मौजूदा बजट की विश्वसनीयता पर उठे सवालों के बाद वित्तीय सहायता के लिए चल रही बातचीत हुई ठप
Pakistan Economy Crisis (द भारत ख़बर), इस्लामाबाद : आर्थिक तंगी से जूझ रहे पाकिस्तान को अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) से झटका मिला है। दरअसल पाकिस्तान की आर्थिकता पिछले कई साल से खाड़ी देशों और आईएमएफ से मिलने वाली आर्थिक सहायता पर ही पूरी तरह से निर्भर है। पाकिस्तान की सरकारें घरेलू आय के लिए नाममात्र प्रयास कर रहीं हैं।
जिसका खामियाजा पाकिस्तान की जनता को भुगतना पड़ रहा है। इसी बीच आई एक नई सूचना के अनुसार पाकिस्तान को उस समय बड़ा झटका लगा जब पाकिस्तान और आईएमएफ के बीच वित्तीय सहायता को लेकर चल रही बातचीत अचानक रुक गई। यदि यह बातचीत सिरे चढ़ जाती तो पाकिस्तान को एक अरब डॉलर की वित्तीय सहायता मिलने का रास्ता साफ हो जाता। रिपोर्ट्स के मुताबिक, इसकी वजह मौजूदा बजट की विश्वसनीयता पर उठ रहे सवाल और टैक्स कलेक्शन का कम होना है।
दशकों से पाकिस्तान को मिल रही आईएमएफ से मदद
दशकों से हर आईएमएफ कार्यक्रम में पाकिस्तान से कर प्रशासन सुधारने, कर आधार बढ़ाने और राजस्व लक्ष्य बढ़ाने की मांग की जाती रही है, लेकिन इन प्रयासों के बावजूद नतीजे सीमित ही रहे हैं।औपचारिक क्षेत्र अभी भी कर का अधिकांश बोझ उठाता है, जबकि संपत्ति के बड़े हिस्से, खासतौर पर खुदरा कारोबार, कृषि और अन्य क्षेत्रों पर बहुत कम कर लगता है या वे पूरी तरह व्यवस्था से बाहर हैं।अनौपचारिक अर्थव्यवस्था, जिसे अक्सर जीडीपी का लगभग 40 प्रतिशत माना जाता है, काफी हद तक कर प्रणाली की पकड़ से बाहर है।
इसलिए हुआ पाकिस्तान को नुकसान
रिपोर्ट के अनुसार आईएमएफ ने एक बार फिर पाकिस्तान के टैक्स सिस्टम पर सवाल उठाए हैं। आईएमएफ का कहना है कि राजस्व लक्ष्य हासिल होना मुश्किल दिखाई देता है। पाकिस्तान की कर व्यवस्था लंबे समय से कमजोर प्रदर्शन करती रही है। देश का टैक्स-टू-जीडीपी अनुपात 9-10 प्रतिशत के आसपास ही अटका है, जो समान उभरती अर्थव्यवस्थाओं की तुलना में सबसे कम है। कर दायरा सीमित है, अनौपचारिक अर्थव्यवस्था बहुत बड़ी है और कर अनुपालन भी कमजोर है।
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