हरियाणा सरकार ने गुरुग्राम में प्रस्तावित मेट्रो परियोजना को समय पर पूरा करने की दिशा में एक बड़ा और अहम फैसला लिया है। सरकार ने मिलेनियम सिटी सेंटर–साइबर सिटी मेट्रो कॉरिडोर के लिए निजी भूमि और संपत्तियों की आपसी बातचीत के माध्यम से सीधी खरीद की नीति अधिसूचित कर दी है। यह नीति कुल 29.05 किलोमीटर लंबे मेट्रो कॉरिडोर पर लागू होगी और इसके तहत गुरुग्राम मेट्रो रेल लिमिटेड (GMRL) निजी भूमि मालिकों से सहमति के आधार पर जमीन खरीदेगी।
टाउन एंड कंट्री प्लानिंग विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव एके सिंह की ओर से इस नीति की अधिसूचना जारी कर दी गई है। सरकार का स्पष्ट उद्देश्य है कि मेट्रो परियोजना में किसी भी तरह की देरी न हो और भूमि अधिग्रहण की लंबी कानूनी प्रक्रिया से बचा जा सके।
जमीन मालिकों को मिलेगा ज्यादा लाभ
नई नीति के तहत जो भूमि मालिक आपसी सहमति से अपनी जमीन बेचने के लिए तैयार होंगे, उन्हें भूमि अधिग्रहण, पुनर्वास और पुनर्स्थापन में उचित मुआवजा और पारदर्शिता का अधिकार अधिनियम, 2013 के तहत मिलने वाली राशि से कम से कम 25 प्रतिशत अधिक मुआवजा दिया जाएगा। इसके साथ ही भूमि पंजीकरण शुल्क में छूट, पुनर्वास और पुनर्स्थापन से जुड़े लाभ भी प्रदान किए जाएंगे। जमीन खरीद की पूरी राशि सीधे भूमि मालिकों के बैंक खातों में ट्रांसफर की जाएगी और इसका पूरा भुगतान GMRL द्वारा किया जाएगा।
मना करने पर अधिग्रहण का विकल्प सुरक्षित
सरकार ने यह भी साफ कर दिया है कि यदि कोई भूमि मालिक आपसी बातचीत के जरिए जमीन बेचने से इंकार करता है, तो राज्य सरकार के पास 2013 के अधिनियम के तहत भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू करने का अधिकार सुरक्षित रहेगा। एक बार अधिग्रहण प्रक्रिया शुरू होने पर भूमि मालिकों के पास मुआवजे की शर्तें तय करने का विकल्प नहीं बचेगा।
क्यों लाई गई यह नीति
हरियाणा सरकार के अधिकारियों के अनुसार, मेट्रो परियोजना राज्य और केंद्र सरकार की ड्रीम परियोजना है। यदि जमीन अधिग्रहण पूरी तरह 2013 के अधिनियम के तहत किया जाता, तो सामाजिक प्रभाव आकलन, आपत्तियां, सुनवाई और कानूनी प्रक्रियाओं के कारण इसमें वर्षों लग सकते थे। कई मामलों में अदालतों में केस चले जाने से परियोजनाएं लंबित हो जाती हैं। इन्हीं कारणों से सरकार ने तेज और व्यावहारिक समाधान के तौर पर यह सीधी खरीद नीति लागू की है।
ऐसे काम करेगी नीति
नीति के तहत सबसे पहले मेट्रो कॉरिडोर के लिए आवश्यक भूमि की पहचान की जाएगी। इसके बाद गुरुग्राम उपायुक्त की अध्यक्षता में गठित कमेटीमुआवजे का निर्धारण करेगी और पूरी बातचीत प्रक्रिया की निगरानी करेगी। भूमि खरीद से पहले विभिन्न विभागों की संयुक्त टीम निरीक्षण करेगी और राजस्व रिकॉर्ड के जरिए दस्तावेजों की जांच होगी। इच्छुक भूमि मालिकों की पहचान के बाद अखबारों में सूचना प्रकाशित कर 30 दिन तक आपत्तियांआमंत्रित की जाएंगी। समझौता होने के बाद भूमि मालिकों को लिखित में यह देना होगा कि वे भविष्य में किसी अदालत या कानूनी मंच पर अतिरिक्त मुआवजे की मांग नहीं करेंगे।
2041 तक 200 किमी का ट्रांसपोर्ट नेटवर्क
गौरतलब है कि हरियाणा सरकार ने गुरुग्राम–मानेसर कॉम्प्लेक्स के लिए लगभग 200 किलोमीटर लंबे जन परिवहन नेटवर्क की योजना तैयार की है, जिसे वर्ष 2041 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। मिलेनियम सिटी सेंटर–साइबर सिटी मेट्रो कॉरिडोर इसी योजना का अहम हिस्सा है। इसका अधिकांश हिस्सा सरकारी भूमि से होकर गुजरेगा, लेकिन कुछ स्थानों पर निजी भूमि और संपत्तियों की जरूरत पड़ेगी। मेट्रो डिपो भी सरकारी भूमि पर प्रस्तावित है, हालांकि सीमित निजी भूमि की आवश्यकता बनी रहेगी।
यह नीति न केवल मेट्रो परियोजना को गति देगी, बल्कि भूमि मालिकों को भी बेहतर मुआवजा और भरोसेमंद प्रक्रिया का लाभ देगी।

