजना की बात करें या किसानों के खाते से लेकर महिलाओं के खाते की बात करें। हर व्यक्ति को सीधे तौर से फायदा देने की बात है, ताकि कोई भ्रष्टाचार ना हो सके। कोई भी व्यवस्था एक विजन और प्लान के तहत बदली जाती है। आज प्रधानमंत्री मोदी कह रहे हैं कि 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाना है तो उसका क्या रोड मैप है। यूं ही नहीं विकसित राष्ट्र बन जाता है, उसके लिए परिश्रम करना पड़ता है आमूल चूल परिवर्तन करने होते हैं और उसकी जो नींव है उसके लिए बहुत काम करना पड़ता है। यहां मैं एक उदाहरण देना चाहूंगा जब करोड़ों बैंक खाते खुले तो नकारात्मक सोच वाले लोगों ने कहा कि इससे क्या होगा। फिर प्रधानमंत्री ने डायरेक्ट ट्रांसफर की स्कीम लाई ताकि लोगों को सीधे अपने खातों में पैसे मिल सके।
सवालः बिहार चुनाव का परिणाम विपक्ष स्वीकार नहीं कर पा रहा है!
जवाबः बिहार चुनाव ही नहीं, किसी भी चुनाव का परिणाम विपक्ष स्वीकार नहीं कर पा रहा है। उसका कारण मैंने आपके सामने रखा है। जब तक विपक्षी अपनी नियत और नीति नहीं बदलेंगे तब तक देश की जनता उन्हें मौका नहीं देगी। क्योंकि देश की जनता समझ चुकी है कि उन्होंने उन्हें बहुत लंबे अरसे तक मौका दिया है। विपक्ष तुष्टिकरण की राजनीति कर रहा है, इसे जनता समझ रही है। जब भी केंद्र या राज्य सरकार कोई स्कीम लाती है तो उसका लाभार्थी हर समाज का पात्र व्यक्ति होता है। बिना किसी भेदभाव के सबको लाभ मिलता है। इसीलिए जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कहते हैं सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास तो इसका मतलब यही बनता है कि धरातल पर बिना किसी भेदभाव के हर स्कीम का क्रियान्वयन हो रहा है।
सवालः सत्र में मनरेगा को लेकर भी बयानबाजी हुई कि उसमें से गांधी जी का नाम हटाया जा रहा है।
जवाबः गांधी जी हमारे राष्ट्रपिता हैं और गांधी जी भगवान राम के सबसे बड़े अनुयाई थे। उनके अंतिम शब्द भी हे राम थे। हमारे हरियाणा में एक प्रथा है कि जब हम किसी से मिलते हैं, तो उनको राम-राम करके उनका अभिवादन करते हैं और जब जाते हैं तब भी राम-राम करते हैं। चाहे कोई किसी भी जाति, समाज या धर्म से हो। हरियाणा में यह प्रथा सभी में प्रचलित है। हमारी तो प्रथा है राम-राम करने की तो अगर हम हर काम में राम का नाम लेते हैं तो रोजगार मुहैया करवाने वाली इस स्कीम के अंदर अगर राम का नाम आएगा तो मुझे नहीं लगता कि किसी को आपत्ति होनी चाहिए। गांधी जी भी भक्त थे भगवान राम के, उनको भी मुझे नहीं लगता कोई आपत्ति होगी, कांग्रेस तुष्टिकरण की राजनीति करना चाहती है इसलिए उन्हें आपत्ति है।
सवालः सत्र की बात करें तो जब भी एक्टिव सांसदों की बात होती है तो उसमें सांसद कार्तिकेय शर्मा का नाम आता है। हवाई चप्पल पहनने वाला भी हवाई यात्रा करे, अधिकारों की रक्षा हो, नशे के खिलाफ मुहिम और युवाओं जैसे कई मुद्दे इस बार भी अपने उठाए हैं। क्या सोचते हैं?
जवाबः मैंने नागरिक उड्डयन मंत्री से यह सवाल किया था कि एयर सेवा एक पोर्टल मंत्रालय ने शुरू किया है जिसमें कोई भी दिक्कत या परेशानी अगर पैसेंजर को आती है तो उसकी समीक्षा हो सके और एक ऐसा प्लेटफॉर्म जहां वह अपनी शिकायत दर्ज कर सके। मैंने उनसे पूछा कि लोगों की उड़ान के अधिकार क्या होते हैं। एयरलाइन के अधिकार तो सबको पता है और इसका हवाला कई बार एयरलाइंस कंपनी द्वारा दिया जाता है।
क्योंकि इस सरकार की ऐसी नीतियां रही कि यह संभव हो पाया है कि ट्रेन में सफर करने वाला या हवाई चप्पल पहनने वाला भी हवाई जहाज का सफर कर सकता है। लेकिन उससे एक नई दिक्कत सामने आई है कि जो लोग गांव देहात से आते हैं, वह अपने क्षेत्र की अलग-अलग भाषाओं के कारण स्पष्ट हिंदी नहीं बोल पाते। एयरलाइंस स्टाफ कई बार समझ नहीं पाते तो उनके लिए कोई ऐसी स्कीम बनाई जाए ताकि पैसेंजर को अपने अधिकार पता हो। जैसे अगर कोई एयरलाइंस फ्लाइट रद्द करती है तो जो पैसेंजर ने पैसे देकर टिकट खरीदी है तो उसे पैसेंजर के क्या अधिकार हैं क्या उसे पैसेंजर को कैंसिलेशन चार्ज मिलेगा, क्या उन्हें होटल की सुविधा मिलेगी।
क्या उनको दूसरी एयरलाइंस में जाने का अधिकार है, या अगर कोई काउंटर तक पहुंच गया और उसे ऑन बोर्ड नहीं किया जा रहा तो उन लोगों के क्या अधिकार हैं। तो क्या फ्लाइट के अंदर आप होते हैं तो आपको पानी पीने का हक है या नहीं क्या आप वॉशरूम जा सकते हैं। उन लोगों के लिए हमें संवेदनशील होना चाहिए क्योंकि वो फर्स्ट टाइम फ्लायर्स भी हैं और शायद कहीं ना कहीं हम हमारे देश में काफी विविधताएं हैं। इस तरह की अनेक बातें हैं, जिसे मैंने सदन के पटल पर रखी और मंत्री ने भी विस्तार से जवाब दिया।
सवालः सत्र के अलावा आप ग्राउंड पर भी बहुत एक्टिव रहते हैं। एक काबिले तारीफ पहल है आपकी कैंसर को लेकर। खासतौर पर महिलाओं में ब्रेस्ट कैंसर है, सर्वाइकल कैंसर को लेकर। यह सब करने की प्रेरणा कैसे मिली?
जवाबः देखिए प्रधानमंत्री से प्रेरणा लेते हुए उनके जन्मदिन (17 सितंबर) को हमने एक प्रोग्राम शुरू किया नमो शक्ति रथ के नाम से। इसका उद्देश्य यह है कि जो गंभीर बीमारियां हैं हमारी मातृशक्ति के लिए हमारी बहनों और माताओं के लिए खासकर ब्रेस्ट कैंसर और सर्वाइकल कैंसर से जुड़ी हुई। इसके इलाज की व्यवस्था भारत सरकार और राज्य सरकार ने की है। अवेयरनेस के अभाव में लोग अपना इलाज नहीं करा पाते। हमने यह पहल की कि गांव देहात में जहां बीमारियों को छिपाया जाता है, उसका समय से पता लगाकर इलाज कराया जाए।
अगर गंभीर बीमारी सही समय पर पकड़ी जाए तो उसका इलाज हो सकता है। हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने लगभग 20 एंबुलेंस की शुरूआत की थी पंचकूला से। यह अलग-अलग गांव व क्षेत्रों में जाकर रोज एक हेल्थ कैंप लगाते हैं। 20 गाड़ियों का औचित्य यही है कि वो 20 गांवों में जाकर, आपके घर आकर स्कैन हो सके और वहीं पर उनको जानकारी मिल सके कि आगे क्या करना है। हमने एक बड़ा इनिशिएटिव हमने लिया था कि प्रधानमंत्री के 75वें जन्मदिन पर 75,000 महिलाओं का स्कैन करेंगे।
लेकिन जब हमने इसकी शुरूआत की और कैंपों में गया तो वहां माताओं बहनों की बात दिल को छू गई। वो थी कि माताओं ने बहनों ने कहा कि हमें इस बात का बहुत खुशी है कि हमें यह बीमारी नहीं है टेस्ट कराने के बाद। तो जो मेरे साथ मेरे सामने की बात है एक वृद्ध महिला थी उन्होंने कहा कि मैं अपनी बहुओं को लेने जा रही हूं अपना टेस्ट कराने के बाद क्योंकि कहीं ना कहीं मानसिक तौर पर भी एक स्ट्रेस होता है कि हाय मुझे यह बीमारी ना हो। कितनी राहत उन्हें मिल रही है। जिनका टाइमली डिटेक्शन हो जाए उनको भी फायदा है और बाकियों के भी मन से एक बोझ हट जाता है कि हम लोग स्वस्थ हैं। प्रधानमंत्री ने इस बात का आह्वान किया था कि अगर हमारी मातृशक्ति हमारी माताएं बहने स्वस्थ हैं तो हमारा परिवार स्वस्थ है। हमारा परिवार स्वस्थ है तो हमारा देश स्वस्थ है।
सवालः पीएम से मुलाकात आपकी होती है? हाल ही में आप उनसे मुलाकात करने पहुंचे थे। कितना स्नेह और आशीर्वाद मिला?
जवाबः जी, मेरा सौभाग्य है कि मुझे प्रधानमंत्री जी से मिलने का मौका मिला और उनका आशीर्वाद लिया। उनके सानिध्य में बहुत कुछ सीखने को मिलता है। राष्ट्रवाद की भावना, नेशन फर्स्ट कैसे हमें लोगों तक पहुंचाना चाहिए और कैसे सोचना चाहिए राष्ट्र के लिए, उसकी प्रेरणा मिलती है। कैसे वो इतने बिजी होने के बावजूद एक छोटी से छोटी चीज के लिए समय निकालते हैं और लोगों को मिलते हैं। उनकी चिंता करते हैं। यह वाकई एक बहुत ही प्रेरणादायक मीटिंग होती है। जब भी हमारे को उनके साथ कुछ भी बात करने का मौका मिले। यह सीखने को मिलता है कि कैसे अपने सार्वजनिक और राजनीतिक जीवन में लोगों तक पहुंच कायम रख सकें। लोगों तक उसका फायदा पहुंचा सके उसके लिए बहुत अच्छी प्रेरणा मिलती है।
सवालः गृहमंत्री अमित शाह की स्पीच का आप जिक्र कर रहे थे। उनसे भी अक्सर आप मिलते हैं। किस तरह की बातें होती हैं? हरियाणा को लेकर भी बातें होती हैं!
जवाबः मैं कहूंगा जब भी मुझे उनसे मिलने का सौभाग्य मिलता है तो हमेशा कुछ ना कुछ नया सीखने का मौका मिलता है। कुछ ना कुछ नया करने की चेतना जागती है। कुछ ना कुछ नया करने का एक एक नया आश्वासन मिलता है। नई एनर्जी मिलती है जिससे आप जाकर लोगों के बीच में काम करें।
सवालः आप हरियाणा से ही आते हैं। बड़े राजनीतिक परिवार से आते हैं। वर्तमान में हम बात करें नायब सरकार की जो एक साल से ज्यादा समय पूरा कर चुकी है। कैसे आप देख रहे हैं सरकार के कामकाज को?
जवाबः देखिए, हमारे मुख्यमंत्री जी एक ऐसे मुख्यमंत्री हैं जो लोगों के बीच में से आए हैं और लोगों की चिंता करते हैं। उनका जो स्वभाव है एक नॉनस्टॉप सीएम के तौर पर सुबह हो या रात हो कभी भी किसी को मिल लें कभी भी कोई उनसे संपर्क कर ले अपनी समस्या उनके सामने रख ले ये एक बहुत बड़ी उपलब्धि है। पिछले एक साल की नहीं मैं तो बल्कि 18 महीने के कार्यकाल की बात करूंगा। क्योंकि जो उनका 6 महीने का कार्यकाल पहली टेन्योर में भी रहा। उसके जो उन्होंने वादे किए थे सरकार में आते ही उनको पूरा करने का काम किया।
पहली कलम से अपनी शपथ लेने से पहले उन्होंने जो वादे किए थे नौकरियां देने का काम किया। उसके साथ-साथ प्रदेश को उस दिशा और दिशा में ले जा रहे हैं जैसे प्रधानमंत्री जी ने 2047 तक भारत को एक विकसित राष्ट्र के तौर पर स्थापित करने की बात की है। मुझे लगता है कि मुख्यमंत्री जी भी उसी रोड मैप पर चलते हुए हरियाणा को एक विकसित प्रदेश के रूप में स्थापित करने के लिए सर्वव्यापी काम कर रहे हैं।
सवालः केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल करीब नौ साल तक सीएम रहे। उनसे भी आपके काफी करीबी रिश्ते हैं। गे आप अगर वर्किंग स्टाइल की बात करें क्या अंतर देखते हैं?
जवाबः देखिए, मैं मानता हूं कि मनोहर लाल जी ने जो अमूल-चूल परिवर्तन लेके आए उसके लिए हरियाणा वासी उनके आभारी रहेंगे। उन्होंने एक बहुत बड़ी कैंपेन शुरू की थी पची-खर्ची को खत्म करने की। मेरिट के ऊपर नौकरियां दी जाए न कि किसी क्षेत्रवाद के तहत या किसी और कारण के तहत। उसका फायदा हर गांव के पढ़े-लिखे गरीब और आम आदमी को मिल रहा है। मैं जब भी घूमता हूं तो हर गांव में मुझे यह सुनने को मिलता है कि यहां पर हमारे 10 बच्चे लग गए, हमारे 15 बच्चे लग गए, हमारे 11 बच्चे लग गए और मेरिट पर लग गए।
बिना किसी पर्ची के-बिना किसी खर्ची के। यह बहुत बड़ी बात है क्योंकि युवा पीढ़ी के अंदर इसके अंदर एक अच्छा संदेश गया। इतना ही नहीं उनकी गवर्नेंस स्टाइल की भी बात करूं तो जैसे ट्रांसमिशन लॉसेस खत्म करने की बात करें। उनके पास अब केंद्र में बिजली विभाग है। लोग अधिकांश तौर पर जाने जाते हैं बिजली के बिल माफ करने के लिए। यहां पर एक ऐसे व्यक्ति थे मुख्यमंत्री जिन्होंने कहा कि नहीं। आप अपनी बिजली बिल दीजिए।
जबकि क्योंकि हमारे देश के अंदर यह भावना और चेतना जागी कि हमें भी अपना भुगतान करना है बिलों का। उसका फायदा आज हरियाणा को मिल रहा है कि आप इलेक्ट्रिसिटी सरप्लस हैं। आपके ट्रांसमिशन लॉसेस सबसे कम है देश के अंदर और कहीं ना कहीं आपको बिजली 24 घंटे मिलती है जो आज से 10-15 साल पहले या 20 साल पहले आपको कुछ घंटों के लिए बिजली आया करती थी। यह चीजें एक नींव रखने का काम किया। उन्होंने अपने कार्यकाल में जिसको नायब सिंह सैनी जी आगे अगले लेवल पर पटल पर ले जाने का काम कर रहे हैं।
सवालः विरोधी कुछ भी कहते हैं, सीएम साहब हंसते रहते हैं। कई बार लोगों के साथ सेल्फी के लिए खुद ही मोबाइल ले लेते हैं। सीएम हाउस के दरवाजे सबके लिए खोल दिए गए हैं। क्या कहेंगे आप?
जवाबः देखिए, लोग हैं, कुछ तो कहेंगे। नहीं हंसते हैं तो कहेंगे कि आप हंसते क्यों नहीं हैं? आप हंसते हैं तो कहेंगे आप हंसते क्यों हैं? मैं कहता हूं इससे अच्छी बात क्या हो सकती है कि हमारे प्रदेश के मुखिया हंसकर लोगों से बात करते हैं। हंसकर उनसे मिलते हैं और उनकी समस्या संवेदनशीलता से सुनते हैं। अगर उनको इस इससे भी आपत्ति है तो मैं समझता हूं कि उनकी सोच ऐसी है। विरोधी लोगों को अपनी सोच बदलनी चाहिए।
सवालः संसद के शीतकालीन सत्र की हमने बात की। हरियाणा के शीतकालीन सत्र पर आते हैं। अविश्वास प्रस्ताव। संख्या बल कोई डाउट नहीं इस बात में। सरकार बहुमत से है। तीन निर्दलीय चुनकर आए थे। वह भी सरकार के साथ गए। ऐसे में अविश्वास प्रस्ताव लाना। इसके आप क्या मायने देखते हैं?
जवाबः देखिए, लोकतांत्रिक प्रक्रिया में जनता फैसला करती है कि कौन पक्ष में बैठेगा कौन विपक्ष में। जनता ने अपना जनादेश दिया और मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी जी के नेतृत्व में भाजपा की सरकार बनी। सरकार के पास पूर्ण बहुमत है। इस सरकार के प्रति जनता का विश्वास है। विपक्ष के पास कोई अधिकार नहीं है अविश्वास प्रस्ताव लाने का। मैं मानता हूं कि एक राजनीतिक तरीका है अपनी बात कहने का। मैं ये क्यों कह रहा हूं क्योंकि अगर ऐसा नहीं है तो उसमें जो हमारी कारवाई है विधानसभा की लोगों का टाइम वेस्ट करना और जब अविश्वास प्रस्ताव आया तो विपक्ष वॉकआउट कर गए।
यह कहीं ना कहीं दर्शाता है कि किस तरीके की राजनीति विपक्ष कर रहा है। अब उनके पास मुद्दे नहीं बचे हैं तो वह इस तरह की राजनीति कर रहे हैं। मैं आपके माध्यम से सवाल पूछना चाहता हूं कि जब अविश्वास का कोई प्रश्न ही नहीं था, जो विश्वास प्रदेश की जनता ने व्यक्त किया है और उसके अंदर कोई अविश्वास का प्रश्न ही नहीं उठता।
सवालः इंडिया न्यूज ने कुछ कांग्रेस नेताओं से बात की तो उनका कहना था कि सरकार तो चुरा ली गई थी। जनभावना के खिलाफ ये सरकार बनी और जनभावना सरकार के खिलाफ है। लोगों का विश्वास खो चुकी है। सरकार इसलिए हम लेकर आए अविश्वास।
जवाबः अगर ऐसी बात थी तो जो जब चुनाव के रिजल्ट आए तो उसके बाद अविश्वास प्रस्ताव लाना चाहिए था। अब एक साल बाद क्यों? क्योंकि उनके पास मुद्दे खत्म हो चुके हैं। असली कोई मुद्दे हैं नहीं। जनता के मुद्दे उनको उठाने चाहिए। लेकिन इनमें इस अविश्वास प्रस्ताव में एक ही चीज साफ आती है कि शायद विपक्ष मुद्दाहीन हो।
सवालः आपको हरियाणा चुनाव में क्या लगा क्योंकि आप भी बेहद सक्रिय थे और लोगों के बीच आप गए कैंपेनिंग भी की गई। अब जब लोकसभा में हाफ हुई बीजेपी कांग्रेस पूरे कॉन्फिडेंस में थी कि हमने लोकसभा में हाफ कर दिया, विधानसभा में तो साफ कर देंगे। कैसे यह बहुत बड़ा परिवर्तन हुआ कि बीजेपी की सरकार बन गई फुल मैंडेट के साथ।
जवाबः ये बात सही है कि बीजेपी हाफ हुई थी लेकिन यह बात भी सही है कि उसके बाद कांग्रेस हाफ हुई। मैं कहता हूं कि यह कांग्रेस की अपनी नीतियां हैं। अपनी उनकी आंतरिक कला है। वो जिम्मेदार है इसके लिए। क्योंकि वह जिस तरह की राजनीति करना चाहते थे प्रदेश ने उस उस तरह की राजनीति को नकार दिया। लोगों ने अपनी आस्था मोदी जी और नायब सिंह सैनी जी के नेतृत्व में व्यक्त किया। इसीलिए पूर्ण बहुमत से सरकार आई। वह भी तीसरी बार। हरियाणा की जनता ने इतिहास बनाने का काम किया। मुझे लगता है कि अगर कांग्रेस सही मुद्दों पर चुनाव लड़ती। लोगों कांग्रेस के कार्यकाल की याद आई। आखिर में लोगों ने मन बना लिया कि हमने जिनको देखा है, परखा है। जिन्होंने हमारे लिए काम किया है, हम उन्हीं को वोट देंगे ।
सवालः ऐसे में राहुल गांधी के आरोप वोट चोरी के है। कांग्रेस नेताओं से भी हमने पूछा कि साल भर हो चुका है चुनाव परिणाम आए। हरियाणा कांग्रेस के किसी नेता ने यह नहीं कहा कि वोट चोरी हुई। राहुल गांधी अलग से स्क्रिप्ट क्यों लाते हैं? पहले बातचीत नहीं होती है क्या?
जवाबः अगर वोट चोरी की बात होगी और इलेक्शन रिफॉर्म की बात होगी तो आपको थोड़ा इतिहास में जाना पड़ेगा। ईवीएम कौन लाया? कांग्रेस और यूपीए के कार्यकाल में ईवीएम आई। उसके बाद यूपीए दो बार लगातार चुनाव जीती। कभी कोई प्रश्न ईवीएम पर नहीं उठाया गया। उसके बाद आप देखिए अगर आप इतिहास में जाएंगे तो एक समय था जहां बाहुबलियों के तहत फैसला होता था कि चुनाव के परिणाम क्या नहीं। बूथ कैप्चरिंग सिर्फ बूथ कैप्चरिंग ही नहीं होती थी, उसमें जहां पर दूसरे पक्ष की ज्यादा वोटें डलती थी तो उसमें इंक डाल दी जाती थी।
या फिर तेजाब या पानी डाल दिया जाता था। वोट खराब कर दी जाती थी। अगर आपको मुझे अगर ठीक स्मरण हो रहा है तो हेमवती नंदन बहुगुणा के चुनाव में जो तब (उत्तराखंड) उत्तर प्रदेश होता था। गढ़वाल में करीब 2 साल तक चार बार लगातार चुनाव की प्रक्रिया हुई और फिर भी परिणाम नहीं निकल पा रहा था। ये थी असलियत मैनुअल वोटिंग की। कुछ आंकड़ों की बात हो रही थी सदनों में। मैं यह बताना चाहता हूं जिन देशों की 8 करोड़ या 15 करोड़ की आबादी है। उनकी तुलना आप भारत के साथ नहीं कर सकते हैं। हमें प्रोग्रेस करना है।
रिग्रेसिव नहीं होना है। पिछले चुनाव में लगभग 97 करोड़ वोटर्स थे और आने वाले चुनाव में 100 करोड़ से ज्यादा वोटर्स हो जाएंगे। अगर वो चीज मैनुअली हुए तो आप समझिए कि 8 से 10 दिन तो गिनती की प्रक्रिया चलेगी। एक तरफ तो यह कहते हैं कि भाजपा हमेशा इलेक्शन मोड में रहती है। आप इतिहास उठा के देख लीजिए। चाहे मैं गया के चुनाव की बात करूं या गढ़वाल के चुनाव की। एक ही बात निकल के आती है बार-बार कि जब भी ऐसी व्यवस्था थी तो उसका दुरुपयोग किया गया।
सवालः विकसित भारत का विजन लेकर चल रही है सरकार। विपक्ष यह भी कहता है जिसका आप भी जिक्र कर रहे थे। कुछ उदाहरण आपकी ओर से दिए गए। बहुत सारे देशों में ईवीएम को बंद कर दिया गया। विपक्ष अगर चुनावी प्रक्रिया पर यकीन नहीं करता तो विपक्ष की बात को मानते हुए बीजेपी को भी आगे आना चाहिए कि ईवीएम बंद कर दी जाए। निर्वाचन आयोग को ऐसा सुझाव दिया गया?
जवाबः यह फैसला निर्वाचन आयोग का है, बीजेपी का नहीं। निर्वाचन आयोग ने स्वतंत्रता से यह फैसला यूपीए की सरकार में लिया था। इस फैसले का कोई मतलब सरकार से है ही नहीं। मैं तो आपको यह बताना चाहता हूं कि निर्वाचन आयोग इस तरीके से तो पार्लियामेंट के अधीन नहीं है। इसलिए एसआईआर पे चर्चा नहीं हुई, इलेक्शन रिफॉर्म पे चर्चा हुई सदन के अंदर। आप ये बात क्यों नहीं समझते हैं कि जो ईवीएम की बात है इंडिया अलायंस खुद ही इसको लेकर एक मत नहीं है। तो बीजेपी का या किसी और का इसके ऊपर बोलने का क्या मतलब बनता है?
सवालः हरियाणा पर हम आते हैं। आपने कहा कि नीति और नियति की बात है कि आपकी नियत कैसी है? कांग्रेस के लिए एक फैक्टर आप ये मानते हैं। बीजेपी के लिए आप मानते हैं कामकाज बहुत किया गया है। नीतियां जनहित में हैं। क्या ये एक बड़ा कारण है कि एंटी इनकंबेंसी जैसा कुछ नहीं दिखता है हरियाणा में?
जवाबः एंटी इनकंबेंसी जरूर है, होती है क्योंकि आप इतनी बड़ी आबादी में हर एक व्यक्ति तो खुश नहीं होता। लोग आकलन करते हैं। आपने किस नियत से और किस नीति से काम किया। इसलिए मैंने नीति और नियत की बात की थी। क्या आपकी नियत सही थी और क्या आपने अपनी नीतियां अपनी नियत के हिसाब से बनाई और उनका कार्यान्वयन कैसे हुआ? मैं मानता हूं कि एंटी इनकंबेंसी जरूर होती है। राजनीति में ये एक रियलिटी है लेकिन अधिकांश लोग आपकी नियत नियति और कार्यान्वयन से खुश हैं। इसीलिए आप बार-बार चुन के आते हैं। ये एक बड़ी वजह ये बड़ी वजह है कि भाजपा की सरकार बन रही है। मैं आपको गुजरात का उदाहरण देना चाहता हूं। मैं उत्तर प्रदेश का उदाहरण देना चाहता हूं और नई कीर्तिमान स्थापित हरियाणा जैसे प्रदेशों में तो हुए ही रहे।
सवालः आपने बहुत सारी सरकारों को देखा। मनोहर लाल और नायब सिंह सैनी के कामकाज के हिसाब से कार्तिकेय शर्मा का फेवरेट सीएम कौन रहे?
जवाबः मैं ये तो नहीं कह सकता कि कौन फेवरेट? लेकिन मैं यह जरूर कहूंगा कि सबकी अपनी-अपनी बहुत विशेषताएं हैं। मनोहर लाल जी के कार्यकाल में भी उन्होंने एक अलग तरीके से अलग अप्रोच कर प्रॉब्लम को सॉल्व करना शुरू किया, जिसका मैंने विस्तृत उल्लेख किया। उसी तरीके से नायब सिंह सैनी जी ने भी अब एक अलग तरीके से उन प्रॉब्लम्स को अप्रोच करने का काम किया।
उनकी विशेषता यह है उनकी आत्मीयता, उनका एक्सेसिवलनेस कि वो कभी भी किसी को मिल सकते हैं। कोई भी उनसे मिल सकता है। मैं बीते दिनों पंचकूला जिले की ग्रीवेंस कमेटी की मीटिंग से आया। यह जो एक पहल है सरकार द्वारा कि जो बड़े अधिकारी हैं, सरकार के मंत्री हैं, सांसद हैं, विधायक हैं, दूसरे अन्य पदाधिकारी हैं वह लोग जाएं अपने क्षेत्र के अंदर लोगों की समस्याएं सुने। लगातार इस तरह के कार्यक्रम हों ताकि ऐसे ऐसे मंच बनाए जाएं जहां आम आदमी आकर अपनी बात रख सके। उसकी समीक्षा करते हुए उसका वहीं पर स्पॉट पर समाधान निकाल निकाला जा सके। यह सब विशेषताएं हैं आपकी लीडरशिप की और नेतृत्व की कि उन्होंने ऐसी पावर और अथॉरिटी दी है। वो चाहते हैं कि लोग सरकार के पास ना आए सरकार लोगों के पास जाए।
सवालः इनेलो भी कहती है कि हम लोग कार्यक्रम चलाते थे सरकार आपके द्वार। फिलहाल जो हालात हैं आप क्या देखते हैं। हरियाणा में आगे क्या होगा?
जवाबः सबका अपना-अपना महत्व है। अपनी विशेषताएं हैं। सारी पार्टियां अपना एजेंडा लेकर लोगों के बीच में जाती हैं और यह उनका अधिकार है कि वह अपनी बात रख सकें। फैसला जनता करती है। हर पांच साल में यह मौका आता है कि हमने क्या किया, क्या नहीं किया। उसका लेखाजोखा लेकर लोगों के बीच में जाएं। हां, यह जरूर है कि सोशल मीडिया के जमाने में आज अकाउंटेबिलिटी बढ़ गई है और कहीं ना कहीं लोगों की आपसे ज्यादा जवाबदेही है। मैं आपको उदाहरण देता हूं। जब मैं सांसद बना। लगभग 3 साल होने वाले हैं तो मैं पहला सांसद बना जिसने आते ही सवाल पूछना शुरू किया। अब तक 270 से ज्यादा सवाल पूछ चुका हूं। मैंने जितने भी सवाल पूछे हैं, उसकी पूरी जानकारी अपने सोशल मीडिया अकाउंट्स पर डालने का काम किया। क्योंकि मैं मानता हूं कि कहीं ना कहीं यह अधिकार सिर्फ सांसद का नहीं है। आम जनता का भी है कि हमारे सांसद ने क्या किया और हमारे सवाल पूछे उसका जवाब क्या मिला यह जानकारी उन तक भी पहुंचनी चाहिए
सवालः आपने खुद बताया कि 3 साल से अधिक समय आपको हो गया। क्या वजह ऐसी रही क्योंकि इंडिया न्यूज हरियाणा प्रदेश का नंबर वन सबसे ज्यादा भरोसेमंद चैनल जिसको तमाम सियासतदानों के अलावा पूरी ब्यूरोक्रेसी की हम बात करें, आम जनता की बात करें, तमाम लोग देखते हैं। क्या ऐसी वजह रही कि आपने इतने समय के दौरान कभी हमें मौका नहीं दिया कि हम आपका इंटरव्यू करें।
जवाबः नहीं इसमें कोई राय दो राय नहीं है कि आप आपका प्लेटफॉर्म और आपका चैनल हरियाणा में सबसे ज्यादा देखा जाने वाला चैनल है। मैं सिर्फ यही कहूंगा कि हलवाई अपनी मिठाई खुद नहीं खाता। इसलिए आप कह सकती हैं कि मैं कहीं ना कहीं थोड़ा संकोची था इस बात को लेकर। लेकिन मैं आज आपको आश्वस्त करता हूं। आगे आपको यह गिला शिकवा नहीं कि मिलेगा।
क्योंकि मैं मीडिया का काम खुद करता रहा हूं पहले और मैं मानता हूं कि मीडिया की एक बहुत अहम भूमिका है। जैसे हम राजनीति में सार्वजनिक जीवन में अपना काम करते हैं लोगों की भलाई के लिए। उसी तरीके से मीडिया की भी एक बहुत बड़ी भूमिका होती है लोगों के मुद्दे उठाने का, उनकी बात उठाने का और कहीं ना कहीं उनकी बात, जो लोग पावर में है, ताकत में हैं, सरकार में हैं उन तक पहुंचाने का। तो मैं जरूर आपको आज एक बात का वादा करके जाता हूं कि अब मैं आपके कार्यक्रम में ज्यादा आया करूंगा या ज्यादा लोगों में रूबरू हुआ करूंगा। बहुत-बहुत धन्यवाद।

