- हमलों के बावजूद मंदिर ने भारत की सांस्कृतिक एकता की भावना को मजबूत किया
PM Modi On Somnath Temple, (द भारत ख़बर), नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमनाथ मंदिर की अपनी पिछली यात्राओं की यादें आज सोशल मीडिया पर साझा कीं। ‘एक्स’ के जरिये उन्होंने मंदिर पर बार-बार हुए ऐतिहासिक हमलों के बावजूद आस्था की दृढ़ता पर भी प्रकाश डाला। प्रधानमंत्री ने कहा कि सोमनाथ मंदिर पर कई हमले हुए, लेकिन लोगों के आध्यात्मिक संकल्प को कमजोर करने में ये हमले विफल रहे। पीएम मोदी सोमनाथ स्वाभिमान पर्व समारोह में भाग लेने के लिए 11 जनवरी को सोमनाथ जाएंगे।
1026 में मंदिर ने इतिहास में पहला हमला झेला
पीएम ने बताया कि हमलों से देश के लोग कमजोर नहीं हुए, बल्कि इसके विपरीत, इन वारदातों ने भारत की सांस्कृतिक एकता की भावना को मजबूत किया और सोमनाथ मंदिर को बार-बार पुनर्जीवित और पुनर्निर्मित किया गया। बता दें कि एक हजार साल पहले, जनवरी 1026 में, सोमनाथ मंदिर ने अपने इतिहास में पहला हमला झेला था। उसके बाद भी मंदिर पर हुए कई हमले हमारी शाश्वत आस्था को हिला नहीं सके।
सोमनाथ स्वाभिमान पर्व
प्रधानमंत्री ने कहा, आज से सोमनाथ स्वाभिमान पर्व शुभ रूप से शुरू हो रहा है। उन्होंने इस कार्यक्रम को यादों का त्योहार बताया। पीएम ने कहा, मैं सोमनाथ की अपनी पिछली यात्राओं की कुछ तस्वीरें साझा कर रहा हूं। उन्होंने एक्स पर लिखा, यदि आप भी सोमनाथ गए हैं, तो कृपया अपनी तस्वीरें #SomnathSwabhimanParv के साथ साझा करें।
भारत माता के अनगिनत सपूतों को याद करने का त्योहार
पीएम मोदी ने बताया कि सोमनाथ स्वाभिमान पर्व का यह अवसर भारत माता के उन अनगिनत सपूतों को याद करने का त्योहार है जिन्होंने अपने सिद्धांतों और मूल्यों से कभी समझौता नहीं किया, चाहे समय कितना भी चुनौतीपूर्ण या डरावना क्यों न रहा हो। उन्होंने कहा, समय कितना भी कठिन और भयानक क्यों न रहा हो, उनका संकल्प हमेशा अडिग रहा।
हमारी सभ्यता और सांस्कृतिक चेतना के प्रति उनकी निष्ठा अटूट रही। अटूट आस्था के एक हजार साल का यह अवसर हमें राष्ट्र की एकता के प्रयासों के प्रति लगातार समर्पित रहने के लिए प्रेरित करता है। प्रधानमंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि भारत की सभ्यता और सांस्कृतिक चेतना के प्रति उनका अटूट संकल्प और प्रतिबद्धता बरकरार रही, जो राष्ट्रीय एकता के प्रति निरंतर समर्पण के लिए प्रेरित करती है।
2001 में आयोजित एक कार्यक्रम की झलकियां भी कीं शेयर
प्रधानमंत्री ने 31 अक्टूबर, 2001 को सोमनाथ में हुए एक कार्यक्रम की झलकियां भी शेयर कीं, जो 1951 में मंदिर के पुनर्निर्माण और उद्घाटन की 50वीं वर्षगांठ के मौके पर आयोजित किया गया था। उन्होंने याद किया कि 1951 का ऐतिहासिक समारोह तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद की उपस्थिति में हुआ था और मंदिर के पुनर्निर्माण में सरदार वल्लभभाई पटेल और के.एम. मुंशी जैसे नेताओं के महत्वपूर्ण योगदान को स्वीकार किया।
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