Punjab News: नई दिल्ली में मौजूद नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) ने पंजाब में नदियों और नालों की डी-सिल्टिंग साइट्स के बारे में एक अहम आदेश जारी किया है। इसमें ज़रूरी एनवायरनमेंटल क्लीयरेंस मिलने तक मटीरियल की कमर्शियल बिक्री पर रोक लगा दी गई है। ट्रिब्यूनल ने 17 फरवरी के अपने आदेश में कहा कि अगर डी-सिल्टिंग से निकला मटीरियल खुले बाज़ार में बेचा जाता है, तो यह काम कमर्शियल कैटेगरी में आता है और इसके लिए पहले से मंज़ूरी लेनी ज़रूरी है।
यह आदेश पंजाब के कई ज़िलों, जिनमें SAS नगर, पटियाला, मानसा, रोपड़, लुधियाना, श्री आनंदपुर साहिब और SBS नगर शामिल हैं, में जारी डी-सिल्टिंग टेंडर नोटिस को चुनौती देने वाली एक याचिका पर आया है। बताया जा रहा है कि राज्य में कुल 85 डी-सिल्टिंग साइट्स की पहचान की गई है, जिनमें से 36 साइट्स की नीलामी होनी है। अगली सुनवाई 14 मई, 2026 को होगी।
माइनिंग एक्टिविस्ट बचित्तर सिंह जटाना ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस की और आरोप लगाया कि डी-सिल्टिंग के नाम पर माइनिंग के बाद मटीरियल को कमर्शियली बेचा जा रहा है। उन्होंने कहा कि बिना एनवायरनमेंटल क्लीयरेंस के काम करना EIA नोटिफिकेशन 2006 का उल्लंघन है और इससे निचले इलाकों की ज़मीन पर असर पड़ सकता है।
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किसानों ने यह भी शिकायत की कि उनकी ज़मीन से गाद निकालने से पहले उनसे सलाह नहीं ली जाती और अगर वे विरोध करते हैं, तो कॉन्ट्रैक्टर उन पर दबाव डालते हैं।
इस मामले पर रोपड़ के DC आदित्य देचलवाल ने कहा कि NGT ने गाद निकालना पूरी तरह से बंद नहीं किया है, बल्कि कमर्शियल इस्तेमाल के लिए एनवायरनमेंटल क्लीयरेंस मांगा है। उन्होंने कहा कि ऑर्डर और टेंडर की जांच की जाएगी और ज़रूरी कार्रवाई की जाएगी।
