दिसंबर में ज्यादात्तर समय गंभीर श्रेणी में बनी रही हवा की गुणवत्ता
Delhi Pollution Update (द भारत ख़बर), नई दिल्ली : अक्टूबर से शुरू हुआ दिल्ली में प्रदूषण बढ़ने का सिलसिला दिसंबर के अंतिम सप्ताह तक भी जारी है। ऐसा नहीं है कि साल के अन्य महीनों में यहां प्रदूषण नहीं होता। लेकिन सर्दियों की शुरुआत होते ही इसमें तेजी से वृद्धि होना शुरू हो जाता है और पूरी राजधानी एक गैस चैंबर में बदल जाती है। इस साल भी ऐसा ही हो रहा है। हालांकि इस साल हालात पिछले साल से ज्यादा गंभीर हैं। राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में स्मॉग की मोटी परत छाई हुई है। सेंट्रल पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड के अनुसार दिल्ली में आज का एक्यूआई 463 है, जिसे ‘गंभीर’ श्रेणी में रखा गया है।
ज्यादा दिन रेड जोन में रहा एक्यूआई
दिसंबर का महीना बीतने को है, लेकिन दिल्ली की हवा अब तक जहरीली बनी हुई है। इस महीने अब तक ऐसा एक भी दिन दर्ज नहीं हुआ, जब वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 200 से नीचे रहा हो। पूरे दिसंबर में दिल्लीवासियों को मध्यम श्रेणी की हवा भी नसीब नहीं हुई। सीपीसीबी के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, दिसंबर में अब तक करीब 20 दिन ऐसे रहे हैं, जब हवा की गुणवत्ता रेड जोन में दर्ज की गई।
दिसंबर में इस तरह रही प्रदूषण की स्थिति
इस साल दिसंबर में हालात कहीं ज्यादा खराब हैं। 1 से 8 दिसंबर तक लगातार एक्यूआई 300 से ऊपर दर्ज किया गया, यानी हवा लगातार बहुत खराब रही। बीच में केवल दो दिनों के लिए थोड़ी राहत मिली, जब एक्यूआई खराब श्रेणी तक नीचे आया, लेकिन 11 दिसंबर से प्रदूषण फिर रेड जोन में लौट गया और तब से वहीं बना हुआ है। इन दो दिनों को छोड़ दिया जाए, तो पूरे महीने दिल्ली की हवा अधिकतर समय बहुत खराब श्रेणी में रही है। सीपीसीबी के मानकों के मुताबिक, एक्यूआई 0 से 50 के बीच होने पर हवा को अच्छा, 51 से 100 संतोषजनक, 101 से 200 मध्यम, 201 से 300 खराब, 301 से 400 बहुत खराब और 401 से 500 गंभीर माना जाता है।
दिल्ली में प्रदूषण का मुख्य कारण
कुछ साल पहले तक दिल्ली में प्रदूषण का कारण पड़ोसी राज्यों द्वारा धान के अवशेषों में आग लगाने को बताया जाता था। लेकिन इस बार पड़ोसी राज्यों ने धान के अवशेष प्रबंधन का वैज्ञानिक उपाय किया। जिसके बाद बहुत कम धुंआ उत्पन्न हुआ। वर्तमान में दिल्ली में प्रदूषण की असली वजह यहां पर वाहनों से निकलने वाला धुआं, उद्योगों से निकलने वाला धुआं, धूल-मिट्टी के कण और लोगों द्वारा कूड़े में लगाई जा रही आग हैं। वातावरण विशेषज्ञ पहले ही स्पष्ट कर चुके हैं कि दिल्ली प्रदूषण में सबसे बड़ा कारक यहां पर फैला वाहनों का धुआं है। जोकि वातावरण को सबसे ज्यादा प्रभावित कर रहा है।
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